विकास प्राधिकरण की योजना 136 में करोड़ों रुपए की लागत से 8 मंजिला कमर्शियल कम रेसीडेंशियल बिल्डिंग तो तन गई और नाम अमलतास मिला लेकिन उस पर आज तक फ्लैट खरीदने वालों ने अमल नहीं किया। कई बार टेंडर भी जारी हुए परंतु खरीददार नहीं मिलने से प्राधिकरण की परेशानी बढ़ गई है। इस योजना में ग्राउंड तथा 7 मंजिला बिल्डिंग में नीचे की ओर कमर्शियल दुकानों का निर्माण तो शेष मंजिल पर कुल 672 फ्लैट हैं।
एलाइजी 1 बीएचके के फ्लैट बेचने के लिए विकास प्राधिकरण 3 से 4 बार पहले भी टेंडर जारी कर चुका है, लेकिन खरीददार नहीं मिले। योजना क्रमांक 136 के सीएमआर 12 भूखंड क्रमांक 3 के तहत अमलतास कांपलेक्स के नाम से बहु मंजिला बिल्डिंग के निर्माण के साथ ही यहां पर फ्लैट बेचने के काफी प्रयास किए जिनकी कीमत 14 लाख 59 हजार और 15 लाख 44 हजार रखी गई है। इसको लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि खरीदार नहीं मिलने से दरे कम भी की जा सकती है। कमर्शियल कम रेसीडेंशियल लेकिन ना तो कमर्शियल बिक रहा है और ना ही रेसिडेंशियल के लिए लोग रुचि ले रहे हैं। प्राधिकरण की ओर से एक बार फिर से इसके टेंडर जारी किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही विकास प्राधिकरण योजना क्रमांक 166 स्कीम नंबर 169- बी सुपर कॉरिडोर और स्कीम नंबर 151 के साथ-साथ कई योजनाओं की संपत्तियों के भी टेंडर जारी करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि विकास प्राधिकरण के अलग अलग योजनाओं में भूखंड से लेकर बड़ी बड़ी बिल्डिंग तन गई लेकिन उनके फ्लैट के कोई खरीददार नहीं मिल रहे हैं। अगर इस तरह की संपत्तियां बिक जाती है तो विकास प्राधिकरण को करोड़ों अरबों रुपए का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है उसके बाद कोई नई योजना को विकसित करने में परेशानी नहीं है।
विकास प्राधिकरण सीईओ विवेक श्रोत्रिय ने बताया कि अलग-अलग योजनाओं के भूखंड से लेकर बिल्डिंगों के फ्लैट के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं ताकि उनकी नीलामी से प्राधिकरण को बेहतर राजस्व मिल सकता है।


