ग्रहों के महापरिवर्तन का दौर: संघर्ष, अफवाहें और संकट के बीच भारत को संभालेंगे निर्णायक फैसले

मंगल–राहु महादशा, अमावस्या ग्रहण और कुंभ राशि की युति से विश्व व भारत पर गहरा प्रभाव

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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Astrologer Vinod Jain in Indore

ज्योतिषीय विश्लेषण
श्री विनोद जैन (प्रभु), ज्योतिषाचार्य

दैनिक सदभावना पाती

इंदौर। ग्रह-नक्षत्रों में हो रहे बड़े परिवर्तनों के कारण विश्व और भारत एक कठिन, अस्थिर और संघर्षपूर्ण दौर से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आने वाले समय में जहां वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और भ्रम की स्थिति बनी रहेगी, वहीं भारत में प्रधानमंत्री की सूझबूझ और निर्णायक नेतृत्व के कारण देश को अंततः संकट और संघर्ष से बाहर निकालने का मार्ग प्रशस्त होगा।

पड़ोसी देशों में तनाव, युद्ध जैसा माहौल

वर्तमान ग्रह स्थिति के अनुसार भारत के आसपास के देशों—चीन, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका—का माहौल बिगड़ा हुआ रहेगा। सीमाई तनाव, आंतरिक अशांति और युद्ध जैसी परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत की सुरक्षा और कूटनीति पर भी पड़ेगा।

कुंभ राशि की युति और मंगल–राहु अंतर: संघर्ष का मूल कारण

इस समय कुंभ राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की युति बन रही है, जो अमावस्या के ग्रहण से और अधिक प्रभावशाली हो गई है। साथ ही भारत की कुंडली में चल रही मंगल महादशा में मंगल–राहु का अंतर संघर्ष, बाधा, अवरोध, आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव, बीमारियों और विचारों में मतभेद को बढ़ा रहा है। यह योग देश-काल परिस्थितियों को अस्थिर बनाए रखने वाला माना जा रहा है।

डिजिटल अफवाहें और टेक्नोलॉजी से नुकसान का खतरा

राहु, बुध, मंगल और सूर्य के योग से डिजिटल, टेक्नोलॉजी और तकनीकी माध्यमों के दुरुपयोग से गलत सूचना और अफवाहें फैलने का गंभीर खतरा बन रहा है। इससे विश्व स्तर पर हड़कंप, बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव और जनजीवन को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही डिजिटल बैंकिंग सिस्टम में फ्रॉड और साइबर अपराध के मामलों में भी वृद्धि की संभावना दिखाई दे रही है।

फिल्मी और ग्लैमर जगत में खुलासे

राहु और शुक्र के योग से फिल्मी और ग्लैमर इंडस्ट्री में कई बड़े स्कैंडल सामने आने के संकेत भी ग्रह योग में दिखाई दे रहे हैं। इससे मनोरंजन जगत में उथल-पुथल और प्रतिष्ठा से जुड़े विवाद बढ़ सकते हैं।

सट्टा, ओवर-कॉन्फिडेंस और निवेश में भारी नुकसान की आशंका

राहु–बुध के योग के कारण सट्टात्मक गतिविधियों में वृद्धि और गलत विवेक से लिए गए निर्णय भारी आर्थिक नुकसान दे सकते हैं। किसी भी अफवाह के आधार पर शेयर बाजार, सोना-चांदी या अन्य निवेश में अचानक गिरावट से बड़े नुकसान की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। इसलिए धन की रक्षा करना, सोच-समझकर भरोसा करना और विवेकपूर्ण निवेश करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है।

भारत की कुंडली में ग्रह स्थिति और प्रशासनिक दबाव

भारत की कुंडली में द्वितीय भाव में मंगल की महादशा और लग्न भाव में राहु का अंतर चल रहा है। मंगल आद्रा नक्षत्र, मिथुन राशि से होते हुए वर्तमान में मकर राशि में उच्च अवस्था में हैं और 4 मार्च 2026 को विशेष परिवर्तन के संकेत दे रहे हैं। कुंभ राशि में राहु के साथ मंगल का संपर्क, सूर्य ग्रहण और बुध की उपस्थिति प्रशासनिक दबाव, निर्णयों में बाधा और अवरोध का कारण बन सकती है। शनि ग्रह मीन राशि में अपने ही नक्षत्र में विराजमान होकर कर्मों का फल देने की भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री और सरकार पर दबाव, आरोप-प्रत्यारोप का दौर

राहु–बुध योग और सूर्य ग्रहण के प्रभाव से सरकार, विशेषकर प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों को कार्यों में बाधा और विरोध का सामना करना पड़ सकता है। गलत अफवाहों और भ्रम के कारण आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के प्रति गुमराह करने के प्रयास हो सकते हैं, जिससे देश के भीतर विवाद और राजनीतिक दबाव बढ़ेगा।

2026 में राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन संकट

1 अप्रैल 2026 के बाद केतु के अपने नक्षत्र में प्रवेश से राजनीतिक सहयोगियों के बीच मनभेद और मतभेद बढ़ सकते हैं। अचानक विश्वासघात, गठबंधन में दरार और सरकार की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। प्रधानमंत्री के मंगल ग्रह के पीड़ित होने के कारण कुछ समय मौन और संयम की स्थिति भी बन सकती है, वहीं कुछ प्रमुख सहयोगियों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता के योग बन रहे हैं।

कठोर निर्णयों से नियंत्रण और संकट से बाहर निकलने का मार्ग

संघर्षों के बीच संकेत हैं कि 15 अगस्त 2026 के बाद प्रधानमंत्री कुछ कठोर और निर्णायक कदम उठाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे। शक्ति और प्रशासनिक फैसलों के माध्यम से अव्यवस्था को संभालने की कोशिश होगी और दिसंबर 2026 तक धीरे-धीरे संकट से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त होगा। हालांकि इस प्रक्रिया में देश को आर्थिक दबाव और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष: डर का नहीं, समझदारी का समय

कुल मिलाकर यह समय डरने का नहीं, बल्कि समय को समझकर सावधानी, संयम और विवेक के साथ आगे बढ़ने का है। ग्रहों की गणना यही संकेत देती है कि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन सही निर्णय, सूझबूझ और धैर्य से भारत अंततः इस संकट से बाहर निकलेगा।

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