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4 साल बाद भी नहीं निपटा पटवारी भर्ती परीक्षा का मामला

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प्रदेश में 2017 में निकली 9235 पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया काे आयुक्त भू-अभिलेख ( लैंड रिकॉर्ड) विभाग चार साल बाद भी पूरी नहीं कर पाया है। खाली रह गए 235 पदाें पर अभी भी भर्ती होना बाकी है। जिसके लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल 4 हजार उम्मीदवार नौकरी मिलने की आस लगाए बैठे हैं। कुछ उम्मीदवार न्यायालय की शरण में भी गए हैं। उधर लैंड रिकॉर्ड विभाग भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही खाली रह गए 235 पदों को नई भर्ती परीक्षा के साथ समायोजित कर भर्ती करने की बात कह रहा है।

चार साल पहले लैंड रिकॉर्ड विभाग ने प्रदेश में पटवारियों के रिक्त 9235 पदों के लिए भर्ती निकाली थी। इसके लिए पीईबी से परीक्षा कराई गई थी। 9235 पदों में से 8 हजार 485 पदों पर पात्र उम्मीदवारों की भर्ती हो गई। शेष रह गए 750 पदों को वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों से भरा गया।

वेटिंग लिस्ट से उम्मीदवारों की भर्ती करने के लिए 11 बार विभाग ने काउंसलिंग की लेकिन इसके बाद भी 235 पद रिक्त रह गए। वहीं उम्मीदवारों का कहना है कि पीईबी और लैंड रिकॉर्ड विभाग के आपसी तालमेल के अभाव और सॉफ्टवेयर की गलती के कारण कई सफल उम्मीदवारों के नाम एक से अधिक जिलों के सॉफ्टवेयर में दिखने लगे। इससे लिस्ट तैयार करने में गड़बड़ी हुई। यह गलती विभाग की है लेकिन नुकसान उम्मीदवारों का हुआ। इसलिए इस भर्ती परीक्षा को लेकर न्यायालय में केस भी लगाए हैं।

2017 में जो भर्ती हुई, उसमें मुख्य लिस्ट और वेटिंग लिस्ट दोनों से उम्मीदवारों को पर्याप्त अवसर दे चुके हैं। जो 235 पद खाली रह गए हैं, उनको नई भर्ती परीक्षा के साथ जोड़कर भर लेंगे। 6 महीने में विभाग पटवारियों के करीब 1 हजार नए पदों के लिए भर्ती निकालेगा। हमने जितने पदों को भरा है, वह नियमानुसार ही भरे गए हैं।
– ज्ञानेश्वर बी. पाटिल, आयुक्त भू-अभिलेख, मप्र

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मध्यप्रदेश में CM Rise School तीन स्टेप्स में खोले जाएंगे

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मध्यप्रदेश में स्कूल तीन चरणों में तैयार होंगे।

पहले चरण में 350 स्कूलों का चयन किया है, जिनकी सूची अनुमोदन के लिए कैबिनेट को भेजी गई है। मंगलवार की बैठक में इस पर मुहर लगने की उम्मीद है। ये स्कूल हिंदी और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई कराएंगे। इनमें निजी स्कूलों की तरह केजी-नर्सरी कक्षाएं भी शुरू होंगी।

सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 9200 स्कूल तैयार कर रही है, जो पढ़ाई और सुविधाओं के मामले में नामचीन निजी स्कूलों को टक्कर देंगे। इनमें बच्चों के लिए परिवहन, खेलकूद, संगीत, तैराकी से लेकर तमाम तरह की सुविधाएं होंगी। उनमें वैज्ञानिक प्रवृत्ति विकसित करने के लिए विभिन्न् खेल और प्रतियोगिताएं कराई जाएंगी।  सूची मंजूर होते ही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी और फिर स्कूलों की औपचारिक शुरूआत। अभी स्कूल पुराने भवनों में ही संचालित होंगे। हालांकि सर्वसुविधायुक्त भवन तीन साल में तैयार करने का लक्ष्य है। इन स्कूलों में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी अलग होगी और तबादला नीति भी। हर स्कूल निर्धारित मानक पूरे करे, इसलिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है।

नया स्कूल नहीं खुलेगा

कैबिनेट से सूची मंजूर होने के बाद प्रदेश में नया स्कूल नहीं खुलेगा। बल्कि सीएम राइज स्कूलों में जैसे-जैसे सुविधाएं बढ़ेंगी, उनकी 15 किमी परिधि के स्कूलों को समाहित किया जाएगा।

तीन चरण में बनेंगे स्कूल

पहले चरण में 350 स्कूल इसी साल से शुरू होंगे और इनके भवन तीन साल में पूरे होंगे। अगले पांच साल में 8500 और उसके बाद अगले दो साल में 350 स्कूल खोले जाएंगे। पहले चरण के स्कूलों में केजी से 12वीं, दूसरे चरण में केजी से 12वीं, केजी से 10वीं और केजी से आठवीं तक के स्कूल खोले जाएंगे।

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प्रदेश में जब आईएएस ही सुरक्षित नहीं तो जनता का क्या हाल होगा

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IAS Lokesh Jangid: ‘भाभी’ का नाम लेकर तूने बुलाई अपनी मौत,IAS लोकेश को जान से मारने की धमकी

MP. लगातार तबादलों की वजह से मध्यप्रदेश के ‘खेमका’ के नाम से मशहूर हो रहे आईएएस लोकेश कुमार जांगिड़ को जान से मारने की धमकी मिली है। आरोप है कि किसी ने उन्हें अज्ञात नंबर से सिग्नल एप पर कॉल किया और कहा कि साधना भाभी का नाम लेकर तूने अपनी मौत बुला ली है। बता दें कि साढ़े चार साल की नौकरी में जांगिड़ का नौ बार तबादला हो चुका है। वहीं, कुछ समय पहले उन्हें बड़वानी जिले में अपर कलेक्टर के पद से राज्य शिक्षा केंद्र भेज दिया गया। ऐसे में उन्होंने बड़वानी कलेक्टर पर सवाल उठाए। साथ ही, उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश आईएएस असोसिएशन के ग्रुप में अपने दिल की बात लिखी। यह चैट वायरल हो गई, जिससे राज्य की राजनीति में घमासान शुरू हो गया।
पोस्ट नहीं हटाई तो ग्रुप से निकाला
बताया जा रहा है कि आईएएस असोसिएशन के ग्रुप में किए गए पोस्ट को हटाने के लिए लोकेश जांगिड़ पर काफी दबाव बनाया गया। जब उन्होंने पोस्ट हटाने से इनकार कर दिया तो उन्हें ग्रुप से निकाल दिया गया। इसके बाद आईएएस लोकेश जांगिड़ ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। साथ ही, बड़वानी कलेक्टर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। ऐसे में जांगिड़ के रुख पर राज्य सरकार ने नाराजगी जताई और शासन की तरफ से उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया, जिसका जवाब सात दिन में मांगा गया है। उधर, आईएएस लोकेश जांगिड़ ने महाराष्ट्र में डेपुटेशन के लिए आवेदन दे दिया।

अनजान नंबर से मिली धमकी
जानकारी के मुताबिक, इस बीच आईएएस लोकेश को गुरुवार (17 जून) रात अनजान नंबर से धमकी मिली, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात करीब 11:30 बजे सिग्नल एप पर अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने कहा कि तू नहीं जानता, तूने किससे पंगा लिया है। साधना भाभी का नाम लेकर तूने मौत को बुलाया है। तुझे अपनी और बेटे की जान की परवाह है तो छह महीने की छुट्टी पर चला जा। मीडिया से बात करना बंद कर दे। आईएएस लोकेश ने कहा कि धमकी मिलने के बाद मेरे परिवार को जान का खतरा हो गया है। उन्होंने भोपाल स्थित अपने आवास पर सुरक्षाकर्मियों की मांग की।

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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर चूड़ी देने वाले नेताओं ने अब चूप्पी साध ली, मध्यप्रदेश में कीमतें आसमान छू रही.

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मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल के रिकॉर्ड तोड़ दामों ने आम आदमी का तेल निकाल लिया है। भोपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 104.93 वहीं डीजल 96.13 पैसा प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं प्रदेश के अनूपपुर जिले में पेट्रोल के दाम 107.40 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गए है।  अनुपपुर में डीजल की कीमत 98.41 रुपए प्रति लीटर है। अगर इस साल पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी को देखे तो राजधानी भोपाल में पेट्रोल 13 रुपए से अधिक महंगा हो चुका है। अगर पेट्रोल के दामों पर टैक्स की बात करें तो पेट्रोल महंगा होने का मुख्य कारण इस पर केंद्र और राज्य सरकारों की तरफ से अत्यधिक टैक्स होना है। आज पेट्रोल पर केंद्र और राज्य सरकार 58% टैक्स वसूल रही है। पेट्रोल डीजल के दाम में तेजी की सबसे बड़ी वजह राज्य और केंद्र सरकार का टैक्स है। 2014 से अब तक केंद्र सरकार 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ा चुकी है।
अगर मध्य प्रदेश की बात करें पेट्रोल पर 39 फीसदी और डीजल पर 28 फीसदी वैट और टैक्स वसूल रही है। पेट्रोल की आज की 104 रुपए कीमत में 42 रुपए का पेट्रोल और 62 रुपए का केंद्र और राज्य का टैक्स और वैट शामिल है। अगर केंद्र सरकार एक्साइड ड्यूटी और राज्य सरकार वैट हटा दें डीजल और पेट्रोल 25 से 30 रुपए तक सस्ता हो जाएगा।
अगर पड़ोसी राज्यों से पेट्रोल के दाम की तुलना करें तो उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्यप्रदेश में पेट्रोल 12 रुपए अधिक बिक रहा है। उत्तर प्रदेश में सत्ता पेट्रोल होने से प्रदेश के सीमावर्ती जिले के लोग पेट्रोल और डीजल लेने यूपी का रुख कर रहे है। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सीमा पर पेट्रोल पंप चलाने वाले संचालक कहते हैं कि उनका पेट्रोल पंप मध्यप्रदेश की सीमा में पड़ता है लेकिन वह खुद अपनी गाड़ी में तेल झांसी से भराते है।

सरकार पर हमलावर कांग्रेस : वहीं पेट्रोल-डीजल की कीमत पर कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस ने शिवराज सरकार को घेरते हुए सवाल किया है कि आखिर मध्य प्रदेश की जनता का क्या कसूर है कि उससे सबसे महंगा-पेट्रोल डीजल यहां बिक रहा है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के लोगों का कर्जदार बनाकर टैक्स के जरिए हो रही कमाई से फिजूलखर्ची कर रही है।

पेट्रोल-डीजल पर बैकफुट पर भाजपा : वहीं मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल के रिकॉर्ड दाम पर अब जिम्मेदार भी अपना पल्ला झाड़ते नजर आ रहे है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय से जब मीडिया ने पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि हम संगठन के लोग है सत्ता में बैठने वालों से सवाल पूछिए।

सरकार कम करें टैक्स-मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमत कम करने के लिए सरकार को तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए। अब जब क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही है तब आने वाले समय में दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। वह कहते हैं कि पिछले साल इस वक्त के क्रूड ऑयल के दाम 38-39 डॉलर प्रति बैरल थी तो अब 71 डॉलर प्रति बैरल हो गए है। ऐसे में क्रूड के दामों में 90 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है।

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मेडिकल- पैरामेडिकल- नर्सिंग सत्र जुलाई से होगा शुरू, स्टूडेंट्स को कराना होगा वैक्सिनेशन – मंत्री सारंग

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मध्य प्रदेश में मेडिकल, पैरामेडिकल और नर्सिंग का सत्र जुलाई से शुरू होगा. अभी तक  ऑनलाइन क्लासेस लग रही थी लेकिन अब जुलाई से सब कुछ ऑफलाइन हो जाएगा. इस सत्र में स्टूडेंट को कोविड प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग दी जाएगी. एडमिशन से पहले स्टूडेंट को वैक्सीनेशन कराना होगा.

मंत्री विश्वास सारंग ने आज मंत्रालय में चिकित्सा शिक्षा और भोपाल गैस त्रासदी, राहत एवं पुनर्वास विभागों की गतिविधियों की समीक्षा की. इस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे. सारंग ने निर्देश दिए कि दाखिले के दौरान ये ज़रूर देखा जाए कि स्टूडेंट को वैक्सीन लगा है या नहीं. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के कारण मेडिकल पैरामेडिकल और नर्सिंग में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को पहले हफ्ते कोरोना प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जाए. उन्होंने मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को सभी परीक्षाएं और परीक्षा परिणाम समय-सीमा में घोषित करने के लिये भी कहा. कोरोना काल के कारण लंबित बैकलॉग का जल्द से जल्द निपटारा करने के लिए कहा.

छात्रों को मिलेगी मनोचिकित्सक सुविधा

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा शैक्षणिक गतिविधियों में बिना वजह देरी को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. प्रदेश के 36 मेडिकल और डेंटल निजी, शासकीय कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या 16 हजार 500, नर्सिंग के 1,420 कॉलेज में 59 हजार 900 और पैरामेडिकल के 172 कॉलेज में 12 हजार 600 है. अभी सभी क्लासेस ऑनलाइन चलायी जा रही हैं. क्लासेस जुलाई से ऑफलाइन कर दी जाएंगी. कोरोना महामारी के कारण मानसिक रूप से प्रभावित छात्र-छात्राओं को मनोचिकित्सक की सुविधाए भी उपलब्ध कराई जाएंगी.

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कई मुद्दों पर हुई PM-CM की मुलाकात, मायने सबके अपने अपने, कांग्रेस का ट्विट

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। दोनों नेताओं के बीच 1 घंटे 20 मिनट तक लंबी बातचीत हुई। प्रधानमंत्री से मिलने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बैठक मे राज्य के विकास के मुद्दे,जनकल्याण के मुद्दे,कोरोना कंट्रोल और वैक्सीनेशन अभियान सहित अनेक विषयों पर चर्चा हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक मेंं प्रदेश में कोरोना की वर्तमान स्थिति के साथ कोरोना की तीसरी लहर को रोकने की तैयारियों पर चर्चा हुई। इसके साथ प्रदेश में वैक्सीनेशन की स्थिति को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में 21 जून से वैक्सीनेशन महाअभियान की शुरुआत की जाएगी। जिसमें सभी मंत्री,सांसद,विधायक और जनप्रतिनिधि शामिल होगी। दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा,थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर से भी मुलाकात की।

मुख्यमंत्री ने बताया, कोरोना के कारण राज्यों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है। मध्य प्रदेश में पिछले दो माह में राजस्व का नुकसान ज्यादा हुआ है। पिछले साल जीडीपी के 5.5% तक लोन लेने की छूट मिली थी। इस साल घटकर 4.5% हो गई है। सीएम ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि विकास और अधोसंरचना के काम ना रुकें, इसलिए यह छूट 5.5% की जाए। इस पर प्रधानमंत्री ने गंभीरता से विचार करने की बात कही है।
MP कांग्रेस की आईडी से एक ट्वीट किया गया। इसमें चार प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ पीएम की हुई बैठकों के फोटो पोस्ट किये गए। कांग्रेस ने लिखा
समझ में नहीं आता हमारे शिवराज जी को मोदी जी इतना नापसंद क्यों करते हैं- सलूजा

कांग्रेस के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने शिवराज का मोदी के साथ बुधवार का फोटो शेयर करते हुए लिखा है कि यह समझ में नहीं आता है कि हमारे शिवराज जी को मोदी जी इतना नापसंद क्यों करते हैं। दूसरे नेताओं की तरह उन्हें भी पास की कुर्सी में क्यों नहीं बैठाते हैं। उन्हें हमेशा ही दूर क्यों रखते है ? अब देखिये योगी जी से इतनी नाराज़गी होने के बाद भी उन्हें पास की कुर्सी पर बैठाया ?

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मध्यप्रदेश सरकार ने अनलॉक की नई गाइडलाइन जारी हुई , शॉपिंग मॉल, स्टेडियम अनलॉक होंगे; रेस्टोरेंट, क्लब, जिम 50% क्षमता के साथ खुल सकेंगे

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मध्यप्रदेश सरकार ने अनलॉक की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत छूट का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब शॉपिंग मॉल के साथ जिम, रेस्टोरेंट, क्लब, फिटनेस सेंटर और खेल स्टेडियम को भी खोलने की इजाजत दे दी गई है। सभी तरह की दुकानें, प्रतिष्ठान और प्राइवेट ऑफिस पूरी क्षमता के साथ सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक खुल सकेंगे। रेस्टोरेंट, जिम, फिटनेस सेंटर, क्लब को 50% क्षमता के साथ खोला जा सकेगा। सरकारी दफ्तरों में 100% स्टाफ आ सकेगा। धार्मिक स्थलों पर एक समय में अधिकतम 6 लोग ही जा सकेंगे। पहले यहां 4 लोगों की अनुमति थी। अभी कोचिंग, स्कूल, स्वीमिंग पूल और सिनेमाघर अभी बंद रहेंगे। स्कूलों में केवल ऑनलाइन क्लास चलेगी। इसके अलावा शादी में दोनों पक्षों के कुल 50 लोग शामिल हो सकेंगे। इसकी सूची प्रशासन को देनी होगी।

अंतिम संस्कार में अधिकतम 10 लोग जा सकेंगे। सामाजिक/राजनीतिक/खेल/मनोरंजन/सांस्कृतिक/धार्मिक आयोजन/मेलों पर प्रतिबंध रहेगा। सभी उद्योग पूरी क्षमता से चल सकेंगे। निर्माण गतिविधियां भी चल सकेंगी। इधर राज्य सरकार के निर्देश के बाद भोपाल में रात 11 बजे जिला प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी कर दी जिसमें रेस्टोरेन्ट की तरह रात 10 बजे तक 50% क्षमता के साथ बार खोलने की अनुमति भी दे दी गई।

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खाद्य विभाग के कर्मचारियों की करतूत से उपभोक्ता परेशान

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अपने कार्यकलापों को लेकर खाद्य विभाग हमेशा चर्चाओं में रहता है। चाहे मामला बीपीएल कार्ड का हो या एपीएल कार्ड का या समय पर लोगों को राशन उपलब्ध नहीं होने का ऐसे तमाम बिंदु है जो कि हमेशा खाद्य विभाग उससे जुड़ी हुई शाखाओं को चर्चाओं में बनाए रखते हैं। ताजा मामला लोगों को उनकी सुविधाओं के लिए उपलब्ध कराए गए नंबरों को मिटाने से संबंधित है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की सक्रियता संक्रमण के कारण लगभग 54000 उपभोक्ताओं जिसमें की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों से लगाकर सामान्य और मध्यम वर्ग के लोग भी शामिल है। उन्हें पर्चियों का वितरण हो रहा है। इसके माध्यम से वे राशन दुकान पर जाकर राशन ले रहे हैं जिसमें प्रधानमंत्री अनाज वितरण योजना से संबंधित अनाज भी शामिल है।

सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों की पर्चियां नहीं आई है वह प्रशासनिक संकुल स्थित खाद्य विभाग में जाकर वस्तुस्थिति जान रहे हैं की आखिर क्यों उनकी पर्चियां नहीं आई है क्योंकि राशन की दुकान पर जाते हैं तो उन्हें जवाब दिया जाता है कि आप कलेक्टर ऑफिस जाकर पता कर लो।

अलग-अलग जोन के हिसाब से इस कार्य के लिए खाद विभाग में अलग-अलग अधिकारी नियुक्त किए गए हैं तथा लोगों की सुविधाओं के हिसाब से उनके नंबर और नाम भी खाद्य विभाग के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए गए हैं। देखने में आ रहा है कि विभाग के ही कतिपय कर्मचारियों ने नोटिस बोर्ड पर लगे हुए हैं। मोबाइल नंबर पर कलम चला दी है और उसे मिटाने का प्रयास किया है। अब यहां जो लोग आ रहे हैं उन्हें सही जवाब नहीं मिल रहा है और लोग परेशान हैं। सूत्रों का कहना है कि खाद्य विभाग के कर्मचारियों को इस प्रकार की हरकत नहीं करना चाहिए। फिलहाल तो लोग उनकी इन हरकतों से बेहद परेशान हैं और परेशानी में ऐसा करने वाले कर्मचारियों को कोस रहे हैं।

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मध्यप्रदेश निवासियों के सामने खड़ा एक नया संकट, ट्रांसपोर्ट व्यवसाइयों के हड़ताल पर जाने से बढ़ सकती है समस्याएं, परिवहन महासंघ ने दी हड़ताल की चेतावनी.

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मध्य प्रदेश में कोरोना संकट काल  में हड़ताल का मौसम चल रहा है. अब ट्रक ऑपरेटर्स ने हड़ताल की धमकी दी है. लॉकडाउन के कारण भारी संकट झेल रहे ऑपरेटर्स ने पेट्रोल-डीजल के दाम पर लगाम लगाने की मांग की है वरना वो ट्रकों के पहिए जाम कर देंगे. मध्यप्रदेश के ट्रक, बस, टैक्सी परिवहन चालकों का कहना है डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें देश और प्रदेश में भारी पड़ने लगी हैं. ट्रांसपोर्ट, बस, टैक्सी व्यवसाइयों को डीजल की कीमतें बढ़ने की वजह से वाहन चलाना मुश्किल हो गया है. बचत जीरो हो गई है. लॉकडाउन-2 के कारण व्यापार धंधे बंद हैं. ट्रक, बस और टैक्सी वाहनों के खर्चे और बैंक की किश्त चालू है. ऐसे में घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है. केन्द्र और राज्य सरकार को पेट्रोल डीजल मूल्य वृद्धि पर लगाम लगाना चाहिए.ये है महंगाई का हिसाब किताब

एमपी में डीजल 97.00 रुपए प्रति लीटर हो गया है. लगातार मूल्य वृद्धि के कारण महंगाई और मालभाड़ा बढ़ने लगेंगे जिससे विभिन्न वस्तुओं की उत्पादन लागत और परिवहन लागत बढ़ जाएगी. इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा. कोरोना-2 संकट में रोजगार ठप होने के कारण लोगों को दोहरी मार पड़ रही है. पिछले एक वर्ष से पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. परिवहन व्यवसाई मानते हैं कि कोरोना के कारण पहले ही आम जनता परेशान है और हम आम जनता को और परेशान नहीं करना चाहते हैं. मगर पिछले एक सप्ताह के दौरान डीजल और पेट्रोल के मूल्य में प्रति लीटर आठ रुपये से अधिक की वृद्धि हुई है जो असहनीय है. इसलिए कोरोना काल में हम लोग विरोध करने के लिए हम मजबूर हो गए हैं. अब हम ट्रक,टैक्सी,बस मालिक अपना संचालन ठप करने जा रहे हैं.

ट्रांसपोर्ट व्यवसाइयों का कहना है पेट्रोलियम पदार्थों को GST के दायरे में लाने से कीमतों पर अंकुश लग सकता है. कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर पेट्रोलियम कंपनियों को फायदा पहुंचाना और केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ज्यादा वेट टैक्स लगाकर मुनाफा कमाया जा रहा है. पेट्रोल, डीजल के मूल्य बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी और आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ेगा |

ट्रक ऑपरेटर्स ने कहा आज लोगों के घरों का बजट बुरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है. सरकार को इस बारे में उचित कदम उठाने चाहिए. अंतराष्ट्रीय स्तर पर तो कच्चे तेल के दाम कम हो रहे हैं, लेकिन यहां पिछले कई दिन से डीजल के दाम में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है. जो ठीक नहीं है. सरकार को प्रदेश के ट्रक, बस, टैक्सी संचालकों को तुरंत राहत देनी चाहिए. यदि मध्य प्रदेश सरकार ने वाहन मालिकों को राहत नहीं दी तो ट्रक, बस, टैक्सी मालिक अपना परिवहन का काम बंद कर देंगे.

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म.प्र.अब शादियों में शामिल होने के लिए भी कराना होगा कोरोना टेस्ट, नियम हुआ लागू

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में होने वाले विवाह कार्यक्रमों में अब वर-वधु पक्ष के 20, 20 व्यक्ति सम्मिलित हो सकेंगे और इसमें शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों का कोरोना वायरस टेस्ट अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश के जिलों की क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों को निवास से वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर 15 जून तक नई गाइडलाइन जारी की जाएगी। कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों के साथ-साथ सभी अनाथ बच्चों के जीवन-यापन, आहार, शिक्षा और उनके आसरे की व्यवस्था सरकार और समाज द्वारा की जाएगी।

सरकार संवेदनशील है, किसी को भी मजबूर और बेबस नहीं रहने दिया जाएगा। कोरोना काल में बेसहारा हो गए परिवारों के संबंध में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाएगा। इस दौरान जिन व्यक्तियों की कोरोना से मृत्यु हुई है, उनके प्रमाण पत्र के संबंध में भी राज्य सरकार शीघ्र निर्णय लेगी। विधायकगण अब विधायक निधि से 50 प्रतिशत तक का उपयोग जरूरतमंदों की मदद के लिए कर सकेंगे। 

चौहान ने कहा कि कोरोना संक्रमण का संकट अभी गया नहीं है। तीसरी लहर की संभावना है। सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता है। इसलिए प्रदेश में राजनीतिक, सामाजिक गतिविधियां, जुलूस-जलसे, भीड़ वाली गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी। स्कूल-कॉलेज,खेलकूद, स्टेडियम में कार्यक्रम आदि पर भी प्रतिबंध रहेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में जन-भागीदारी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है। हमें तीसरी लहर को रोकने के लिए लगातार सक्रियता बनाए रखना होगी। कोरोना अनुरूप व्यवहार का पालन गंभीरता से करने से संक्रमण पुन: नहीं फैलेगा।

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