शिक्षकों को अब तक नहीं मिली पगार, घर चलाना मुश्किल, होम लोन के चेक बाउंस होने से परेशान 

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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इंदौर। शिक्षकों को आज ग्यारह अप्रैल तक भी वेतन नहीं मिला है। हर महिने ऐसे हालात पैदा होते हैं। पेंशनर भी परेशान रहते हैं। घर चलाना मुश्किल होता है।
नवरात्रि से लेकर रामनवमी तक के पर्व शिक्षकों ने जैसे तैसे मनाए लेकिन हालत यह है कि होम लोन या किसी अन्य वजह से लिए गए लोन की किस्तों के चेक बाउंस होकर शिक्षकों को बैंक के झटके झेलने पड़ते है।
अप्रैल की 4 तारीख तक आवंटन होने के बाद भी वेतन नहीं मिलना अफसरों के गैर जिम्मेदार रूख को दर्शाता है। अधिकारियों के ढुलमुल रवैये संकुल प्राचार्यों की लापरवाही भी इसका एक बड़ा कारण है।
ब्लाक एज्युकेशन आफिसर ओ.पी. वर्मा ने कहा कि वित्तीय वर्ष में बजट आवंटन देरी से हुआ लेकिन जल्द से जल्द वेतन दिए जाने की कोशिश हो रही है।
शनिवार रविवार और बैंकों की छुट्टियों की वजह से भी शिक्षकों को वेतन मिलने में देरी हो रही है। उम्मीद है आज या कल में वेतन खातों में जमा करवा दिया जाएगा।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।