नई शिक्षा नीति : कॉलेजों में अहिल्या और विक्रमादित्य की शौर्यगाथा पढ़ाएंगे, लाना होंगे 40 फीसदी अंक 

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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प्रदेश के सभी कॉलेजों में प्रथम वर्ष में रामचरित मानस पढ़ाई गई। अब सेकंड  ईयर में श्रीमद् भगवद्गीता पढ़ाई जाएगी। इसके अलावा देवी अहिल्याबाई होलकर और विक्रमादित्य के साथ ही अन्य भारतीय इतिहास के स्वर्णिम लोगों को पढ़ाया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी इन लोगों के व्यक्तित्व से प्रेरित होकर अपने व्यक्तित्व का विकास कर सके।

उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा कि कोविड के बावजूद हमने बीते साल नई शिक्षा नीति में रामचरित मानस को सिलेबस में शामिल किया। इस बार सेकंड ईयर में प्रवेश कर रहे हैं। इसमें भगवद्गीता को भी शामिल किया जा रहा है।

देवी अहिल्याबाई को भी जोड़ेंगे

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में हमारे गौरवशाली अतीत को शामिल किया जाएगा।

सनातन संस्कृति के साथ ही सिलेबस में देवी अहिल्याबाई होलकर, विक्रमादित्य, राजा भोज जैसे अनेक नायकों को भी जोड़ा जाएगा, ताकि इनके कार्यों और प्रयासों को देश की भावी पीढ़ी जान सके।

नई शिक्षा नीति में गुणवत्ता के साथ ही अतीत के गौरवशाली इतिहास को भी जोड़ा जा रहा है।

नहीं रहेगा 33 प्रतिशत का जमाना

मंत्री यादव ने कहा कि नई शिक्षा नीति में बदलाव से विद्यार्थियों को शिक्षित करने के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी।

अब 33 प्रतिशत का जमाना नहीं रहेगा और 40 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाना होंगे। नई शिक्षा नीति में भीड़ बढ़ाने वाली शिक्षा नहीं होगी, बल्कि रोजगार देने वाली शिक्षा दी जाएगी।
नई शिक्षा नीति में छात्र पढ़ाई करने के साथ ही रिसर्च भी कर सकेंगे। धीरे-धीरे हम बदलाव करते जा रहे हैं।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।