मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हाल ही में कहा कि ओंकारेश्वर में विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पार्क स्थापित होने से बिजली की समस्या दूर हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सौर ऊर्जा से बिजली की कमी दूर करने और पर्यावरण संरक्षण के हर संभव प्रयास जारी हैं. मंत्री हरदीप डंग पूर्व सांसद स्व. नंदकुमार सिंह के साथ 11 जनवरी को यहां का निरीक्षण करने गए थे. उन्होंने बताया था कि इस प्लांट से 2022-23 तक 600 मेगावाट ऊर्जा मिलने लगेगी. इस प्रोजेक्ट में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश संभावित है
बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन, वर्ल्ड बैंक और पॉवर ग्रिड ने सैद्धांतिक सहमति दे दी थी. प्रोजेक्ट से जुड़ी पहली स्टडी पूरी हो चुकी है. इस प्रोजेक्ट में प्रोजेक्ट के इलाके से लेकर खंडवा सब-स्टेशन तक ट्रांसमिशन लाइन रूट का सर्वे किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को लेकर एक स्टडी ये भी कराई जाएगी कि इससे समाज और पर्यावरण पर क्या असर होगा.
बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी इस प्रोजेक्ट से बिजली खरीदेगी. कंपनी ने 400 मेगावाट बिजली खरीदने की बात कही है. प्रोजेक्ट में बनाए जा रहे सोलर पैनल ओंकारेश्वर बांध के बैकवाटर में तैरेंगे. हो सकता है कि अगले दो सालों में प्रदेश को सस्ती बिजली मिलने लगे. यहां बिजली का उत्पादन बांध के करीब 2,000 हेक्टेयर जलक्षेत्र में होगा.
इस सोलर पैनल की खास बात ये है कि पानी के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं होगा. ये सतह पर अपने आप तैरेंगे. तेज लहरों से भी उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा. सूरज की किरणों से लगातार बिजली बनती रहेगी.
इस प्रोजेक्ट को लेकर ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह डंग ने मीडिया से कहा है कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में मध्य प्रदेश लगातार कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. हाल ही में 15 सौ मेगावाट की आगर-शाजापुर-नीमच सोलर पार्क के लिए हुई बिल्डिंग में देश में सबसे कम सोलर टैरिफ का रिकॉर्ड बना है.


