Latest कविता News
कुछ तो हे जो नहीं किया करते
शायर एवं रचयितासाहिल (राकेश मालवीय) जिसको चाहते हैं हम उसका दिल तोड़ा…
शायरी और सूफियाना कव्वाली के रंगों से सजा मुशायरा
प्रेषक- मिर्ज़ा ज़ाहिद बेग़ इंदौर नए साल की पहली शाम ही इंदौर…
मौत से ठन गई, जी भर के जिया, फिर क्यों डरूँ?
मौत से ठन गई, जी भर के जिया, फिर क्यों डरूँ? मन…
अमृत को छोड़ा, सब्ज़ी को खाया, अमृत को ही हमने ख़रपतवार बताया…
अमृत को छोड़ा, सब्ज़ी को खाया, अमृत को ही हमने ख़रपतवार बताया……
कविता – हमने अपना आशियाना जला के, औरों के चिराग रोशन किए हैं।
हमने अपना आशियाना जला के, औरों के चिराग रोशन किए हैं। अपने…
वृक्ष नहीं ये युग का हुआ अवसान, पीपल था वृक्षों में कृष्ण समान
आचार्य इंजी.अखिलेश जैन "अखिल" वृक्ष नहीं ये, युग का हुआ अवसान, पीपल…
मत काटो पेड़ों को तुम – डॉ. दिलीप वागेला
मत काटो पेड़ों को तुम, ये हैं धरा के प्राण, हर शाख़…
विकास की खलबली में, चढ़ता पेड़ ही क्यों बलि ?
🌿 विकास की खलबली में, 🌳 चढ़ता पेड़ ही क्यों बलि? 🌸…
