MP News – भोपाल इंदौर में पुलिस का डंडा हुआ मजबूत, पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू, जाने बदलाव   

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sadbhawnapaati
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Mp News. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी और नोटिफिकेशन के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और सबसे बड़े शहर इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है। इसी के साथ दोनों शहरों में कलेक्टर की पावर कम हो गई है। जबकि पुलिस का डंडा मजबूत हो गया है। पुलिस स्वतंत्र रूप से अपना काम करेगी और कलेक्टर केवल प्रशासनिक व्यवस्थाएं और टैक्स की वसूली देखेंगे। गृहमंत्री डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा ने प्रेसवार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के अनुरूप भोपाल और इंदौर में आज से पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का फैसला लिया गया है। इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर प्रणाली में भोपाल के 38 पुलिस थाना क्षेत्र और इंदौर के 36 पुलिस थाना क्षेत्र शामिल किए जाएंगे।
सनद रहे कि लगभग 40 साल पहले मध्य प्रदेश में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लेकर शुरुआत हुई थी लेकिन आईएएस लॉबी की आपत्ति के कारण इससे पहले तक कभी भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लागू नहीं किया जा सका। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में ही इसे लेकर काफी विचार मंथन हो चुका है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम, पुलिस डिपार्टमेंट को बेलगाम कर देगा। क्योंकि जिले में पुलिस पर कलेक्टर का कंट्रोल नहीं रह जाएगा।

जनता का फायदा क्या

  • ट्रैफिक: वर्तमान में ट्रैफिक सिस्टम के लिए ट्रैफिक पुलिस को नगर निगम, रोड कंस्ट्रक्शन एजेंसियों के भरोसे रहना पड़ता था। लैटर कम्युनिकेशन और परमिशन में वक्त लगता था। अब पुलिस का ट्रैफिक डिपार्टमेंट यह व्यवस्थाएं करेगा। इससे शहर का ट्रैफिक बेहतर होगा। वाहनों की स्पीड लिमिट भी पुलिस तय करेगी।
  • क्राइम : लोगों में खौफ पैदा करने वाले गुंडों, आदतन क्रिमिनल्स को पुलिस जिला बदर कर सकेगी। इससे लोगों को गुंडों के खौफ से मुक्ति मिलेगी।
  • पुलिस की चौकसी: वर्तमान शहर में दो SP थे, अब आठ होंगे। साथ ही, अन्य लेवल के अफसरों की संख्या बढ़ गई है। इसका फायदा शहर की चौकसी में होगा। इससे शहर में क्राइम भी कम होगा।

भोपाल के पदों के विवरण से जानते हैं कि यह सिस्टम काम कैसे करेगा

पुलिस कमिश्नर : यह जिले का सर्वोच्च पुलिस अफसर होगा। इसे अब हम पुलिस कप्तान भी कह सकते हैं, जो पहले भोपाल-इंदौर जैसे शहरों में IG हुआ करते थे। यह एकमात्र पद होगा।

2 ACP : अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दो होंगे। ये सीधे पुलिस कमिश्नर को रिपोर्ट करेंगे। इनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग होंगी। ये DIG रेंज के अफसर होंगे। एक ACP लॉ एंड ऑर्डर के साथ सिस्टम देखेंगे तो दूसरे क्राइम और हेडक्वार्टर का जिम्मा।

8 DCP : शहर में आठ DCP यानी आठ SP हो जाएंगे। अभी ये तीन हुआ करते थे लेकिन डायरेक्ट फील्ड में दो ही रहते थे। आठ SP होने पर यातायात, क्राइम, हेडक्वार्टर, इन्फॉरमेशन, सिक्योरिटी आदि की जिम्मेदारी अलग-अलग DCP के पास होगी।

12 Add. DCP : शहर में एडीशनल SP लेवल के 12 अफसरों की पोस्टिंग एडीशनल DCP के रूप में हो जाएगी। ये अलग-अलग मामलों को लेकर DCP को रिपोर्ट करेंगे। इनसे यातायात, क्राइम, हेडक्वार्टर संबंधी काम, आम लोगों के लिए जागरुकता कार्यक्रम, सिक्योरिटी, ST SC महिलाओं से जुड़े अपराध देखने होंगे।

30 सहायक पुलिस आयुक्त : CSP लेवल के 29 सहायक पुलिस आयुक्त होंगे। ये एडिशनल एसपी को रिपोर्ट करेंगे। इनमें से 29 फील्ड ऑफिसर होंगे जबकि 1 रेडियो का जिम्मा संभालेंगे।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।