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सौर ऊर्जा को मिला बढ़ावा इंदौर शहर की 1100 छतों पर लगे हैं सोलर पैनल

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इंदौर. सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ अब इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे है। गर्मी में जनता कर्फ्यू के दौरान शहर की छतों ने सूरज की किरणों से काफी बिजली बनाई है। इस दौरान भरपूर गर्मी रही और प्रतिदिन सूरज की किरणें साढ़े बारह घंटे तक मौजूद होने से सौर ऊर्जा से बिजली बनने का काम काफी तेजी से चला।
इंदौर, उज्जैन, महू, पीथमपुर, देवास, रतलाम आदि शहरों में 1700 छतों ने 4 करोड़ रु. को उत्पादित कीमत की बिजली बनाई है। अकेले इंदौर शहर के 1100 घरों में सोलर ऊर्जा से बिजली बन रही है। प्रदेश में सबसे ज्यादा रूफ टॉप सोलर एनर्जी पर काम इंदौर क्षेत्र में हुआ है। अंचल के 1700 स्थानों पर सोलर पैनल के माध्यम से बिजली उत्पादन हो रहा है। कोरोना कर्फ्यू के दौरान इंदौर शहर की 1100 छतों से 40 लाख यूनिट और अंचल की छतों से कुल 65 लाख यूनिट बिजली उत्पादित हुई है।

बारिश के समय बादल और ठंड के दिनों में दिन छोटे होने के कारण सोलर बिजली का उत्पादन 40 प्रतिशत घट जाता है। बारिश में सूरज कई दिनों तक बादलों में लुकाछुपी करता है। शीतकाल में सूरज की किरणों को उपलब्धता नौ से साढ़े नौ घंटे ही रहती है इसलिए बिजली उत्पादन क्षमता कम हो जाती है जबकि गर्मी में दिन बड़े होने से  उत्पादन क्षमता अधिक होती है |

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निगम की मॉनिटरिंग कमजोर, जलजमाव रोकने के लिए सख्त सिस्टम की जरूरत

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इंदौर. शहर में यातायात की दृष्टि से सबसे ज्यादा भार बीआरटीएस पर वाहनों का रहता है। ऐसे में बारिश के दौरान उक्त मार्ग पर करीब 50 से अधिक जगह जलजमाव के कारण लोगों को बस लेन से निकलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। बारिश थमने के बाद निगम यहां निकासी के लिए कोई पहल नहीं करता है।
बीआरटीएस पर इंदिरा प्रतिमा के सामने, प्रतिमा के पीछे, जीपीओ चौराहा, गीता भवन चौराहा, पलासिया, इंडस्ट्री हाउस, एलआईजी चौराहा, चन्द्रनगर चौराहा, विजयनगर चौराहा आदि जगह बारिश के दौरान जल जमाव के कारण तालाब जैसी स्थिति निर्मित हो जाती है। निगम के जनकार्य विभाग द्वारा जल एवं ड्रेनेज यंत्रालय के मार्फत बीआरटीएस पर जहां भी जल जमाव की स्थिति निर्मित होती है, वहां पर निकासी के लिए बारिश थमने के बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जबकि जल जमाव के दौरान समस्या उत्पन्न होने से संबंधित प्रचार प्रसार तेजी से होता है, फिर भी निगम अधिकारी नजरअंदाज करते हैं।

300 करोड़ का नाला टैपिंग प्रोजेक्ट, नतीजा कुछ नहीं निकल रहा
नगर निगम द्वारा की गई नाला ट्रैपिंग में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। स्टॉर्म वाटर लाइन और ड्रेनेज लाइन अलग-अलग होना चाहिए, लेकिन निगम इंजीनियर और ड्रेनेज दरोगाओं ने काम बचाने के लिए स्टॉर्म वाटर लाइन को ड्रेनेज से जोड़ दिया। 50 करोड़ खर्च किए गए. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है। उल्टा बारिश का पानी सड़कों के साथ घरों में भर रहा है, क्योंकि पानी की निकासी का ध्यान ही नहीं रखा। इसलिए शहर के सवा दो सौ इलाके हल्की बारिश में ही डूब जाते हैं। सवाल है कि निगम सफाई जैसा पानी निकासी का सिस्टम क्यों नहीं बना रहा है?

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वैक्सीनेशन महाअभियान • आज 2 लाख टीकों का लक्ष्य, प्रोत्साहन में कई इनाम भी.

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कोरोना से बचाव के लिए इंदौर सहित पूरे प्रदेश में सोमवार से वैक्सीन महाअभियान की शुरुआत होगी। इंदौर जिले को वैक्सीन के तीन लाख डोज मिल चुके हैं। 2.77 लाख डोज कोबी शील्ड के और 23 हजार को वैक्सीन के हैं। 18 + वाला कोई भी व्यक्ति जिले में बने 1052 केंद्रों में से किसी पर भी जाकर वैक्सीन का पहला या दूसरा डोज लगवा सकता है। हालांकि कोवैक्सीन की संख्या कम होने से इसका केवल दूसरा डोज ही लगेगा। अभी जिले में करीब 18 लाख वैक्सीन डोज लग चुके हैं। इसमें 15.50 लाख लोगों को पहला डोज लगा है। इंदौर कुल वैक्सीन डोज की संख्या में मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे मेट्रो शहर की कतार में है और देश में 12वें नंबर पर है। आबादी को वैक्सीनेटेड करने के प्रतिशत के मामले में इंदौर 55% के साथ देश में दूसरे नंबर पर है। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा, केंद्र पर आखिरी व्यक्ति रहने तक वैक्सीन लगाएंगे। मौके पर ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। वैक्सीन लगवाने वालों के लिए कलेक्टर ने आधे दिन के सवैतनिक अवकाश देने के आदेश भी जारी किए हैं।

याद रखें  :
1.  सुबह 8 बजे से वैक्सीन लगेगी। केंद्र पर जब तक हितग्राही रहेगा, तब तक वैक्सीन लगाई जाएगी।
2. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं और यदि नहीं हुआ तो केंद्र पर ही रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।
3. आधार कार्ड हो तो सबसे अच्छा, नहीं तो वोटर आईडी, लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन पासबुक, बैंक पासबुक चलेगी।
4 . कोवैक्सीन का दूसरा डोज 28 दिन बाद लग सकता है। कोविशील्ड का डोज 84 दिन के बाद ही लगेगा। आप अपने पहले डोज से दिनों की गणना कर लें, क्योंकि पोर्टल इससे पहले आपका नाम नहीं लेगा।

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श्री गौड़ मालवीय ब्राह्मण समाज नवयुवक मंडल द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ सम्पन्न

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इंदौर. सेवा और परमार्थ के कार्य में हमेशा आगे रहने वाला श्री गौड़ मालवीय ब्राह्मण समाज समाज सेवा के कार्य के अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता रहता है ऐसा ही एक और मौका था, स्कीम नंबर 78 पानी की टंकी के पास हनुमान मंदिर परिसर में  वृक्षारोपण कार्यक्रम का जहाँ समाजजनों ने वृक्षारोपण कार्यक्रम किया।
कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि इंदौर समाज के अध्यक्ष सम्मानीय चंद्रशेखर शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष मुकेश मालवीय, कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन मालवीय, महामंत्री परमसुख मालवीय, कार्यकारिणी सदस्य जगन्नाथ , खंडवा समाज के नवयुवक उपाध्यक्ष राकेश मालवीय, इंदौर नवयुवक मंडल अध्यक्ष उमेश मालवीय, उपाध्यक्ष जय प्रकाश विश्वकर्मा, महामंत्री कंचन शर्मा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार आशीष मालवीय, कीर्तन मालवीय, नयन विश्वकर्मा, तन्मय विश्वकर्मा एवं समाज समिति एवं नवयुवक मंडल के साथी गण उपस्थित रहे |

अध्यक्ष चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि समाज के सभी सदस्यों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहन किया जा रहा है पत्रकार आशीष मालवीय द्वारा लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है और विश्वास जताया कि नवयुवक मंडल के उमेश मालवीय जल्द ही समाज के सभी सदस्यों को शत प्रतिशत टीकाकरण करवा लेंगे ।

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दर्जनों मामले है ऐसे, सवाल यह की शासन विस्तृत जांच कब करेगा ?

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नर्सिंग कॉलेज की मान्यता के लिए किया फर्जी अस्पताल खड़ा शा. नर्सिग महाविद्यालय के उप प्राचार्य को संभागायुक्त ने किया निलंबित

इंदौर. संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कृष्णा पिल्लई फैकल्टी (उप प्राचार्य) शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, इन्दौर को अपने पदीय कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया है। कृष्णा पिई फैकल्टी ( उप प्राचार्य) शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय इन्दौर द्वारा किये गये निरीक्षण के आधार पर मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल, भोपाल के आदेश के अनुसार आदित्य राज अस्पताल एवं रिचर्स सेन्टर से संलग्न आदित्यराज कॉलेज ऑफ नर्सिंग धार का रजिस्ट्रेशन होना पाया गया। इस संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर धार द्वारा गत 12 जून को गठित जांच दल द्वारा आदित्यराज अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर, कुक्षी का स्थल निरीक्षण कराया गया। स्थल निरीक्षण अनुसार मौके पर आदित्य राज कॉलेज ऑफ नर्सिंग अस्पताल संचालित होना नहीं पाया गया।

भवन में 37 पलंग पाये गये जिनका कोई उपयोग नहीं किया जा रहा था एवं उक्त भवन में स्वास्थ्य संबंधी कोई उपकरण भी उपलब्ध नहीं होना पाया गया। कृष्णा पिल्लई उप प्राचार्य शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय, इन्दौर द्वारा किये गये फर्जी निरीक्षण एवं अपने पदीय कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरती जाने तथा उनका कार्य सिविल सेवा आचरण नियम के विपरीत पाये जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
ज्ञात हो की ग्वालियर में भी ऐसे फर्जी अस्पताल पाए गए है दरअसल मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज खोलने के लिए स्वयं का 100 बिस्तरों का अस्पताल होना आवश्यक है, ऐसे में नर्सिंग कॉलेज संचालक फर्जी अस्पताल बनाते हैं जो कि कागजों पर होता है जिसका निरीक्षण अधिकारियों से सेटिंग कर करवा लिया जाता है | ऐसे मामले पूरे मध्यप्रदेश में दर्जनों की संख्या में है सवाल यह उठता है कि शासन इस मामले में विस्तृत जांच कब करेगा |

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संस्थाओं से लेकर निजी कॉलोनाइजर होंगे प्रशासन के निशाने पर,भू माफियाओं पर प्रशासन कसेगा नकेल कलेक्टर ने बनाया त्रिस्तरीय प्लान

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इंदौर . भूमाफियाओं के कब्जे वाली और घोटालों से घिरी गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं की बंद फाइलें फिर खुल रही हैं। प्रशासन ने इन संस्थाओं की सूची बनाकर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। संस्थाओं में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई के साथ ही पात्र और पीड़ित सदस्यों को भूखंड मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर इसी तर्ज पर निजी कॉलोनाइजर और बिल्डरों द्वारा प्लॉट धारकों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देश पर अधिकारियों ने तीन स्तर पर लोगों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ऑपरेशन क्लीन के तहत भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इनमें जाग्रति सविता, कविता, राजेश्वरी देवी अहिल्या श्रमिक कामगार, श्रीराम, गांधी नगर, सरस्वती न्याय नगर, नवभारत, आकाश, लक्ष्मण, जनकल्याण, नंद गृह निर्माण सहित अन्य सहकारी संस्थाएं शामिल हैं। संस्थाओं में कब्जा जमाए माफिया को भी चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी। इनमें से कुछ के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए गए थे। इसके बाद प्रदेश में भाजपा सरकार ने भूमाफिया सहित अन्य माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की। इतना ही नहीं, प्रशासन ने अलग-अलग संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज तक करवाई थी, लेकिन कोरोना की दूसरी जगह के चलते प्रशासन की मुहिम थम गई थी। कलेक्टर मनीष सिंह ने पुनः इस मुहिम को आगे बढ़ा दिया है और मंगलवार से इसका श्रीगणेश श्री महालक्ष्मी गृह निर्माण संस्था से शुरू कर दिया। अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर, एसडीएम अंशुल खरे सहित अधिकारियों ने कॉलोनी का मुआयना करने के साथ ही पीड़ितों से चर्चा कर उन्हें प्लॉट दिलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।

पहले चरण में विवादित 12 संस्थाओं के पीड़ितों को मिलेगा न्याय
श्री महालक्ष्मी नगर से शुरू हुई प्रशासन की भूमाफियाओं के खिलाफ मुहिम के पहले प्रशासन ऐसी 12 सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं को ले रहा है, जिनमें सबसे अधिक विवाद हैं। इन संस्थाओं में श्री महालक्ष्मी नगर, न्याय नगर, पुष्प विहार, राजगृही, कविता, श्रीराम गृह निर्माण आदि शामिल है। इन संस्थाओं में चार से साढे चार हजार पीड़ितों को उनके हक के प्लॉट प्रशासन दिलाएगा।
दूसरे चरण में मिलेंगे पांच हजार लोगों को प्लॉट
कलेक्टर मनीष सिंह ने अभियान का खाका इस प्रकार तैयार किया है कि अधिक से अधिक पीड़ितो को उनके सपनों का अशियाना मिल सके। इसके बहुत गृह निर्माण संस्था ही नहीं, निजी कॉलोनाइजर से ठगाए गए लोगों को राहत मिले। अपर कलेक्टर अभय बेडेकर के अनुसार दूसरे चरण में प्रशासन 116 विवादित गृह निर्माण संस्थाओं की कुडली तैयार कर करीब पांच हजार पीडित सदस्यों को प्लॉट पर कब्जे दिलाएगा।
तीसरे चरण में कॉलोनाइजर व बिल्डरों से ठगाए लोगों को राहत
अपर कलेक्टर बेडेकर की माने तो भूमाफियाओं के खिलाफ अभियान आगे चलता रहेगा। गृह निर्माण संस्थाओं के पीड़ित सदस्यों को न्याय दिलाने के बाद प्रशासन निजी कॉलोनाइजर और बिल्डरों पर नकेल कसेगा और धनराशि देकर भी लोगों को प्लॉट या अपार्टमेंट नहीं देने वाले बिल्डर और कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकार अलग अलग चरणों में लोगों को उनके हक के प्लॉट दिलाकर न्याय दिलाया जाएगा।

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जनता के पैसे को कर रहे बर्बाद 550 सिटी बसें तो चल नहीं रहीं, 400 और लेंगे

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इंदौर. नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी अपनी मनमानी पर उतर आए हैं। इन्हें जनता की गाढ़ी कमाई का रुपया खर्च करने में मजा आता है। क्योंकि यह रुपया इनका स्वयं का नहीं है। इसलिए यह नित नए नए आदेश निकाल कर रुपयों की बर्बादी कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है कि शहर में 400 नई सिटी बसें और मंगाने जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि पहले से ही 550 सिटी बसें चल रही है उन्हें यात्री नहीं मिल रहे हैं। अब यह 400 सिटी बसें किन- किन रूटों पर चलाएंगे। इन्हीं अधिकारियों से कि पूछा जाए की यह करोड़ों रुपए को बर्बादी किसके कहने पर कर रहे हैं अगर जवाब नहीं दें तो इनके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाकर इन्हें सबक सिखाया जा सके। वैसे भी शहर में 15000 ऑटो रिक्शा, 3000 से ज्यादा मैजिक व वेन टैक्सी या अन्य कमर्शियल वाहनों के साथ लाखों निजी वाहन सड़कों पर पहले से दौड़ रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो नगर निगम अगले कुछ माह में शहर के लोगों को सुखद व सुलभ सफर का लॉलीपॉप देखकर 400 नई सिटी बसें संचालित करने की बात कर रहा है। इसके टेंडर भी हो चुके हैं, आरटीओ को इन बसों को चलाने के लिए रूट तय करने का पत्र लिखा है। नए रूट अभी तक तैयार नहीं हुए हैं, ऐसे में सवाल ये उठता है कि इतनी अधिक बसें कैसे और कहां चलाई जाएंगी। वर्तमान में यात्रियों का टोटा पड़ा हुआ है कई बसें रूटों पर बंद हो गई है।
शहर में 950 बसें रोड पर आ जाती है तो ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ेगा, अभी भी प्रमुख मार्गों पर सिटी बसों द्वारा प्रतिदिन जाम की स्थिति निर्मित होती है।

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इंदौर में आई मानसून की सुहानी दस्तक, 20 जून के बाद जमकर बारिश की संभावना

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पिछले दो दिन हुई तेज बारिश के अगले ही दिन शुक्रवार को मौसम विभाग ने इंदौर में मानसून की दस्तक की घोषणा कर दी। दक्षिण- पश्चिम मानसून तय समय 20 जून से दो दिन पहले ही आ गया। लगातार तीन से चार दिन से हवा का रुख दक्षिण-पश्चिम बना हुआ था। तापमान में भी लगातार कमी आ रही थी। रुक-रुक कर बारिश भी हो रही थी। इन सभी को देखकर मानसून सक्रिय होने की घोषणा कर दी गई। मौसम विभाग की मानें, तो 20 जून के बाद इंदौर सहित मालवा-निमाड़ में बारिश जोर पकड़ेगी।
मौसम विशेषज्ञ पी के शर्मा ने बताया, बंगाल की खाड़ी में मजबूत सिस्टम बन रहा है। अरब सागर की ओर से भी हल्की नमी आ रही है। इस कारण अगले 24 घंटे में मानसून पूरी तरह से मप्र को कवर कर लेगा। हालांकि बारिश की शुरुआत पूर्वी मध्य प्रदेश से होगी। यहां अच्छी बारिश की संभावना है। यह सिस्टम मालवा-निमाड़ को भी भिगोएगा। हालांकि इंदौर में मानसून की दस्तक अरब सागर की ओर से माना जाता है, लेकिन पिछले दो साल से मानसून बंगाल की खाड़ी से दस्तक दे रहा है। पिछले साल भी इंदौर में अच्छी बारिश हुई थी। आंकड़ा का करीब 50 फीसदी तक पहुंच गया था। मौसम विभाग की मानें, तो निम्न दाब का क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी बिहार और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय बना हुआ है। दक्षिण पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ इसके शनिवार तक मप्र और उम्र के अन्य क्षेत्रों में सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है। खासकर बड़वानी, खरगोन, इंदौर, अलीराजपुर, झाबुआ, देवास, आगर, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़ निवा और झांसी जिलों में ज्यादा सक्रिय हो रहा है।

मानसून गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ रहा है।
 इंदौर में अब तक 38 मिमी बारिश रिकॉर्ड : बारिश का चक्र 1 जून से लेकर 3 अक्टूबर तक का रहता है। ऐसे में इस सीजन में अब तक इंदौर में 38 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। गुरुवार को भी 36 मिमी बारिश हुई थी। शहर में अधिकतम तापमान 35.2 डिग्री जबकि न्यूनतम पारा 22.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ।
 शहर एक, बारिश के आंकड़े तीन : पूर्वी क्षेत्र में 3 घंटे में 3 इंच गिरा पानी, एयरपोर्ट क्षेत्र में सिर्फ 2.8 मिमी तो कृषि कॉलेज में 2 इंच बरसा। बुधवार रात साढ़े 11 बजे से पूर्वी र में इतनी तेज बारिश हुई की महज 3 घंटे में 3.3 इंच पानी बरस गया। इस समय एयरपोर्ट से लेकर, राजेंद्र नगर महू नका तक के हिस्से में केवल 2.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

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Unlock Indore : रीजनल पार्क, मेघदूत उपवन एवं कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय खुले

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इंदौर. कोरोना संक्रमण के कम हुए प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए निगम नियंत्रण के रीजनल पार्क, मेघदूत उपवन एवं कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय को कल से प्रारंभ करते हुए सोमवार से शनिवार तक शाम 6 बजे तक खुले रखने एवं आगामी आदेश तक प्रत्येक रविवार को बंद रखने हेतु आदेश जारी किए गए।
मार्च से कोविड-19 के संक्रमण में निरंतर हो रही वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन स्तर से नगरीय क्षेत्र में कोरोना कर्फ्यू प्रभावी किया जाकर निगम नियंत्रण की रीजनल पार्क, मेघदूत उपवन एवं प्राणी संग्रहालय को आगामी आदेश तक बंद रखे जाने के निर्देश दिए गए थे।

आयुक्त सुश्री पाल द्वारा उपायुक्त एवं प्रभारी अधिकारी प्राणी संग्रहालय, रीजनल पार्क, मेघदूत उपवन को जनसामान्य के प्रवेश एवं भ्रमण के दौरान कोविड-19 से संबंधित दिशा-निर्देश जैसे कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क एवं सैनिटाइजेशन आदि के प्रयोग का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए साथ ही टिकट विंडो के बाहर एवं प्रवेश द्वार पर सोशल डिस्टेंसिंग के लिए गोले भी बनाने प्रवेश निकासी एवं भ्रमण के दौरान दर्शकों के द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने तथा इस हेतु विशेष सतर्कता एवं आवश्यक व्यवस्था नियत करने के भी निर्देश दिए गए है।

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बाबा रामदेव की रूचि के पूर्व मालिक, उमेश शाहरा के इंदौर, मुंबई और बेंगलुरु समेत 6 ठिकानों पर एक साथ सीबीआई की छापेमारी, मामला 188 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले का

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इंदौर. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शहर के बड़े कारोबारी उमेश शाहरा सहित उसके सहयोगियों पर 188.35 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में केस दर्ज किया है। इस मामले में CBI की एक टीम गुरुवार सुबह को उमेश शाहरा की तलाश में इंदौर पहुंची। टीम ने उनके घर और ऑफिस में दबिश दी। टीम अभी घर और दफ्तर की जांच कर रही है। घर में मौजूद लोगों से पूछताछ के बाद कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं।

जानकारी अनुसार, CBI की टीम ने इंदौर, मुंबई और बेंगलुरु समेत 6 शहरों में एक साथ छापेमारी की है। इंदौर में रुचि ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड में CBI ने छापेमारी की और दस्तावेज जब्त किए। उमेश के अलावा उसके सहयोगी साकेत बरोदिया और आशुतोष मिश्रा के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है।

CBI की ओर से मिली जानकारी के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर ऋण देने वाली बैंकों की संघ की ओर से कंपनी के के मुंबई स्थित कार्यालय और इंदौर स्थित कॉपोरेट दफ्तर के अलावा उनके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बैंक धोखाधड़ी के ये आरोप 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2017 की अवधि के दौरान के हैं।

इन पर आरोप है कि इन्होंने डायवर्सन, सट्टा, लेनदेन, कंसोर्टियम बैंक खातों में बिक्री की आय रुटिंग न करने और सात सिस्टर कंपनियों के साथ लेनदेन में गड़बड़ी कर उधार देने वाले बैंकों को नुकसान पहुंचाया। इसमें पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक सहित दो अन्य बैंकों के साथ गबन किया। बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर CBI ने मामले की जांच के बाद केस दर्ज कर लिया था।

इन पर केस दर्ज

CBI ने रुचि ग्लोबल लिमिटेड के अलावा, मध्यप्रदेश के इंदौर निवासी उमेश शाहरा, साकेत बरोदिया और आशुतोष मिश्रा का नाम आरोपी के रूप में दर्ज किया है। कंपनी रुचि ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी के रूप में काम करती है। यह धातु, धातु अयस्क, अनाज और दालों की थोक बिक्री करता है।

दो साल पहले भी ईडी ने करोड़ों की संपत्ति की थी अटैच

उद्योगपति उमेश शाहरा अलग-अलग मामलों में पहले भी विवादों में रहे हैं। दो साल पहले कोल आवंटन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रुचि ग्रुप व रेवती सीमेंट प्रा. लि. के निदेशक उमेश शाहरा की 22 करो़ड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच की थी। इसमें ग्राम सेजवाया (धार) स्थित 15.34 करोड़ की जमीन, रेवती सीमेंट के स्वामित्व वाली रघुराज नगर (सतना) स्थित बेशकीमती जमीन के अलावा मे. थेसगोरा प्रा. लि. के खाते में जमा 19 लाख रु. की राशि शामिल है। ईडी ने इस तरह करीब 49 करोड़ रु. की संपत्ति अटैच की थी।

2017 से 2014 के बीच आवंटित कोल ब्लॉक के मामले में तब सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें मेसर्स थेसगोरा रुद्रपुरी कोल ब्लॉक का आवंटन मे. कमल स्पांज आयरन एंड स्टील प्रालि और रेवती सीमेंट को देने का मामला भी था। दोनों कंपनियों को ये कोल ब्लॉक आयरन एंड स्टील प्लांट और सतना प्लांट के लिए मिला था। सीबीआई ने उक्त आवंटन को अवैधानिक माना था। इसके बाद रेवती को आवंटित कोल ब्लॉक के मामले में ईडी ने पीएमएलए एक्ट-2002 के तहत कंपनी के डायरेक्टर उमेश शाहरा सहित अन्य पर केस दर्ज किया था।

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