घटिया सेवा पर उपभोक्ता आयोग सख्त, ‘बॉडी फिट’ कंपनी को 1.75 लाख से अधिक लौटाने के आदेश

सदस्य लालजी तिवारी की निर्णायक भूमिका, आयोग ने माना सेवा में गंभीर कमी

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

Indore News in Hindi। घटिया उत्पाद और उपभोक्ता शिकायतों की अनदेखी करने वाली कंपनियों के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-2, इंदौर ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बॉडी फिट चेयर्स प्रा. लि. (body fit chairs private limited) को दोषी ठहराते हुए उपभोक्ता को न सिर्फ पूरी रकम लौटाने बल्कि ब्याज, मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने के आदेश जारी किए हैं। यह महत्वपूर्ण आदेश अध्यक्ष विकास राय, सदस्य लालजी तिवारी एवं सदस्या श्रीमती सरोज भिसोरे की पीठ द्वारा पारित किया गया। इस प्रकरण में सदस्य लालजी तिवारी (Lal Ji Tiwari) द्वारा तथ्यों, साक्ष्यों और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धाराओं की गहन व्याख्या करते हुए जो निष्कर्ष रखे गए, वही पूरे आदेश की रीढ़ साबित हुए।

क्या है पूरा मामला –

परिवादी दीपक जायसवाल ने कंपनी से 1,60,000 की बॉडी मसाज चेयर खरीदी थी। कंपनी ने लंबी वारंटी और बेहतर सेवा का दावा किया, लेकिन कुछ ही समय में कुर्सी खराब होने लगी। बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो स्थायी मरम्मत की गई और न ही संतोषजनक सेवा दी गई। अंततः उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।

कंपनी रही एकतरफा –

आयोग ने यह भी दर्ज किया कि कार्यवाही के दौरान कंपनी की ओर से कोई ठोस साक्ष्य या जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस कारण कंपनी के दावों पर विश्वास करने का कोई आधार नहीं बचा। सदस्य लालजी तिवारी (Lalji Tiwari) ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट कहा कि— “राशि प्राप्त करने के बावजूद सेवा न देना और उत्पाद को दुरुस्त न करना, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।”आयोग का अंतिम आदेश

आयोग ने कंपनी को निर्देश दिए कि—

उपभोक्ता से प्राप्त 1,60,000 की राशि 45 दिनों के भीतर लौटाई जाए
भुगतान तिथि से अदायगी तक 9% वार्षिक ब्याज दिया जाए
मानसिक क्षति के लिए 10,000
वाद व्यय के रूप में 5,000 अदा किए जाएं

उपभोक्ताओं के लिए संदेश –

यह फैसला न सिर्फ उपभोक्ता अधिकारों की जीत है, बल्कि उन कंपनियों के लिए कड़ा संदेश भी है जो बड़े दावे कर उपभोक्ताओं को भ्रमित करती हैं और बाद में जिम्मेदारी से बचती हैं। सदस्य लालजी तिवारी की सक्रिय और सशक्त भूमिका ने यह स्पष्ट कर दिया कि उपभोक्ता मंच अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वास्तविक न्याय का प्रभावी मंच है।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।