Health News – एम्स ने बनाया ब्रेन स्ट्रोक के इलाज़ के लिए ऐप, दूर से हो सकेगा मरीज का उपचार

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ब्रेन स्ट्रोक के अधिकतर मामलों में मरीज को काफी देरी से इलाज़ मिलता है. इसका कारण यह है भी है कि देशभर में न्यूरो के डॉक्टरों की कमी है. भारत में सिर्फ तीन हजार न्यूरोलॉजिस्ट हैं.
इनमें भी अधिकतर बड़े शहरों के अस्पतालों में कार्यरत हैं. इस वजह से ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को शुरुआत में होने वाला इलाज नहीं मिल पाता है और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है. इस परेशानी को दूर करने के लिए नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक ऐप बनाया है, जिसके जरिये न्यूरो के डॉक्टर कहीं से भी बैठकर स्ट्रोक के मरीज के इलाज के लिए जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मदद कर सकेंगे.
एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर विष्णु ने यह एप बनाया है. उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर न्यूरोलॉजिस्ट नहीं है और यह होना भी काफी मुश्किल है. ऐसे में जरूरी है कि फीजिशियन या मेडिसिन के डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया जाए और उन्हें नजदीक के किसी न्यूरो के डॉक्टर से जोड़ दिया जाए. इसके लिए मॉडल ऐप बनाया है, जिसका स्ट्रोक ऐप नाम रखा गया है. यह ऐप एम्स के सर्वर से जुड़ा होगा. फिलहाल इसके लिए 7 नोडल केंद्र बनाए गए हैं, जो देश के 22 जिलों के अस्पतालों से जुड़े हैं. अगले छह महीने तक इसे ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. अगर यह ऐप सफल रहा तो केंद्र सरकार बड़े स्तर पर इसका इस्तेमाल करेगी.
मौत के मामलों में आ सकेगी कमी
एम्स के डॉक्टर पद्मा ने कहा कि स्ट्रोक में सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को तुरंत इलाज मिले, ब्लॉकेज को खत्म करने वाली दवा मरीज को समय पर मिल जाए, ताकि मरीज को लकवा होने से बचाया जा सके लेकिन अपने देश में न्यूरोलॉजिस्ट की भारी कमी है, ऐसे में छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में स्ट्रोक के मरीज को इलाज नहीं मिल पाता है. उन्होंने कहा कि हमने पहली बार इसके लिए हिमाचल प्रदेश में कोशिश की थी, तब वहां पर एक हड्डी के डॉक्टर ने क्लॉट बस्टर दवा दी थी और मरीज को लकवा होने से बचा लिया था. इसी मकसद से एम्स ने स्ट्रोक ऐप बनाया है. इस ऐप से यह फायदा होगा कि जिला स्तर के डॉक्टर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टरों की मदद से स्ट्रोक के मरीज का इलाज़ कर सकेंगे. इससे मौतों के आंकड़ों में कमी आ सकेगी.
कोरोना संक्रमण के बाद बढ़ गया है खतरा
एम्स के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर रोहित भाटिया ने कहा कि हमने देश के 18 शहरों के अलग अलग अस्पतालों के आंकड़े देखे तो पाया कि कोविड ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की ठीक होने की दर को बहुत कम कर देता है. कोविड के शिकार स्ट्रोक के मरीजों की रिकवरी दर 34 फीसदी और बिना कोविड वाले ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में रिकवरी 66 फीसदी थी.
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।