पैंगोंग में चीन के दूसरा पुल बनाने की रिपोर्ट पर बोला भारत, कब्जा किया गया है

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

Contents

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि जिस इलाके का जिक्र किया जा रहा है हमें लगता है यह कब्जे वाला इलाका है। हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और चीनी पक्ष से बातचीत जारी है।

पैंगोंग में चीन के दूसरा पुल बनाने की रिपोर्ट पर बोला भारत, कब्जा किया गया है

चीन कितना भी शांति की बात करे लेकिन पैंगोंग में उसकी एक और चालबाजी सामने आई है। ऐसी खबर सामने आई थी कि चीन ने पैंगोंग झील पर दूसरे पुल का निर्माण शुरू कर दिया है।

हाल ही में चीन ने भारत के दावे वाले इसी क्षेत्र में एक पुल का निर्माण पहले ही किया था। कहा जा रहा है कि दूसरा पुल भारी बख्तरबंद वाहन की आवाजाही के लिए सक्षम होगा। इसी बीच अब इस मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी एक बयान आया है।

दरअसल, चीन द्वारा पैंगोंग झील पर दूसरे पुल के निर्माण शुरू करने की रिपोर्ट्स के बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि जिस इलाके का जिक्र किया जा रहा है हमें लगता है यह कब्जे वाला इलाका है।

हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और चीनी पक्ष से बातचीत जारी है। हम इस तरह के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। हम इस बारे में चीनी पक्ष के साथ राजनयिक और सैन्य दोनों स्तर पर बातचीत कर रहे हैं।

इससे पहले सैटेलाइट तस्वीरों से भी पता चला कि पैंगोंग झील के आसपास के कब्जे वाले क्षेत्र में चीन एक दूसरे पुल का निर्माण कर रहा है और यह चीनी सेना के लिए इस क्षेत्र में अपने सैनिकों को जल्दी से पहुंचाने में मददगार हो सकता है।

दो साल से अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में कई तनाव वाले बिंदुओं पर भारतीय और चीनी सेनाओं में जारी गतिरोध के बीच पुल का निर्माण किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में बनकर तैयार हुए पहले पुल के बराबर में दूसरे पुल का निर्माण किया जा रहा है।

सैटेलाइट तस्वीरों का आकलन करने वाले जानकार बताते हैं कि पहले पुल का इस्तेमाल क्रेन जैसे उपकरण का आवाजाही में इस्तेमाल हुआ, जो दूसरे पुल को तैयार करने के लिए जरूरी है।

जनवरी में जब पैंगोन्ग झील के उत्तरी और दक्षिण किनारों को जोड़ने वाले पुल के निर्माण की बात सामने आई थी, तो उसपर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी थी।

उस समय सरकार ने कहा था कि ढांचा जिस जगह पर स्थित है, वह 60 साल से ज्यादा समय से चीन के अवैध कब्जे में है। प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि भारत ने कभी भी ऐसा अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया।

 

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।