MP Hindi News – रोचक तथ्य : आवारा श्वान के मामलों में आश्चर्यजनक कमी  

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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सात सालों में मप्र से गायब हुए दो लाख कुत्ते
-मप्र, यूपी सहित 11 राज्यों में घटे
आवारा कुत्तों के हमलों से हर साल हजारों लोग घायल होते हैं। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग स्थानीय प्रशासन के अलावा सरकार के लिए ये आवारा कुत्ते चुनौती बनते हैं। बीते साल सालों में मप्र में आवारा कुत्तों की संख्या में करीब दो लाख आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आई है।
साल 2012 में एमपी में 12 लाख 8 हजार 539 आवारा कुत्ते थे। सात सालों में यानि 2019 में इनकी संख्या घटकर एक लाख 9 हजार 96 बची है। सात सालों में आवारा कुत्तों की संख्या में करीब 17 प्रतिशत की कमी आई है। ये जानकारी मंगलवार को लोकसभा में दी गई है।
एक सवाल के जवाब में लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक सात सालों में सबसे ज्यादा करीब 4885 प्रतिशत आवारा कुत्तों की आबादी नागालैंड में बढ़ी है। साल 2012 में नागालैंड में मात्र सात आवारा कुत्ते थे और 2019 तक बढ़कर इनकी संख्या 342 पर पहुंच गई है।
 दिल्ली में न एक कुत्ता घटा न एक बढ़ा
लोकसभा में पशुपालन विभाग द्वारा दी गई जानकारी में दिल्ली के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। दिल्ली राज्य में पिछले सात सालों में आवारा कुत्तों की संख्या स्थिर रही है।
साल 2012 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 60472 कुत्ते थे और 2019 में हुई पशुधन गणना में भी दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या 60472 बताई गई है।
यानि कि दिल्ली प्रदेश में सात सालों में न एक आवारा कुत्ता घटा और न ही एक आवारा कुत्ते की संख्या बढ़ी। इन आंकड़ों से सवाल उठ रहा है कि इन सात सालों में क्या एक भी कुत्ते की मौत नहीं हुई न ही किसी आवारा कुत्ते ने जन्म लिया।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।