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अग्निपथ योजना के विरोध में उभरी आग में जल रहा देश!  

लेखक–डॉ. भरत मिश्र प्राची

केन्द्र सरकार द्वारा सेना में पुरानी प्रक्रिया के बदले लागू किये गये नई भर्ती प्रक्रिया अग्निपथ योजना के विरोध में देश भर के युवाओं में विरोध प्रदर्शन जारी है । केन्द्र सरकार ने इस नई योजना के तहत सेना में अग्नि वीर नाम से केवल चार वर्ष के लिये भर्ती किये जाने की योजना है जहां किसी भी तरह की पेंशन नहीं लागू है। सेना में अब तक भर्ती की प्रक्रिया में कम से कम 15 वर्ष की अवधि होती रही है जहां पेंशन मिलने का प्रावधान है, आगे बढ़ने पर 60 वर्ष तक सेवा करने का अवसर भी मिला हुआ है। सेना की इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से नई अग्निपथ योजना के तहत मात्र चार वर्ष के लिये भर्ती किये जाने के विरोध में आज देश का युवा वर्ग अपने अनिश्चित भविष्य को लेकर सड़क पर उतर आया है। आज इस योजना के विरोध में बिहार बंद है तो आने वाले समय में अन्य राज्यों बंदी का माहौल बन सकता  है। इस योजना को तत्काल वापिस लेने एवं पुरानी प्रक्रिया से सेना में भर्ती किये जाने की योजना को फिर से लागू किये जाने की मांग को लेकर युवा वर्ग में विरोध जारी है। इस विरोध में अग्निपथ योजना की भभकती आग कहीं पूरे देश को न जला दे। केन्द्र सरकार को तत्काल इस नई योजना के वर्तमान प्रारूप को पूर्व की भांति रखकर भभकती आग को रोकने का प्रयास करना चाहिए।
केन्द्र सरकार द्वारा अभी हाल ही में लागू की जा रही नई कृषि नीति के विरोध में किसानों ने जोरदार विरोध किया। इस नीति को भी केन्द्र सरकार किसानों के हित में बता रही थी। इस नीति को संसद में परित भी कर लिया गया पर देश के किसान इस नीति से खुश नहीं थे। कई दिनों तक आंदोलन चला और इस आंदोलन में कई किसान शहीद भी हो गये। देश को इस आंदोलन से भारी नुकसान हुआ पर सरकार टस से मस नहीं हुई। इस नीति का प्रतिकूल प्रभाव कहीं होने वाले चुनाव पर न पड़े इस भय से सरकार जिस कानून को किसानों के हित में बता रही थी, उसे वापिस ले लिया तब तक देश को बहुत नुकसान हो चुका था जिसकी भरपाई कर पाना संभव नहीं। इसी तरह सरकार के सेना भर्ती में अग्निपथ योजना को लेकर देश के युवा वर्ग में भारी आक्रोश है। अग्निपथ योजना का कार्यकाल सिर्फ चार साल है जिसमें 1 साल का समय तो प्रशिक्षण में निकल जाएगा शेष 3 साल के बाद इस योजना में आये युवा का भविष्य क्या होगा, इसका कुछ पता नहीं । यह योजना सरकारी ठेका का एक स्वरूप है । सेना में इस तरह की प्रक्रिया न तो देश हित में है न युवाओं के हित में जिनका भविष्य यहां आने पर अंधकारमय होने की पूरी संभावना है। इस तरह की योजना को लेकर युवा वर्ग में आक्रोश होना स्वाभाविक है। आज इस योजना के विरोध में बिहार बंद है जहां आगजनी, तोडफोड की घटनाएं विकराल रूप ले चुकी है तो आने कल को देश के अन्य भागों को यह आग और न जला दे, इस ओर सरकार को मंथन करना चाहिए। सेना भर्ती के ठेकेदारी स्वरूप को देश की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। इस योजना में अमूल्य परिवर्तन कर देश के युवाओं को अंधकारमय भविष्य होने बचाने में सरकार समय से कदम उठाये। कहीं ऐसा न हो नई कृषि नीति के विरोध में पनपे आंदोलन से ज्यादा नुकसान अग्निपथ योजना के विरोध में उभरी आग से न हो जाय।
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