जबेरा की ग्राम पंचायत जलहरी में 60 लाख का कथित महाघोटाला

अरविंद सिंह लोधी
By
Arvind Singh Lodhi
Damoh madhya Pradesh
3 Min Read

कागजों में बनीं खकरियां, धरातल पर एक भी काम नहीं

सरपंच-सचिव से लेकर अधिकारियों की मिलीभगत पर गंभीर सवाल

 

अरविन्द सिंह लोधी

दमोह/जबेरा। जबेरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जलहरी में खकरी निर्माण के नाम पर करीब 60 लाख रुपये के कथित महाघोटाले का मामला सामने आया है, जिसने पंचायत व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिना किसी वास्तविक निर्माण कार्य के, केवल कागजों में खकरियों का निर्माण दर्शाकर सरकारी राशि का गबन कर लिया गया।

जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत जलहरी में पहले से बनी दो खकरियों को नया निर्माण बताकर मास्टर रोल और बिल तैयार किए गए। एक खकरी कलू मरावी के खेत के पास तथा दूसरी मीराबाई के खेत के पास वर्षों से मौजूद थी, इसके बावजूद इन्हें नया निर्माण दर्शाकर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया। जमीनी हकीकत यह है कि जहां कार्य दर्शाया गया है, वहां किसी भी तरह का नया निर्माण नहीं हुआ।

मामला यहीं नहीं थमता, आरोप है कि पांच अन्य खकरियों का निर्माण केवल फाइलों और कंप्यूटर सिस्टम तक ही सीमित रहा। न तो सामग्री पहुंचाई गई, न मजदूर लगाए गए और न ही कार्य शुरू हुआ, लेकिन इसके बावजूद मस्टर रोल भरकर और बिल फीड कर भुगतान निकाल लिया गया। कागजों में जिन स्थानों पर निर्माण दिखाया गया है, उनमें नहर की पुलिया से तालाब की ओर तालाब के पास करण सिंह के खेत की ओर डबल सिंह से चतुर सिंह के खेत की ओर मिट्ठू सिंह के खेत से करण सिंह के खेत की ओर कडोरी के हार से बेस्ट एयर की ओर शामिल हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कुल सात खकरियों के नाम पर लगभग 60 लाख रुपये की सरकारी राशि का खुला बंदरबांट किया गया। इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, सहायक यंत्री एवं उपयंत्री की कथित मिलीभगत से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, सबसे गंभीर आरोप यह है कि जनपद पंचायत जबेरा के सीईओ रामेश्वर पटेल ने कथित तौर पर कमीशनखोरी के चलते न तो मामले की जांच कराई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की, जिससे भ्रष्टाचारियों के हौसले और बढ़ गए।

ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस कथित महाघोटाले पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।

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