“गरीब नहीं, पेशेवर लाभार्थी: ईडब्ल्यूएस योजना में ‘सीरियल अलॉटी’, थोक निवेश और बिल्डर–खरीदार का खेल”

कल आपने पढ़ा: कैसे 'डबल डिलाइट' और 'डमी सिंडिकेट' के जरिए माफिया ने गरीबों के कोटे में सेंध लगाई। अब पढ़िए, कैसे रसूखदारों ने आरक्षित श्रेणी को अपना 'प्रॉफिट बैंक' बना लिया है।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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EWS-LIG महाघोटाला – भाग 2

डॉ. देवेंद्र मालवीय

Indore News in Hindi। ‘दैनिक सदभावना पाती’ की पड़ताल के दूसरे भाग में आज हम उन चेहरों को बेनकाब कर रहे हैं, जिन्होंने गरीबों के हक की जमीन को ‘शेयर मार्केट’ समझ लिया है। प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर यहाँ ऐसे खेल खेले जा रहे हैं, जहाँ बिल्डर खुद ही खरीदार बन जाता है और रसूखदार निवेश के नाम पर थोक में प्लॉट हथिया लेते हैं।

पैटर्न–3 : ‘सीरियल अलॉटी’ का खेल

गरीब नहीं, पेशेवर लाभार्थी, यह एक बेहद खतरनाक और सुनियोजित पैटर्न है, जिसमें एक ही व्यक्ति बार-बार खुद को ‘गरीब’ साबित कर अलग-अलग कॉलोनियों में आरक्षित (EWS/LIG) भूखंड हासिल करता है, फिर उसे बाजार में बेच देता है और अगली कॉलोनी में दोबारा सरकारी लाभ ले लेता है। यानी गरीबी एक बार की मजबूरी नहीं, बल्कि बार-बार इस्तेमाल होने वाला हथियार बन चुकी है।

उदाहरण–1 : सोनम सोनारे

सोनम सोनारे (पिता/पति – सुनील सोनारे) ने 27 जून 2024 को “संजीवनी” कॉलोनी में EWS-64 भूखंड गरीब बताकर अलॉट करवाया। इसके बाद वही सोनम सोनारे 31 मार्च 2025 को फिर से ‘गरीब’ बनकर “सिंगापुर मॉडर्न सिटी-A” (Singapore Modern City A) कॉलोनी में भूखंड क्रमांक L-04 का दोबारा अलॉटमेंट करवा लेती हैं। यह स्पष्ट करता है कि एक ही व्यक्ति ने दो अलग-अलग कॉलोनियों में दो बार आरक्षित श्रेणी का लाभ उठाया। बाद वाली कालोनी ने बिना जांच किये प्रकरण शासन को भेज दिया।

उदाहरण–2 : विनोद जैतपुरिया

विनोद जैतपुरिया (पिता – मांगीलाल जैतपुरिया) ने 29 अप्रैल 2022 को “श्रीकृष्ण प्रीमियम कॉरिडोर” (Shri Krishna Premium Corridor Indore) कॉलोनी में LIG-10 भूखंड अलॉट करवाया। इसके बाद 11 जनवरी 2024 को पुनः गरीब बनकर “गोल्डन गैलेक्सी” (Golden Galaxy Colony Indore) कॉलोनी में EWS-22 भूखंड फिर से अलॉट करवा लिया। यह मामला भी बताता है कि सरकारी सिस्टम में कहीं न कहीं जानबूझकर आंख मूंदी जा रही है।

स्पष्ट नियम उल्लंघन –

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) 2.0 की धारा 5.1 साफ-साफ कहती है कि— यदि किसी परिवार ने देश में कहीं भी एक बार आवास/भूखंड का सरकारी लाभ ले लिया है, तो वह आजीवन दोबारा इसके लिए अपात्र है। इसके बावजूद ऐसे मामलों का सामने आना सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

पैटर्न 4: धनवानों का ‘थोक निवेश’ – गरीबों के कोटे में अमीरों की सेंध

एक ही कॉलोनी में लाइन से खरीदे थोक प्लॉट्स: यह ‘आरक्षण’ है या ‘इन्वेस्टमेंट’ ?

इस पैटर्न में धनवानों ने एक ही कॉलोनी के अनेकों भूखंडों को खरीद कर ‘थोक निवेश’ किया है। हैरानी की बात है कि जिन भूखंडों के लिए गरीब सालों धक्के खाता है, उन्हें रसूखदार ‘इन्वेस्टमेंट’ के तौर पर देख रहे हैं। सस्ते भाव में आरक्षित प्लॉट खरीदकर भविष्य में ऊंचे दाम पर बेचने का यह खेल इंदौर में धड़ल्ले से जारी है। यहाँ न पात्रता की चिंता है, न नियमों का डर।

खुलासा: कई लोगों ने आरक्षित श्रेणी में बड़ी ख़रीदारी की है उदाहरण –

निवेशक का नाम खरीदे गए प्लॉटों की संख्या कॉलोनी का विवरण
आकांक्षा  09 प्लॉट टी.डी.एस. प्राइड फेस-1 (L-1, L-2, L-3, L-4, L-5, L-6, L-8, L-10, L-11)
अमरजीत  05 प्लॉट अवध वाटिका (LIG-06, 07, 08, 09, 10)
पुनीत कमानी 04 प्लॉट EMAAR CONTINENTAL CITY (4,16,30,31)
प्रियंका  04 प्लॉट तिरुपति पार्क, महू (E-24, E-25, E-26, E-27)
अमित माखीजा 03 प्लॉट सहज ग्रीन्स (EWS-02, 03, 04)
प्रियंक गगरानी 03 प्लॉट मॉडर्न सिटी (LIG-07, 08, 09)

नियम उल्लंघन:

म.प्र. नियम 2014 (नियम 11): यह नियम स्पष्ट करता है कि आवंटन केवल ‘निर्धारित श्रेणी’ के पात्र व्यक्ति के लिए है। धनवानों की यह थोक खरीदी सामाजिक न्याय और आरक्षण के मूल उद्देश्य को ही खत्म करती है।

पैटर्न 5: ‘बिल्डर ही खरीदार’ – जब रक्षक ही बन गया भक्षक!

अपनी ही कॉलोनी में ‘अपनों’ को अलॉट कराए प्लॉट, फिर खुद बन गए मालिक

यह पैटर्न इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है। यहाँ कॉलोनाइजर (बिल्डर) ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि गरीबों के हक की जमीन को हड़पने के लिए ‘शॉर्टकट’ रास्ता अपनाया। बिल्डर ने पहले अपने ही प्रोजेक्ट के आरक्षित प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति (डमी) को अलॉट करवाए और कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लिया।

बड़ा खुलासा: ग्राम सनावदिया की ‘शशि एन्क्लेव’ (Shashi Enclave Colony Indore) कॉलोनी का खेल

भरत बंसल ने अपनी ही कॉलोनी में ‘गरीबों’ के हक पर किस तरह डाका डाला, इसके दो पुख्ता प्रमाण यहाँ हैं:

केस नं. 1 (मात्र 14 दिन का खेल): दिनांक 12/03/2024 को आरक्षित प्लॉट नं. A-76 (LIG) नरेश शुक्ला को अलॉट करवाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि मात्र 14 दिन बाद ही 26/03/2024 को बिल्डर ने इसे अपने नाम करवा लिया।

केस नं. 2 (डमी अलॉटमेंट): दिनांक 12/03/2024 को प्लॉट नं. A-94 (EWS) सौरभ जी को अलॉट हुआ और महज 3 महीने के भीतर 21/06/2024 को यह फिर से बिल्डर के नाम पर दर्ज हो गया।

इतना ही नहीं, इस कॉलोनी और अन्य प्रोजेक्ट्स में भी ऐसे कई प्लॉट बिल्डर से जुड़े करीबियों और परिवार के सदस्यों के नाम पर ट्रांसफर कर दिए गए हैं।

नियम उल्लंघन: सीधे तौर पर ‘हितों का टकराव’

Conflict of Interest: कानून और नैतिकता के आधार पर बिल्डर अपने ही प्रोजेक्ट में गरीबों के लिए छोड़ी गई जमीन का स्वामी नहीं बन सकता।

नियमों की बलि: प्रशासन से सीधे – सदभावना सवाल
आधार कार्ड अनिवार्य, फिर धांधली कैसे? जब हर रजिस्ट्री आधार से लिंक है, तो एक ही व्यक्ति को बार-बार अलॉटमेंट की फाइलें कैसे पास हो गईं?ऐसी रजिस्ट्रियां कैसे हो गई ? कैसे कोई व्यक्ति इन आरक्षित भूखंडों को थोक में खरीद रहा है ? कोई डेवलपर अपने एवं अपने रिश्तेदारों के नाम आरक्षित भूखंड कैसे ले सकता है ? क्या जिम्मेदार अधिकारी और बाबू सिर्फ फाइलों पर आँख बंद कर मुहर लगा रहे हैं? क्या सिस्टम में जानबूझकर ‘लूपहोल’ छोड़े गए हैं?

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।