इंदौर-देवास उज्जैन ट्रेनों को मिलेगी गति, बरलाई में बनने लगा ब्रिज, दोहरीकरण भी शुरु

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sadbhawnapaati
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इंदौर। इंदौर, देवास, उज्जैन बड़ी लाइन (ब्राडगेज) पर रेल लाइन दोहरी करने का काम शुरू हो गया है। बरलाई में ब्रिज बनने लगा है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो साल-सवा साल में दोहरीकरण पूरा होकरण रेलगाड़ियों को तेज रफ्तार मिलेगी कहीं गाड़ियों को क्रासिंग के लिए रूकने की झंझट खत्म हो जाएगी।
अभी इंदौर देवास उज्जैन के बीच रेलगाड़ियों को क्रासिंग के लिए छोटे स्टेशनों पर रोकना पड़ता है। आने वाले कुछ समय में यह झंझट खत्म हो जाएगी। इंदौर देवास उज्जैन के बीच ही रेलों की रफ्तार क्रासिंग की वजह से खत्म हो जाती है। 2016-17 के वार्षिक रेल बजट में रेल मंत्रालय ने इस रेल लाइन को दोहरा करने का ऐलान किया था।
करीब 80 किलोमीटर के इस रेल रूट को दोहरीकरण करने पर 650 करोड़ रूपए खर्च होगा। इस खर्च में सिग्नलिंग पॉवर व अन्य खर्च भी शामिल है।
2022 में शुरू हुआ। यह काम 2023 में पूरा होता है लेकिन अब तक इस काम में रफ्तार नहीं थी कुछ माना जा रहा है कि काम रफ्तार पकड़ेगा। मांगल्या बरलाई, लक्ष्मी नगर में तीन ब्रिज बनना है। इसमें और बिजलीकरण में ही समय लगेगा।
बाकी पटरियां बिछाने छोटे स्टेशनों व चेक पोस्ट को हटाने तोड़ने का काम जल्द ही पूरा हो जाएगा। सिंहस्थ के पहले इंदौर देवास उज्जैन को यह नई रेल सुविधा और तेज रफ्तार मिलेगी। इंदौर खंडवा और उज्जैन देवास दोहरीकरण करने में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद रूचि ले रहे हैं। इसलिए काम जल्दी पूरा होने की उम्मीद है।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।