इंदौर। डीएचएल इंफ्राबुल्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आपराधिक प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय, मध्यप्रदेश खंडपीठ इंदौर ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भोपाल द्वारा दर्ज प्रकरण में याचिकाकर्ता अनिरुद्ध देव को राहत देते हुए न्यायालय ने आगामी सुनवाई तक उनके विरुद्ध कोई भी प्रतिकूल अथवा दमनात्मक कार्रवाई नहीं करने के निर्देश शासन को दिए हैं।
माननीय न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने WP क्रमांक 49016/2025 (अनिरुद्ध देव बनाम गृह विभाग एवं अन्य) की सुनवाई 15 दिसंबर 2025 को की। प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह तथ्य महत्वपूर्ण माना कि याचिकाकर्ता अनिरुद्ध देव कंपनी में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में नियुक्त थे और कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के प्रावधान 23(b) के अनुसार वे कंपनी के दैनिक संचालन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार नहीं थे।
न्यायालय ने अंतरिम राहत पर विचार करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी कोर्सिव (coercive) कार्रवाई नहीं की जाए। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार किया, वहीं राज्य को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश भी न्यायालय ने दिए।
इस मामले में डीएचएल इंफ्राबुल्स के निदेशक अनिरुद्ध देव की ओर से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल एवं जयेश गुरनानी ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता मधुसूदन यादव उपस्थित रहे। न्यायालय ने प्रकरण को शीतकालीन अवकाश के पश्चात सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।
उक्त आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि फिलहाल अनिरुद्ध देव के विरुद्ध किसी भी प्रकार की गिरफ्तारी या अन्य दमनात्मक कार्रवाई पर रोक रहेगी, जब तक कि उच्च न्यायालय में मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती।

