Indore News – शासकीय अधिकारी के बेटे ने I Quit लिख कर की जीवन लीला समाप्त 

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

Indore Crime News. इंदौर में एक शासकीय अधिकारी के बेटे सार्थक द्वारा बुधवार रात फांसी लगा ली घटना के समय छात्र घर में अकेला था। छोटा भाई वात्सल्य आईटी की कोचिंग के लिए गया हुआ था। मां अहमदाबाद में थी और पिता जॉब पर गए थे। जिस वक्त घटना हुई उस वक्त घर में मौजूद कुत्ता बहुत देर से भौंक रहा था, लेकिन पड़ोसियों का ध्यान नहीं गया।

पड़ोसियों की मानें तो घटना बुधवार देर रात 11:00 बजे के करीब की बताई जा रही है। जब कॉलोनी के अंदर एंबुलेंस और पुलिस के सायरन की आवाज सुनाई दी। इसके बाद आसपास में रहने वाले लोगों ने घर से बाहर जाकर, तो सार्थक के घर के बाहर भीड़ थी। कुछ देर बाद पता लगा कि सार्थक ने घर के पीछे बनी बालकनी में फांसी लगा ली है।

रहवासियों ने बताया कि 2 साल पूर्व विजित कुमार अपने परिवार के साथ एनवीडीए कॉलोनी में रहने आए थे। परिवार आसपास वालों से अधिक बातें नहीं किया करता था। वहीं, दोनों भाई सिर्फ पढ़ाई में ही लगे रहते थे। पुलिस ने बताया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के सरकारी आवास में रहने वाले अपर संचालक विजित कुमार विजयवत के बेटे सार्थक ने फांसी लगा ली। सार्थक खडग़पुर से आईआईटी कर रहा था। कुछ दिनों पहले ही इंदौर आया था।

उसने सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें सबसे अंत में आई क्विट ( I Quit) तो पहले और अंदर कई बातें लिखी हैं। उसने लिखा है कि उसने कई उम्मीदों से जेईई की तैयारी की थी। सोचा था कैम्पस एंजाय करूंगा, लेकिन ऑनलाइन असाइनमेंट के चक्कर में फंस गया। उसने लिखा कि पापा जिद्दी हैं और मम्मी मजबूर… उन्हें मुझसे और छोटे भाई वात्सल्य के साथ भी ऐसी बात करनी चाहिए थी, जैसी बात वे अपने भाई और बहनों के साथ करते हो। सार्थक ने पिता के बारे में लिखा है कि काश! आप हमारे साथ और भी समय बिताते। देवेंद्र काका जैसी समझ आपमें होती। हालांकि सार्थक ने किसी पर आरोप नहीं लगाए हैं और ना ही किसी को मौत का जिम्मेदार ठहराया है। बताया जाता है कि कैम्पस सिलेक्शन को लेकर भी वह डिप्रेशन में बताया जा रहा था। वह इंदौर में अपने परिवार के साथ ही रहना चाहता था, लेकिन पढ़ाई के चलते उसे बाहर जाना पड़ा। उसकी मौत का कारण जहां अकेलापन रहा। वहीं, पढ़ाई को लेकर पिता का दबाव भी नजर आया।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।