Indore News – 30 लाख से अधिक आबादी तो फिर 5 लाख 87 हजार संपत्ति कर खाते क्यों? इस पर होगी जांच

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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Indore News. शहर में 30 लाख से अधिक आबादी होने के बावजूद 5 लाख 87 हजार संपत्ति कर खाते पर अब नगर निगम में एक तरह से प्रश्न चिन्ह लगा है। इसको लेकर जहां एक और संपत्तियों का सर्वे भी हो सकता है। वहीं 29 गांव पर अधिक फोकस नगर निगम द्वारा इन दिनों किया जा रहा है।

जलकर खाते 2 लाख 72 हजार होने से भी चिंतित है क्योंकि आबादी के अनुसार और बढ़ते शहर के बावजूद संपत्ति कर और जलकर खातों में इजाफा नहीं हो रहा है। इसके विपरीत निगम द्वारा जो पहले सर्वे हुआ था वह भी कई वर्ष पहले होने के बाद कई कॉलोनी या नई बस गई तो वहां पर अभी तक जांच नहीं हुई है। इसमें नगर निगम द्वारा सबसे अधिक ध्यान इन दिनों 29 गांव शामिल हुए वहां पर ध्यान दिया जा रहा है जहां 2014 -15 के बाद डायवर्शन को लेकर भी इस ओर सर्वे किया जा रहा
तो बिल कलेक्टर व सहायक राजस्व अधिकारी को भी निर्देश मिले हैं। अब एक बार फिर से संपत्तियों का भी सर्वे हो सकता है। तो दूसरी ओर अभी तक बड़े बकायेदारों को 351 से अधिक नोटिस भेजे उसमें से 150 नोटिस तामिल हुए हैं जिनसे वसूली का काम भी लगातार चल रहा है। बीते कुछ वर्षों से शहर फैला जरूर है लेकिन संपत्ति कर व जलकर खातों में इजाफा नहीं होने के कारण इसकी भी जांच के लिए प्रत्येक वार्ड के अनुसार बिल कलेक्टर को भी निर्देश मिल रहे हैं।

राजस्व अपर आयुक्त भव्या मित्तल ने बताया कि 29 गांव पर अधिक फोकस किया जा रहा है जहां 2014-15 के बाद डायवर्सन की भी जांच हो रही है तो दूसरी और आबादी के अनुसार संपत्तिकर और जलकर के खाते बेहद कम है। इसको लेकर भी बिल कलेक्टर से लेकर सहायक राजस्व अधिकारी को अपने अपने क्षेत्र में जांच के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।