- 17 फरवरी 2026 की भौमवती अमावस्या: संघर्ष का आरंभ
- व्यापार और बाजार: उतार-चढ़ाव का दौर
- राजनीति में उथल-पुथल: केंद्र और राज्यों में बदलाव
- मौसम और स्वास्थ्य: ठंड, बारिश और बीमारियों का असर
- सुरक्षा और जनहानि की आशंका
- राहु–बुध योग: लाभ भी, हानि भी
- सूर्य ग्रहण और उसके प्रभाव
- मंगल–राहु अंतर: राजा और प्रजा में संघर्ष
- अग्नि तत्व और दुर्घटनाओं का योग
- प्रशासन, प्रॉपर्टी और संघर्ष
- कुछ राहत के संकेत भी
- निष्कर्ष
ज्योतिषीय विश्लेषण
श्री विनोद जैन, ज्योतिषाचार्य
इंदौर। ग्रह-नक्षत्रों की वर्तमान स्थिति भारत के लिए एक अत्यंत संवेदनशील और परिवर्तनकारी समय की ओर संकेत कर रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार भारत का वृषभ लग्न है और भारत का मंगल द्वितीय भाव में विराजमान है। वर्तमान में मकर लग्न मैं मंगल ग्रह श्रवण नक्षत्र में स्थित हैं और अमावस्या को (मंगल) धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।
अरिष्ट अनिष्ट का प्रभाव एक माह तक बना रहेगा।
17 फरवरी 2026 की भौमवती अमावस्या: संघर्ष का आरंभ
17 फरवरी 2026 की अमावस्या को ग्रहों की चाल में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। इस समय भारत की महादशा में मंगल ग्रह में मंगल के अंतर मैं राहु का अंतर चल रहा है। इस योग के कारण देश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में किसी न किसी प्रकार की समस्या या घटना का संकेत बन रहा है। वहीं भारत के पश्चिम और दक्षिणी हिस्सों में प्राकृतिक घटनाओं और मौसम से जुड़ी उथल-पुथल की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
विश्व मैं, भूकंप, सुनामी, जैसी घटना भी देखी जा सकती है।
व्यापार और बाजार: उतार-चढ़ाव का दौर
इस अवधि में व्यापार जगत के लगभग सभी क्षेत्रों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। शेयर बाजार अपनी गति से कभी नीचे तो कभी ऊपर की ओर तेज रफ्तार से बढ़ता दिखाई देगा। सोना और चांदी अपनी तेजी को मेंटेन करते हुए आगे बढ़ेंगे, जबकि क्रूड ऑयल में भी तेजी का माहौल बनता दिख रहा है।
यह अमावस्या भारत के लिए आंतरिक संघर्ष वाला समय दर्शा रही है।
राजनीति में उथल-पुथल: केंद्र और राज्यों में बदलाव
राजनीतिक स्तर पर यह समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहेगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच मतभेद और टकराव की स्थितियां बनेंगी। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में बड़े परिवर्तन के संकेत हैं, वहीं राज्य सरकारों में भी मंत्रिमंडलीय बदलाव की संभावनाएं प्रबल होती दिखाई दे रही हैं।
मौसम और स्वास्थ्य: ठंड, बारिश और बीमारियों का असर
मौसम के स्तर पर ठंड का प्रकोप बढ़ेगा, साथ ही अचानक बारिश की भी संभावना रहेगी। इसके कारण लोगों में हाथ-पैर दर्द, सिरदर्द और मौसमी बीमारियों का प्रभाव बढ़ सकता है। जनजीवन पर मौसम का सीधा असर देखने को मिलेगा।
सुरक्षा और जनहानि की आशंका
आसपास के देशों का माहौल भी अनुकूल नहीं रहेगा। विश्व स्तर पर युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रभाव भारत पर भी पड़ सकते हैं। इस अमावस्या के आसपास भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भगदड़, दुर्घटना, अग्निकांड और हिंसा जैसी घटनाओं से जनहानि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक अस्थिरता बनी रहेगी और विशेष रूप से विश्व मैं मुस्लिम देशों में पीड़ा और आर्थिक संकट गहराने के संकेत हैं। इस समय मध्यम और निम्न वर्ग पर आर्थिक दबाव अधिक रहेगा।
राहु–बुध योग: लाभ भी, हानि भी
कुंभ राशि में राहु के साथ बुध ग्रह का योग बन रहा है। यह योग तेज बुद्धि और विचारों की गति तो देता है, लेकिन साथ ही भ्रम और गलत निर्णय की संभावना भी बढ़ाता है। राहु–बुध के प्रभाव से ओवर-कॉन्फिडेंस और मिसगाइडेंस के कारण कई लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सूर्य ग्रहण और उसके प्रभाव
17 फरवरी 2026 को अमावस्या पर सूर्य ग्रहण है। इस दिन सूर्य, राहु, बुध और शुक्र कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे। यह ग्रहण देश-काल परिस्थितियों पर गहरा प्रभाव डालेगा। इसके परिणामस्वरूप भारी बारिश, भूकंप, तूफान, सुनामी जैसी प्राकृतिक घटनाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ग्रहण से पहले और बाद की अवधि में इसके प्रभाव और अधिक तीव्र हो सकते हैं।
मंगल–राहु अंतर: राजा और प्रजा में संघर्ष
भारत की महादशा में चल रहा मंगल–राहु का अंतर राजा और प्रजा के बीच संघर्ष का संकेत दे रहा है। सूर्य ग्रहण के कारण शासन को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार में बड़े उतार-चढ़ाव रहेंगे और सोना, चांदी, तांबा, लोहा जैसी धातुओं के भावों में तेज परिवर्तन देखने को मिलेंगे। बुध के वक्री होने पर पैसे और लिक्विडिटी की कमी बाजार में बनी रह सकती है।
अग्नि तत्व और दुर्घटनाओं का योग
इस समय अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक रहेगा। भारत के पूर्व और उत्तर-पूर्वी कोनों में किसी बड़ी घटना का संकेत दिखाई दे रहा है। रेलवे, विमानन, फैक्ट्रियों या अन्य स्थानों पर आगजनी जैसी घटनाओं से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
प्रशासन, प्रॉपर्टी और संघर्ष
मंगल ग्रह प्रशासन, प्रॉपर्टी और विवाद का कारक है। इसके प्रभाव से केंद्र और राज्य सरकारों में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव, मंत्रालयों और विभागों में पुनर्गठन के संकेत हैं। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में भी सरकार द्वारा कुछ बड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। वहीं युद्ध, लड़ाई-झगड़े और विवादों का वातावरण अभी अनुकूल नहीं कहा जा सकता।
देश के प्रधानमंत्री /ग्रहमंत्री जी के स्वास्थ्य कमजोर या ठीक नहीं रहेगा…..
कुछ राहत के संकेत भी
कुंभ राशि में शुक्र, सूर्य, राहु और बुध का साथ होना आम जनता को कुछ स्तर पर सुख-सुविधा और राहत भी देगा। हालांकि यह राहत सीमित होगी और विवेक से काम लेना आवश्यक रहेगा।
सावधानी और आध्यात्मिक उपाय
अरिष्ट और अनिष्ट से बचाव के लिए विशेष सावधानी आवश्यक है। अग्नि से बचाव, धैर्य और संयम बनाए रखना जरूरी होगा। इस नकारात्मक समय में श्री हनुमान जी की पूजा, पाठ और प्रार्थना करने से मानसिक बल और संकट से राहत मिलने के संकेत हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर यह समय भारत के लिए संघर्ष, परिवर्तन और परीक्षा का काल है। जो लोग संयम, विवेक और सावधानी के साथ आगे बढ़ेंगे, वही इस चुनौतीपूर्ण दौर को सुरक्षित और सकारात्मक रूप से पार कर पाएंगे।

