बागी विधायक इस्तीफा देकर चुनाव लड़कर दिखाएं- आदित्य ठाकरे

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sadbhawnapaati
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मुंबई। इन दिनों महाराष्ट्र में शिवसेना अपने सबसे बुरे दौर में चल रही है. पार्टी के 38 से अधिक विधायकों द्वारा बगावत करने से सियासी संग्राम मचा हुआ है. यहां तक कि उन बागी विधायकों ने तो शिवसेना पर ही दावा ठोकना शुरू कर दिया है और कह रहे हैं कि वे लोग ही सच्चे शिवसैनिक हैं. यानि ठाकरे परिवार को ही शिवसेना से बेदखल करने की बात कह रहे हैं.
इस बीच शिवसेना की युवा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आदित्य ठाकरे ने युवा सेना के पदाधिकारियों को संबोधित किया. आदित्य ठाकरे ने शिवसेना के बागी विधायकों को चुनौती देते हुए कहा, “मेरी इन विधायकों को खुली चुनौती है कि इस्तीफा दे और चुनाव लड़ कर दिखाएं. मैं इन सब को चुनाव में हराए बिना रुकूंगा नहीं.” आदित्य ने कहा, ‘असली ताकत शिवसैनिक है, परसों तक जो मेरी गाड़ी में बैठे थे वो भी चले गये.
यह जो परिस्थिति हमारे ऊपर आई है , ऐसे समय में फायदा लिया गया है जब उद्धव ठाकरे बीमार हैं.’ आदित्य ठाकरे ने आगे कहा, ‘आप खुद को अगर सच्चे शिवसैनिक कहते हैं तो सामने आइए और बोलिए हमारी क्या गलती हुई है. आज अगर बाला साहब ठाकरे या आनंद दिघे होते और उनके सामने उन्होंने यह किया होता तो वह उन्हें अपनी भाषा में समझाते. मुझे एक डायलॉग याद आ रहा है. दिलवाले पिक्चर में है कि हम शरीफ क्या हुए सारी दुनिया बदमाश हो गई. मैं तो रास्ते पर उतर ही रहा हूं लेकिन आप भी घर घर जाकर उनकी सच्चाई लोगों तक पहुंचाइये. आज हिम्मत से यह सारी नई पीढ़ी यहां आई है.
मैं आप लोगों के साथ हूं. जितना प्यार और विश्वास आप लोगों पर किया था उतना किसी पर नहीं किया जो डिपार्टमेंट पिछले 50 सालों में किसी मुख्यमंत्री ने नहीं छोड़ा वह डिपार्टमेंट इन्हें दिया गया. आदित्य ठाकरे ने कहा, उनमें बोलने की हिम्मत नहीं. बगावत सूरत में जाकर की. उस दिन बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं थे कि सुपर पावर क्या पाकिस्तान क्या अगर इतनी हिम्मत होती तो मुंबई में रहकर आप बात करते. जिस राज्य (असम) में परिस्थिति विकट है उस राज्य में जाकर आप लोग मौज मस्ती कर रहे हो सिर्फ खाने का बिल हर रोज 8 लाख और क्या- क्या है यह तो हमने पूछा ही नहीं और अब तो सीआरपीएफ की सिक्योरिटी दी गई है. यह सीआरपीएफ की सिक्योरिटी हमारे कश्मीरी पंडितों को दी गई होती जो हमने पिछले महीने ही मांग की थी. आदित्य ने आगे कहा, मुझे आज भी यकीन नहीं हो रहा है कि प्रकाश सुर्वे जैसा आदमी जा सकता है. जिन जिन लोगों को मैंने फंड दिया है, मैंने कोई उन पर उपकार नहीं किया.
आज पैसों के लिए आप वहां गए हैं. कल को आप अपने परिवार वालों को क्या मुंह दिखाएंगे उनको भी यही लगेगा कि पैसे के लिए आप ने गद्दारी की. पैसा आता जाता रहता है लेकिन नाम सही रहना चाहिए. असम में बाढ़ आई हुई है खबरों के मुताबिक 50 लाख लोगों को वहां से स्थानांतरित किया जा रहा है और उसी राज्य में जाकर फाइव स्टार होटल में विधायक मजा कर रहे हैं. असम के मुख्यमंत्री की क्या यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे यह कह सकते थे की यहां आपदा आई है यहां मत भेजिए इन विधायकों को. मगर उन्होंने ये कहने के बजाय विधायकों को मौज-मस्ती करवा रहे है.
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।