Indore News Hindi। शहर में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने के दावे करने वाला नगर निगम खुद ही इन दावों को ध्वस्त करता दिखाई दे रहा है। ताजा मामला पीटीसी (पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज) परिसर का है, जहां हेलिपैड बनाने के नाम पर निगम का बाग़वानी अमला बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई–छंटाई कर रहा है। परिसर में जगह-जगह गिरे पेड़ों की डालियां साफ संकेत दे रही हैं कि ऑक्सीजन देने वाले हरे-भरे पेड़ जमींदोज़ कर दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब आम नागरिक एक भी पेड़ काटता है तो उस पर भारी जुर्माना ठोंका जाता है, लेकिन नगर निगम का अमला ही खुलेआम पेड़ों की बलि चढ़ा रहा है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि हेलिपैड के लिए पेड़ों की हत्या किसी भी तरह उचित नहीं ठहराई जा सकती। शहर की हरियाली लगातार कम होती जा रही है और गर्मी व प्रदूषण बढ़ रहा है, ऐसे में निगम को संवेदनशील होकर विकल्प तलाशने चाहिए, न कि खुद ही पेड़ काटने वालों की कतार में खड़ा होना चाहिए।
हेलिपैड के नाम पर हरियाली पर कुल्हाड़ी
इधर, इसी दौरान डेली कॉलेज में भी पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया, गेट बनाने के लिए प्रबंधन ने तीन पेड़ काट दिए थे, जिस पर निगम ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज पर 30 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया। सवाल यह है कि जब निजी संस्थान को पेड़ काटने पर दंडित किया जा सकता है, तो नगर निगम को मनमानी करने और हरे-भरे पेड़ों को काटने का अधिकार किसने दे दिया?
नागरिकों का कहना है कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यदि निगम पर्यावरण संरक्षण के लिए जुर्माना वसूलता है, तो उसे स्वयं भी पेड़ काटने से बचना होगा। वरना यह कार्रवाई दोहरे मापदंड और जनता के साथ धोखा मानी जाएगी।