इंदौर। आर्थिक अपराधों के विरुद्ध सख़्त रुख अपनाते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) इंदौर ने केनरा बैंक से जुड़े 40 लाख रुपये के ऋण फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई एसपी रामेश्वर यादव के निर्देशन एवं सतत निगरानी में की गई, जिसके आधार पर धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार की धाराओं में FIR दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई है।
इस मामले के शिकायतकर्ता आनंद शिवानंद तोतडे, उप महाप्रबंधक, केनरा बैंक हैं, जिन्होंने बैंक को हुए आर्थिक नुकसान की जानकारी देते हुए EOW में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार मशीन क्रय के नाम पर फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज़ों के आधार पर 40 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया और बाद में उसकी किस्तों का भुगतान नहीं किया गया, जिससे बैंक को भारी आर्थिक क्षति हुई।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 में एक फर्म के नाम से बैंक शाखा में खाता खोला गया और 40 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। ऋण के बदले जिस संपत्ति को गिरवी दर्शाया गया, वह पहले से निर्मित थी तथा उसके फ्लैट और दुकानें पूर्व वर्षों में ही विक्रय की जा चुकी थीं। इसके बावजूद दस्तावेज़ों में उक्त संपत्ति को वैध, खाली और बंधन-मुक्त दर्शाकर बैंक को गुमराह किया गया।
इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच डीएसपी नंदनी शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि जिस व्यक्ति को को-ऑब्लिगेंट दर्शाया गया था, वह ऋण स्वीकृति के समय उक्त संपत्ति का वास्तविक मालिक नहीं था, फिर भी कूटरचित दस्तावेज़ों के आधार पर उसे मालिक बताया गया। भौतिक सत्यापन रिपोर्ट और वैल्यूएशन दस्तावेज़ों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
EOW की जांच में तत्कालीन बैंक अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। ड्यू-डिलिजेंस प्रक्रिया में बहुमंज़िला निर्माण और पहले से हो चुके विक्रय की जानकारी को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया, जिससे ऋण पात्रता को गलत तरीके से सही दर्शाया गया। ऋण की किस्तों का भुगतान न होने पर वर्ष 2023 में संबंधित खाता NPA घोषित किया गया।
ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्रकरण में चंद्रशेखर पचौरी (ऋण लेने वाला/फर्म प्रोपराइटर), राममोहन अग्रवाल, रजत गुप्ता (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, केनरा बैंक), कमलेश देवानी (तत्कालीन क्रेडिट मैनेजर) तथा शांति मार्केटिंग, इंदौर को आरोपी बनाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है।

