Health News – वर्क फ्रॉम होम के कारण आधे लोग बैक पेन की समस्या से ग्रस्त – स्टडी

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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 लॉकडाउन के बाद वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ गया जो अब तक जारी है. लोग घर से काम करने तो लगे हैं लेकिन इससे कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियां बढ़ने लगी हैं. आज कई ऐसे लोग हैं जो वर्क फ्रॉम होम के कारण, कमर और गर्दन दर्द, सिर में दर्द जैसी कई परेशानियों से जूझ रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पीएमसी लैब की एक स्टडी के मुताबिक वर्क फ्रॉम होम के कारण 41.2 प्रतिशत लोगों ने लोअर बैक पेन की शिकायत की है.
गतिहीन लाइफस्टाइल ने बढ़ाई परेशानी
स्टडी में पाया गया कि घर में अधिक देर तक काम करने के कारण 23.5 प्रतिशत लोगों को गर्दन में दर्द की शिकायत है. जर्नल ऑफ हेड एंड फेस पेन में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने, काम के घंटे में वृद्धि, तनाव, सोने के पैटर्न में गड़बड़ी, महामारी के कारण लोगों से अलगाव आदि के कारण वर्क फ्रॉम होम में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अलावा बैठने का खराब पॉश्चर और गतिहीन लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और अधिक बढ़ा दिया है. लोअर बैक पेन और नेक पेन के कारण मस्कूलोस्केलटल डिर्सोर्डर होने लगा है.
लोअर बैक पेन के प्रमुख कारण
डॉक्टर्स के मुताबिक, ट्रेवल सीमित होना, जिम का बंद होना, स्विमिंग पूल का बंद होना, जॉगिंग ट्रैक का बंद होना, प्लेग्राउंड का बंद होना आदि कई ऐसे कारण हैं, जिससे शारीरिक गतिविधियां बहुत कम हुई है. अब भी लोग अपने पुराने लाइफस्टाइल पर नहीं आए हैं. वर्क फ्रॉम होम के कारण लोगों के खान-पान के पैटर्न में बदलाव आया है जिसके कारण डाइजेशन सिस्टम में प्रोब्लम आने लगी है.
काम के ज्यादा दबाव के कारण लोग देर रात को सोने लगे हैं. इसके कारण समय पर सोने के लिए आवश्यक एंजाइम रिलीज नहीं हो रहे हैं. यह कई तरह की परेशानियों को जन्म दे सकती है. वर्क फ्रॉम होम के कारण काम और घर के बीच लोग संतुलन नहीं बना पा रहे हैं. समय का सामंजस्य ठीक से नहीं हो पाता है. इसलिए लोग तनाव में रहने लगे हैं. इससे मानसिक परेशानी बढ़ने लगी है.
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।