Education News – शैक्षणिक सत्र बीता, पर एमपी में निजी विश्वविद्यालयों की फीस तय नहीं कर पाया विनियामक आयोग

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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Education News. शैक्षणिक सत्र 2021-22 बीतने में सिर्फ एक महीना शेष है और प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की फीस तक तय नहीं हुई है।
यह स्थिति तब है, जब मध्य प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों (पाठ्यक्रम) की फीस तय करने और उन पर नजर रखने के लिए ‘मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग” है।
आयोग 10 महीने में प्रदेश के सभी 39 निजी विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव तक नहीं मंगा पाया।

ज्ञात हो कि इन विश्वविद्यालयों में सवा लाख से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। समय से फीस तय न होने का खामियाजा बाद में विद्यार्थियों को भुगतना पड़ेगा।

मसलन, विश्वविद्यालय की सुविधा को देखकर आयोग कम फीस तय करता है, तब भी विद्यार्थी को उतनी ही फीस चुकाना होगी, जिनती प्रवेश से पहले विश्वविद्यालय मैनेजमेंट से तय हुई है।

विनियामक आयोग ने 12 मार्च 2021 को शैक्षणिक कैलेंडर 2021-22 घोषित किया था और 15 अप्रैल तक सभी निजी विश्वविद्यालयों से पाठ्यक्रम अनुसार फीस के लिए प्रस्ताव मांगे थे, पर हैरत की बात है कि 30 अप्रैल तक एक भी निजी विश्वविद्यालय ने प्रस्ताव नहीं दिया।

उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण कामकाज ठप होने का तर्क दिया। इस तर्क से सहमत होते हुए आयोग ने 31 जुलाई 2021 तक का समय दे दिया। इस अवधि में भी 11 निजी विश्वविद्यालयों ने ही प्रस्ताव दिया।

फिर अक्टूबर 2021 तक अन्य तीन के प्रस्ताव आए, लेकिन परीक्षण में तीन विश्वविद्यालयों के प्रस्ताव ठीक पाए गए। जबकि 11 के प्रस्तावों में कमी पाई गई। जिससे उन्हें वापस लौटा दिया गया।

इस मामले में विश्वविद्यालयों ने आयोग की भी एक नहीं सुनी। बार-बार स्मरण कराने के बाद भी नवंबर एवं दिसंबर 2021 तक 10 और विश्वविद्यालयों ने ही प्रस्ताव भेजे।

ऐसे में पूरा सत्र बीत गया और आयोग पाठ्यक्रमों की फीस तय करना तो दूर विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव तक नहीं मंगा पाया।

अब भी 15 विश्वविद्यालयों के नहीं आए प्रस्ताव

जानकार बताते हैं कि विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव मंगाने के आयोग के सारे प्रयास नाकाफी साबित हुए। मार्च 2022 में यह शैक्षणिक सत्र समाप्त हो रहा है और 15 विश्वविद्यालयों के प्रस्ताव अब भी नहीं आए हैं। इसलिए संबंधित विश्वविद्यालयों की फीस भी तय नहीं हो पा रही है।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।