वनवासी युवक-युवतियों को दिया कथा व्यास का प्रशिक्षण, उनमें से एक गीता बहन गीता भवन में 28 अप्रैल से रामकथा सुनाएंगी

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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इन्दौर। शहर में पहली बार श्रीराम कथा का ऐसा आयोजन हो रहा है, जिसमें वनवासी प्रभु श्रीराम की महिमा वनवासी कथाकार सुनाएंगे। एकल अभियान के तहत श्रीहरि सत्संग समिति के तत्वावधान में 28 से 30 अप्रैल तक गीताभवन में ओजस्वी कथाकार विदुषी गीता बहन के श्रीमुख से रामकथा रूपी अमृत वर्षा का भावपूर्ण आयोजन होगा। प्रतिदिन सायं 4.30 से 7 बजे तक यह अनूठा आयोजन गीता भवन के सत्संग सभागृह में होगा, जिसमें शिव चरित्र, श्रीराम जन्मोत्सव, अवतार और धर्म रक्षा-सीता विवाह जैसे प्रसंगों की व्याख्या होगी।
सत्संग समिति के प्रमुख रामविलास राठी, सी.के. अग्रवाल एवं कमल राठी ने बताया कि पिछले 32 वर्षों से एकल अभियान के तहत देश के सुदूर वनवासी क्षेत्रों में श्रीहरि सत्संग समिति के तत्वावधान में 20 प्रशिक्षण केन्द्र चल रहे हैं, जहां वनवासी युवक-युवतियों को धर्म-संस्कृति का प्रशिक्षण देकर व्यास कथाकार के रूप में दीक्षित किया जा रहा है।
इन युवक-युवतियों को रामचरित मानस एवं श्रीमद भागवत के कथाकार के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। देश में लगभग 70 हजार गांवों में सत्संग केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां अब तक 4500 युवक-युवतियों को राम-कृष्ण कथा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन्हीं में से एक विदुषी गीता बहन 28 से 30 अप्रैल तक इन्दौर में गीता भवन सत्संग सभागृह में श्रीराम कथा का अमृतपान कराने आ रही हैं। आयोजन की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।