कविता

भावनात्मक, रचनात्मक और कलात्मक अभिव्यक्ति

Latest कविता News

कुछ तो हे जो नहीं किया करते

शायर एवं रचयितासाहिल (राकेश मालवीय) जिसको चाहते हैं हम उसका दिल तोड़ा…

शायरी और सूफियाना कव्वाली के रंगों से सजा मुशायरा

प्रेषक- मिर्ज़ा ज़ाहिद बेग़ इंदौर नए साल की पहली शाम ही इंदौर…

मिर्ज़ा ज़ाहिद बेग़

मौत से ठन गई, जी भर के जिया, फिर क्यों डरूँ?

मौत से ठन गई, जी भर के जिया, फिर क्यों डरूँ? मन…

Rajendra Singh

अमृत को छोड़ा, सब्ज़ी को खाया, अमृत को ही हमने ख़रपतवार बताया…

अमृत को छोड़ा, सब्ज़ी को खाया, अमृत को ही हमने ख़रपतवार बताया……

Rajendra Singh

कविता – हमने अपना आशियाना जला के, औरों के चिराग रोशन किए हैं।

हमने अपना आशियाना जला के, औरों के चिराग रोशन किए हैं। अपने…

Rajendra Singh

वृक्ष नहीं ये युग का हुआ अवसान, पीपल था वृक्षों में कृष्ण समान

आचार्य इंजी.अखिलेश जैन "अखिल" वृक्ष नहीं ये, युग का हुआ अवसान, पीपल…

Rajendra Singh

जीवन की कश्ती

 डॉ. दिलीप वागेला इंसान को चढ़ गई है ऐसी मस्ती, मिटाने पर…

मत काटो पेड़ों को तुम – डॉ. दिलीप वागेला

मत काटो पेड़ों को तुम, ये हैं धरा के प्राण, हर शाख़…

Rajendra Singh

आओ, फिर हरियाली बोएं

✍️ रचना: अखिलेश जैन "अखिल" न सुना कहानियां पतझड़ की, अब बहारों…

Rajendra Singh

विकास की खलबली में, चढ़ता पेड़ ही क्यों बलि ?

🌿 विकास की खलबली में, 🌳 चढ़ता पेड़ ही क्यों बलि? 🌸…

Rajendra Singh