सात सालों में मप्र से गायब हुए दो लाख कुत्ते
-मप्र, यूपी सहित 11 राज्यों में घटे
आवारा कुत्तों के हमलों से हर साल हजारों लोग घायल होते हैं। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग स्थानीय प्रशासन के अलावा सरकार के लिए ये आवारा कुत्ते चुनौती बनते हैं। बीते साल सालों में मप्र में आवारा कुत्तों की संख्या में करीब दो लाख आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आई है।
साल 2012 में एमपी में 12 लाख 8 हजार 539 आवारा कुत्ते थे। सात सालों में यानि 2019 में इनकी संख्या घटकर एक लाख 9 हजार 96 बची है। सात सालों में आवारा कुत्तों की संख्या में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है। ये जानकारी मंगलवार को लोकसभा में दी गई है।
एक सवाल के जवाब में लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक सात सालों में सबसे ज्यादा करीब 4885 प्रतिशत आवारा कुत्तों की आबादी नागालैंड में बढ़ी है। साल 2012 में नागालैंड में मात्र सात आवारा कुत्ते थे और 2019 तक बढ़कर इनकी संख्या 342 पर पहुंच गई है।
दिल्ली में न एक कुत्ता घटा न एक बढ़ा
लोकसभा में पशुपालन विभाग द्वारा दी गई जानकारी में दिल्ली के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दिल्ली राज्य में पिछले सात सालों में आवारा कुत्तों की संख्या स्थिर रही है।
साल 2012 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 60472 कुत्ते थे और 2019 में हुई पशुधन गणना में भी दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या 60472 बताई गई है।
यानि कि दिल्ली प्रदेश में सात सालों में न एक आवारा कुत्ता घटा और न ही एक आवारा कुत्ते की संख्या बढ़ी। इन आंकड़ों से सवाल उठ रहा है कि इन सात सालों में क्या एक भी कुत्ते की मौत नहीं हुई न ही किसी आवारा कुत्ते ने जन्म लिया।

