राजस्व अधिकारी मौका भ्रमण कर लोगों की समस्याओं का निराकरण करें : मनीष सिंह

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sadbhawnapaati
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इन्दौर। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मनीष सिंह ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व अधिकारियों को नामान्तरण के साथ-साथ बटांकन, नक्शा दुरस्ती एवं सीमांकन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये है तथा इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं।
कलेक्टर मनीष सिंह ने सभी अनुविभागीय अधिकारी/तहसीलदार/ नायब तहसीलदार एवं अधीनस्थ राजस्व अधिकारी-कर्मचारियों को मौका भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी अपर जिला दंडाधिकारी को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे यह सुनिश्चित करें कि राजस्व अधिकारी मौका भ्रमण करते वक्त लोगों की समस्याओं का निराकरण करें तथा शिकायतों का संतुष्टिपूर्वक निराकृत करवाएं।
कलेक्टर सिंह द्वारा जारी आदेशानुसार यह देखने में आया है कि नामान्तरण आवेदन लगाने के उपरान्त आमजन बटांकन, नक्शा दुरस्ती, सीमांकन आदि के लिए पुनः अलग-अलग चरणों में आवेदन लगाते हैं तथा इस हेतु परेशान भी होते रहते हैं।

राजस्व अधिकारी मौका भ्रमण कर लोगों की समस्याओं का निराकरण करें : मनीष सिंह

अतः राजस्व अधिकारियों को यह निर्देशित किया गया है कि जब कोई आम जन नामान्तरण का आवेदन लगाए तो उसका नामांतरण का निर्णय लेते समय यह भी निर्देश दें कि, सीमांकन, बटांकन, नक्शा दुरुस्ती के साथ-साथ नवीन खसरा नकल तथा नक्शा प्राप्त करने की प्रक्रिया का भी वह आवेदन पूर्ण करें।
यथा संभव यह सब मार्गदर्शन राजस्व अधिकारियों को मौका भ्रमण के दौरान सलाह के रूप में भी दिया जाना चाहिये तथा अपने अधीनस्थ अमले से त्वरित कार्यवाही करवाते हुए यह पूर्ण करने हेतु आवश्यक सहयोग भी प्रदान किया जाना चाहिये।
आदेशित किया गया है कि कॉलम 12 में कोई भी प्रविष्ठी बिना कलेक्टर की स्वीकृति के परिवर्तित नहीं की जा सकेगी। सामान्य तौर पर किसी राजस्व न्यायालय में किसी जांच में आए तथ्यों के आधार पर अथवा राजस्व कर्मचारियों द्वारा मौका निरीक्षण के दौरान मौके पर पाए गए तथ्यों की प्रविष्ठी कैफियत के कॉलम में दर्ज की जाती है। कैफियत के कॉलम में नवीन प्रविष्टि करने की स्वतंत्रता पूर्ववत रहेगी, किन्तु उसे परिवर्तित करना है तो उसमें कलेक्टर की लिखित स्वीकृति अनिवार्यतः लेनी होगी।
यह भी निर्देशित किया गया है कि कलेक्टर की जांच में यह पाया जाता है कि किसी कैफियत के कॉलम में कोई प्रविष्टि गलत तरीके से की गई है तथा उसका आधार नहीं हैं तो उसमें प्रविष्ठी करने वाले अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
निर्देशित किया गया है कि वर्ष 1959 में अगर राजस्व अभिलेखों में कोई भूमि शासकीय पाई जाती है तो उन भूमियों के मामलों में विस्तृत जांच की जिम्मेदारी तहसीलदार की रहेगी तथा न्यायालय पाता है कि बिना किसी आधार पर वह भूमि शासकीय से निजी हो गई हैं तो पूर्ण सुनवाई के उपरान्त उसका प्रतिवेदन संबंधित अनुविभागीय अधिकारी को प्रस्तुत करेंगे, किन्तु साथ ही साथ कैफियत कॉलम नंबर 12 में उस भूमि के शासकीय होने संबंधी तथ्यों का उल्लेख करते हुए कोई अनुमति नहीं दी जाय, इसका भी उल्लेख किया जाय। तहसीलदार यह पाता है कि वर्ष 1959 के उपरान्त विधिक आधार पर कोई भूमि निजी हुई है तथा तहसीलदार संतुष्ट है कि उस भूमि पर शासन का कोई हित निहित नहीं है, उन्हीं परिस्थितियों में उस भूमि पर किसी प्रकार की अनुमति जारी हो सकेगी।
ऐसे कई प्रकरण देखने में आ रहे हैं कि शासकीय भूमि को बिना किसी आधार पर पूर्व वर्षों में निजी कर दी गई तथा उस भूमि पर अनुमति की मांग की जाने लगी है। अतः ऐसी भूमियों के संबंध में भी सभी तहसीलदार/अनुविभागीय अधिकारी सतर्कतापूर्वक कार्यवाही करेंगे तथा शासन के हित प्रभावित न हो इसका विशेष ध्यान रखेंगे।
 
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