Bollywood News – बाॅलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट के ‘कन्‍यादान’ पर बवाल

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
2 Min Read

सोशल मीडिया पर यूजर्स लोगों ने पूछा-‘हलाला और तीन तलाक पर चुप्पी क्यों’

बाॅलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट अपने एक ऐड को लेकर चर्चा में आ गई हैं। दरअसल, एक कपड़े के ब्रांड में आलिया कन्यादान पर सवाल उठा रही हैं। आलिया भट्ट के इस विज्ञापन को लोग पसंद कर रहे हैं। वहीं तमाम सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी ये बात पसंद नहीं आई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि बार-बार केवल हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं को निशाना बनाया जाता है, जबकि दूसरे धर्मों के वास्तविक दमनकारी रीति-रिवाजों को ब्रांडों से मुफ्त पास मिलता है। सोशल मीडिया पर लोगों ने बार-बार सेलेक्टिव तरीके से हिंदू धर्म को निशाना बनाए जाने की कड़ी आलोचना की क्योंकि हिंदू धर्म के अलावा कंपनियां दूसरों को ऐसे ही जाने देती हैं।

यूजर्स ने इस बात को लेकर खेद जताया कि निकाह-हलाला और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ पर्याप्त जागरूकता नहीं फैलाई जाती है लेकिन ब्रांडों ने हिंदू परंपराओं के खिलाफ धर्मयुद्ध शुरू किया। कुछ यूजर्स का कहना है कि यही बॉलीवुड बेटियों को पराया धन बताते हुए फिल्में बनाता है और फिर इसे हिन्दू धर्म से जोड़ कर समाज सुधारक की भूमिका में आ जाता है। इस तरह से तमाम यूजर्स ने आलिया भट्ट पर निशाना साधा। सोशल मीडिया यूजर्स ने आलिया के बहाने भट्ट परिवार के उस इतिहास पर भी प्रकाश डाला, जब आलिया के पिता महेश भट्ट ने पूजा भट्ट को लेकर कहा था कि अगर वह उनकी बेटी नहीं होती तो वह उनसे शादी कर लेते।

वीडियो में कही थी ये बात

सामने आए वीडियो में आलियाह मंडप में दुल्हन के जोड़े नजर आ रही हैं। आलिया भट्ट बताती हैं कि परिवार का हर सदस्य उनसे कितना प्यार करते हैं। वह शादी में होने वाले कन्यादान पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि उन्हें पराया धन कहा जाता है। लड़कियां दान करने करने की चीज हैं। क्यों सिर्फ कन्यादान। नया आइडिया कन्यामान।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।