Indore Light House Project – इंदौर के 128 करोड़ के “लाइट हाउस प्रोजेक्ट” की खुली पोल, कई शिकायतें, प्रशासन मौन

सदभावना पाती पड़ताल : प्रोजेक्ट में लीकेज, दरारें और घटिया निर्माण जैसी गंभीर शिकायतें, 128 करोड़ का ड्रीम प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में

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विजेश पटेल
दैनिक सदभावना पाती

Indore News in Hindi। प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana) के तहत इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र स्थित गुलमर्ग परिसर (Gulmarg Parisar Indore) में निर्मित प्रधानमंत्री लाइट हाउस प्रोजेक्ट (Pradhan Mantri Light House Project) गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। करीब 128 करोड़ रुपये की लागत से बने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में महज दो साल के भीतर ही लीकेज, दीवारों में दरारें, प्लास्टर झड़ना, पाइपलाइन फटना, पानी भरने, ड्रेनेज और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं सामने आ गई हैं। हालात यह हैं कि लाखों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने वाले सैकड़ों परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

लाइट हाउस प्रोजेक्ट (Light House Project Indore) के तहत कुल 1024 आवासीय फ्लैट बनाए गए थे, जिनमें से लगभग 300 परिवार वर्तमान में निवासरत हैं। रहवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान बाथरूम, दीवारों और छतों से लगातार पानी टपकता है। कई स्थानों पर दीवारें कमजोर होकर गिरने की स्थिति में हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।

शिकायतों के बाद नगर निगम ने निर्माण एजेंसी केपीआर प्रोजेक्टकॉन (KPR PROJECTCON PRIVATE LIMITED) को नोटिस जारी किया था। निगम ने स्पष्ट किया था कि पूरी इमारत स्टील स्ट्रक्चर तकनीक पर आधारित है और लगातार लीकेज होने से भवन की आयु कम हो सकती है, जो अत्यंत गंभीर विषय है। निगम ने कंपनी को स्थायी समाधान के निर्देश भी दिए, लेकिन मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि अब तक समस्याओं का कोई प्रभावी निवारण नहीं हुआ है।

दैनिक सदभावना पाती की टीम द्वारा मौके पर की गई पड़ताल में यह भी सामने आया कि पूरे परिसर में गंदगी और कचरे का अंबार लगा है। भवनों के सामने लगातार गंदा ड्रेनेज का पानी बहता रहता है, जिससे न केवल बदबू फैल रही है बल्कि बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है। कैंपस में कई जगह उबड़-खाबड़ जमीन है, जहां खेलते समय बच्चों के घायल होने की आशंका रहती है। पेयजल की स्थिति भी चिंताजनक है—न पानी साफ है और न ही नियमित आपूर्ति। पानी की टंकी के पास ही ड्रेनेज का गंदा पानी बह रहा है, जिससे वाहन पार्किंग तक प्रभावित हो रही है।

रहवासियों का आरोप है कि उन्होंने नगर निगम, पार्षद, विधायक, महापौर, कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक को 100 से 150 से अधिक लिखित शिकायतें सौंपी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनकी शिकायतें केवल फाइलों तक सीमित रह गई हैं। रहवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो वे कलेक्टर कार्यालय से लेकर न्यायालय तक जाने को मजबूर होंगे।

गौरतलब है कि ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज–इंडिया (Global Housing Technology Challenge India) के तहत देश के छह शहरों—इंदौर, चेन्नई, राजकोट, अगरतला, रांची और लखनऊ—में लाइट हाउस प्रोजेक्ट (light house project) शुरू किए गए थे। सभी परियोजनाओं की नींव 1 जनवरी 2021 को रखी गई थी। अब तक केवल चेन्नई, इंदौर और राजकोट में ही प्रोजेक्ट पूरे हो सके हैं, जबकि अगरतला, रांची और लखनऊ में निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। इंदौर की तरह राजकोट में भी लीकेज की शिकायतें सामने आई हैं। चेन्नई को छोड़कर लगभग सभी स्थानों पर निर्माण की गुणवत्ता और देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

सदभावना सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट (PM dream project) के नाम पर खर्च किए गए 128 करोड़ रुपये की जवाबदेही कौन लेगा, और इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों व निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई कब होगी।

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