प्लॉट नहीं मिला, सेवा में कमी साबित -लालजी तिवारी

प्लॉट न देने पर जय हिंद गृह निर्माण संस्था पर आयोग का बड़ा आदेश, उपभोक्ता को मिला न्याय

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
4 Min Read

Indore News। प्लॉट आवंटन के नाम पर उपभोक्ता से राशि वसूलने और वर्षों तक प्लॉट नहीं देने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, इंदौर-2 ने जय हिंद गृह निर्माण सहकारी संस्था (Jai Hind Grih Nirman Sanstha) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग की पीठ में सदस्य लाल जी तिवारी (Lalji Tiwari) की निर्णायक भूमिका के चलते उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला आया है। आयोग ने संस्था को आदेश दिया है कि वह परिवादी को जमा की गई राशि 54,700 लौटाए, इस राशि पर 24 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे, साथ ही मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 5,000 तथा वाद व्यय के रूप में 5,000 अतिरिक्त भुगतान करे। यह आदेश 19 जनवरी 2026 को पारित किया गया।

क्या था पूरा विवाद –

परिवादी विजय कुमार मंगल ( Vijay Kumar Mangal) ने उपभोक्ता आयोग में दर्ज शिकायत में बताया कि जय हिंद गृह निर्माण संस्था द्वारा आम्रपाली नगर, इंदौर में प्लॉट क्रमांक 175 (30×50 फीट) आवंटित करने का आश्वासन दिया गया था। संस्था ने अलग–अलग तिथियों पर उनसे लगभग 57,000 की राशि जमा करवाई, लेकिन तय समय पर न तो प्लॉट का कब्जा दिया गया और न ही वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई, परिवादी द्वारा कई बार संपर्क करने के बावजूद संस्था की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिससे वह मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशान होता रहा।

लालजी तिवारी की अहम टिप्पणी –

सुनवाई के दौरान सदस्य लालजी तिवारी (Lal ji Tiwari) ने संस्था द्वारा प्रस्तुत दलीलों और दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से माना कि—“राशि जमा कराने के बाद भी प्लॉट न देना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में गंभीर कमी है।”

लालजी तिवारी (Lalji Tiwari) ने यह भी रेखांकित किया कि उपभोक्ता को लंबे समय तक भ्रमित रखना और उसका पैसा रोके रखना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

संस्था के तर्क आयोग ने किए खारिज –

जय हिंद गृह निर्माण संस्था (Jai Hind Grih Nirman Sanstha Indore) ने दलील दी कि परिवादी इंदौर का स्थायी निवासी नहीं है, इसलिए वह प्लॉट का हकदार नहीं है। लेकिन लालजी तिवारी (Lalji Tiwari) ने संस्था के ही रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट किया कि परिवादी का पता इंदौर दर्ज है और वह संस्था का वैध सदस्य रहा है। इस आधार पर संस्था की आपत्ति को आयोग ने खारिज कर दिया।

45 दिनों में भुगतान अनिवार्य –

आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर जय हिंद गृह निर्माण संस्था को पूरी राशि ब्याज सहित चुकानी होगी। आदेश की प्रति दोनों पक्षों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी तथा आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड की जाएगी।

उपभोक्ताओं के लिए मिसाल –

यह फैसला सहकारी हाउसिंग संस्थाओं द्वारा की जाने वाली मनमानी पर कड़ा संदेश है। उपभोक्ता-हितैषी सख्ती ने यह साबित कर दिया कि यदि दस्तावेज मजबूत हों, तो आम उपभोक्ता भी बड़े संस्थानों के खिलाफ न्याय पा सकता है।

Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।