दमोह में प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम चल रहे शराब अहाते: कानून को चुनौती या प्रशासनिक संरक्षण?

अरविंद सिंह लोधी
By
Arvind Singh Lodhi
Damoh madhya Pradesh
5 Min Read

अरविन्द सिंह लोधी

दमोह।संपूर्ण मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा शराब दुकानों पर शराब पिलाने (अहातों) पर सख्त प्रतिबंध लागू है, लेकिन दमोह नगर में यह आदेश केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहा है। शहर की लगभग सभी शराब दुकानों के आसपास अवैध रूप से अहाते संचालित हो रहे हैं, जहाँ खुलेआम ग्राहकों को बैठाकर शराब पिलाई जा रही है।

बीते दिनों इन अवैध अहातों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग कुछ समय के लिए सक्रिय जरूर नजर आया, लेकिन यह कार्रवाई दिखावटी साबित हुई। कुछ ही दिनों बाद हालात फिर पुराने जैसे हो गए और अहाते दोबारा बेखौफ होकर संचालित होने लगे।

अपराध और पारिवारिक बर्बादी का कारण बन रही शराब

इन अवैध अहातों और अवैध शराब बिक्री का असर सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परिवार पूरी तरह उजड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई अवैध शराब दुकानदार गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को उधार में शराब देते हैं। धीरे-धीरे उधारी का जाल इतना बढ़ जाता है कि शराब माफिया जमीन, मकान या अन्य संपत्ति तक ऐंठने का दबाव बनाने लगते हैं।

कई मामलों में परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं, महिलाओं और बच्चों को भुखमरी की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन डर और दबाव के कारण पीड़ित सामने आने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। यह स्थिति सामाजिक अपराध का रूप ले चुकी है।

अपराधों को मिल रहा सीधा बढ़ावा

शराब दुकानों के आसपास बैठाकर शराब पिलाने से हिंसक घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। हाल ही में बस स्टैंड स्थित शराब दुकान के सामने शराब के नशे में धुत युवकों द्वारा तीन युवकों पर चाकू से जानलेवा हमला किया गया। ऐसे मामले इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकार द्वारा अहातों पर लगाया गया प्रतिबंध सही था, लेकिन दमोह में उसका पालन नहीं हो रहा।

पुलिस–आबकारी की भूमिका पर सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत या लापरवाही के चलते यह पूरा अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। कभी-कभार की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। इससे यह सवाल गहराता जा रहा है कि अवैध अहातों और शराब बिक्री से होने वाली मोटी कमाई आखिर किन-किन हाथों तक पहुंच रही है।

खुलेआम अवैध वसूली

अवैध अहातों में शराब पीने वालों से खुलेआम वसूली की जा रही है—

25 पैसे का डिस्पोज़ल रु.5 में

25 पैसे का पानी पाउच रु.5 में

इस तरह एक गिलास और पानी के नाम पर रु.10 की अवैध वसूली की जा रही है। अनुमान है कि प्रत्येक अहाते से प्रतिदिन रु.8,000 से रु.10,000 तक की अवैध कमाई हो रही है।

ग्रामीण अंचलों में भी अवैध शराब का बोलबाला

स्थिति केवल शहर तक सीमित नहीं है। दमोह जिले की कई ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। कई गांवों के मुख्य बस स्टैंड और चौराहों पर शराब माफिया खुलेआम शराब बेच रहे हैं। यह सब कुछ प्रशासन की अनदेखी या संरक्षण के बिना संभव नहीं माना जा सकता।

कौन है जिम्मेदार?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि— अवैध अहाते और शराब माफिया आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं?

गरीब परिवारों को बर्बाद करने वाले इस धंधे पर प्रशासन कब सख्त कार्रवाई करेगा?

अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद सिटी कोतवाली और आबकारी विभाग केवल कागजी कार्रवाई करते हैं या वास्तव में सरकार के आदेशों का पालन कर अवैध शराब कारोबार पर निर्णायक प्रहार करते हैं। सूत्रों के अनुसार, अवैध शराब और अवैध वसूली को लेकर जल्द ही एक और बड़ा खुलासा हो सकता है।

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