Indore News – इंदौर में मेदांता अस्पताल का जांच में सहयोग नहीं करने पर कलेक्टर ने दिया मेडिकल स्टोर बंद करने का आदेश, सुधार नहीं होने पर मजिस्ट्रियल जांच की चेतावनी

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इंदौर। मेदांता अस्पताल द्वारा इलाज के नाम पर मनमानी रकम वसूलने और जांच में सहयोग नहीं करने से नाराज कलेक्टर मनीष सिंह ने अस्पताल के मेडिकल स्टोर को बंद करने के आदेश दिए। अस्पताल प्रशासन को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें इसी अस्पताल की मिली हैं। कोविड की वजह से मौतें दूसरे अस्पतालों में भी हुई लेकिन मेदांता को लेकर शहरवासियों में आक्रोश है। अस्पताल प्रशासन जांच में सहयोग भी नहीं कर रहा है। इसमें सुधार नहीं हुआ तो मैं मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दूंगा। अस्पताल बंद कर देंगे।
कलेक्टर बुधवार को देवी अहिल्या विवि के सभागृह में शासकीय अस्पतालों के अधीक्षकों और निजी अस्पताल संचालकों की बैठक में बोल रहे थे। यह बैठक शहर में टीकाकरण के महाअभियान को लेकर आयोजित की गई थी। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा एमजीएम मेडिकल कालेज के डीन डा. संजय दीक्षित, आइएमए इंदौर अध्यक्ष डा. सुमित शुक्ला सहित बड़ी संख्या में डाक्टर मौजूद थे। कलेक्टर ने कहा कि जिले को कोरोना मुक्त बनाने के लिए शत-प्रतिशत टीकाकरण जरूरी है। हमें हर हाल में 30 नवंबर तक जिले के सभी पात्र नागरिकों को कोरोना का दूसरा टीका लगाना है।
अस्पताल नहीं दे रहा जानकारी
उज्जैन निवासी 64 वर्षीय दीपक कुमार सकरगाए 26 जून 2021 को मेदांता अस्पताल में भर्ती हुए थे। वे 18 अगस्त तक भर्ती रहे। अस्पताल प्रशासन ने इलाज के नाम पर उनसे लाखों रुपये वसूल लिए। बाद में मरीज को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल रेफर कर दिया। मरीज के स्वजन ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। जांच नंदानगर जोन के जोनल मेडिकल आफिसर डा. प्रदीप गोयल कर रहे हैं। उन्हें इस बात की जांच करना है कि अस्पताल प्रशासन ने किस डाक्टर को कितना भुगतान किया है, लेकिन प्रबंधन दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा रहा है। बुधवार को बैठक में कलेक्टर ने डा. गोयल से पूछा कि जांच प्रतिवेदन क्यों नहीं आया। इस पर डा. गोयल ने बताया कि अस्पताल प्रशासन जांच में सहयोग नहीं कर रहा, तो कलेक्टर नाराज हो गए।
जानकारी उपलब्ध कराएंगे
प्रशासन जो भी जानकारी चाहता है, वह उपलब्ध करवाएंगे। मैं बैठक में उपस्थित नहीं था। हमारे जो प्रतिनिधि बैठक में गए थे, गुरुवार को उनसे जानकारी लूंगा। -डा. संदीप श्रीवास्तव, मेडिकल डायरेक्टर, मेदांता अस्पताल
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।