सीबीआई की कार्रवाई :  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सीजीएम दिग्विजय मिश्रा दस लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, 14 ठिकानों पर छापेमारी

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National News। सीबीआई ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सीजीएम व क्षेत्रीय अधिकारी दिग्विजय मिश्रा को गांधीनगर से दस लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। मिश्रा निजी कंपनी जीएचवी इंडिया के कर्मचारी से रिश्वत ले रहे थे। इस रिश्वत के बदले में मिश्रा 109 किलोमीटर अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में कंपनी का पक्ष लेने वाले थे। सीबीआई ने बाद में मिश्रा के ठिकानों पर छापों में 22 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की।

सीबीआई ने मिश्रा के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने जांच में पाया कि मिश्रा कंपनी के बिलों का निस्तारण करने, उसे काम देने और काम पूरा होने का प्रमाणपत्र प्रदान करने में अतिरिक्त सुविधा मुहैया करा रहे थे। इसके अलाव परियोजना के पैकेज 1 और पैकेज 2 से जुड़े अन्य मामलों व समय सीमा बढ़ाने में भी वह कंपनी का पक्ष ले रहे थे। रिश्वत के लेनदेन की पुष्टि होने के बाद सीबीआई टीम मौके पर पहुुंची और दिग्विजय मिश्रा को टीपी सिंह से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। सीबीआई ने सिंह को भी हिरासत में ले लिया।

गांधीनगर, दिल्ली, पुणे व अन्य शहरों में 14 ठिकानों पर छापा

मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने गांधीनगर, अहमदाबाद, पुणे, दिल्ली और चंडीगढ़ में 14 ठिकानों पर छापे मारे और 22 लाख रुपये की नकदी बरामद की। इससे पहले सीबीआई ने पिछले साल एनएचएआई अधिकारी अकील अहमद को 20 लाख रुपये की रिश्वत लेने में गिरफ्तार किया था।

असम चिटफंड मामले में दाखिल किया पूरक आरोप-पत्र

इस बीच सीबीआई ने पोंजी योजनाओं के माध्यम से निवेशकों के 245 करोड़ रुपये हड़पने के आरोपी जीवन सुरक्षा समूह के पूर्व एमडी चंदन दास के खिलाफ पूरक आरोप-पत्र दाखिल किया है। इस मामले में कंपनी की पूर्व कार्यकारी चेयरमैन आरजू अचार्जी, महाप्रबंधक उत्तम अचार्जी और निदेशक अशोक चक्रवर्ती व संगीता दास भी आरोपी हैं।

अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश कामरूप (गुवाहाटी) के समक्ष दायर पूरक आरोप पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया, सात साल की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने कंपनीज एक्ट और सेबी के नियमों का उल्लंघन कर प्रमाण पत्र जारी कर बड़ी मात्रा में धन जमा किया। इसके बाद नगालैंड और असम में स्थित कंपनी के अधिकारियों ने भोले निवेशकों से मिला धन जान-बूझकर अपने समूह की घाटा देने वाली कंपनियों में लगाया। इन्होेंने लगभग 81.65 करोड़ रुपये ठप पड़ी कंपनियों में भेजे। इन्होंने निवेशकों से कुल 245 करोड़ की धोखाधड़ी की। एजेंसी

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