चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का खौफनाक प्लान; भारत समेत दुनिया भर के देशों की नजर

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जिनपिंग के चीन का सर्वशक्तिमान नेता बनने के पीछे वही विस्तारवाद वाला खेल है, जो माओ के वारिसों को विरासत मे मिला है. पिछले दो साल के दौरान हमारी सरहद से लेकर दुनिया के दीगर मुल्कों में चीन जिस तरह से घुसपैठ की साजिश करता रहा है.

 

70 साल से चीन की सत्ता पर काबिज चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव, 10 साल से चीन के राष्ट्रपति, चीन की फौज के कमांडर इन चीफ शी जिनपिंग अब से चंद घंटे बाद ताउम्र चीन के राष्ट्रपति घोषित हो जाएंगे क्योंकि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी एक प्रस्ताव पर मुहर लगाने जा रही है. 1921 में कम्युनिस्ट पार्टी के बनने के बाद से ये तीसरी बार है जब इस तरह का रिजॉल्यूशन तैयार किया गया है. भारत समेत दुनिया भर के देशों की इस पर नजर है. पूरी दुनिया जिनपिंग के इस खौफनाक प्लान से खौफजदा हैं क्यों, देखिए ये रिपोर्ट…

शी जिनपिंग चीनियों के लिए सिर्फ नाम ही काफी है क्योंकि ये यही नाम है जिसने हमेशा हमेशा के लिए बीजिंग की गद्दी अपने नाम करने की तैयारी कर ली है क्योंकि आज से 11 नवंबर के बीच सीपीसी की मीटिंग में ऐतिहासिक दस्तावेज पेश होगा, जिसमें जिनपिंग को हमेशा के लिए चीन का राष्ट्रपति बनने का रोडमैप रखा जाएगा.

जिनपिंग 10 साल से चीन के राष्ट्रपति हैं. दो बार लगातार राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं. अब तीसरी बार हमेशा के लिए बीजिंग की सत्ता जिनपिंग के नाम होने वाली है. दरअसल चीन के इतिहास में जिनपिंग कम्यूनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे ताकतवर नेता हैं. 2018 में जिनपिंग पहले ही चीन की सभी पावरफुल पदों पर काबिज हो चुके हैं, ऐसे में विस्तारवादी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा चरम है और इसी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा को अमली जामा पहनाने के लिए बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ चाइना में मीटिंग चल रही है.

जिनपिंग के चीन का सर्वशक्तिमान बनने के पीछे विस्तारवादी खेल

बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ चाइना में चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस का सालाना जलसा चल रहा है. इसी आलीशान हॉल से जिनपिंग की तानाशही अनंतकाल के लिए तय होने वाला है. अगले तीन दिनों में ये होगा कैसे इसे भी समझिए. चीन में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस 1982 में बनाई गई. इसमें 3 हजार से ज्यादा सदस्य होते हैं, जिनमें चीन के प्रांतों के नेता और फौज के जनरल शामिल होते हैं.

इतना समझ लीजिए कि चीन की डेढ़ अरब आबादी के लिए यही सरकार है. यही सबकुछ है. कहने को तो बीजिंग के इस हॉल में तीन हजार प्रतिनिधि हैं, लेकिन जिनपिंग के आगे इनकी हैसियत रबर स्टाम्प से ज्यादा नहीं है. इसी ठप्पे की बदौलत जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति की गद्दी पहले ही हथिया चुके हैं. अब एक बार फिर इसके जरिए महत्वाकांक्षा पर मुहर लगवाने वाले हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि माओ से ज्यादा ताकतवर बन कर जिनपिंग क्या हासिल करना चाहते हैं.

जिनपिंग के चीन का सर्वशक्तिमान नेता बनने के पीछे वही विस्तारवाद वाला खेल है जो माओ के वारिसों को विरासत मे मिला है. पिछले दो साल के दौरान हमारी सरहद से लेकर दुनिया के दीगर मुल्कों में चीन जिस तरह से घुसपैठ की साजिश करता रहा है, उसी से जिनपिंग की मंशा का अंदाजा हो जाता है, लेकिन एक रिपोर्ट से जिनपिंग की और बड़ी विस्तारवादी साजिश का खुलासा होता है.

‘चीन पूरे साउथ चाइना सी पर कब्जा जमा लेगा’

140 पेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन 2025 तक ताइवान पर कब्जा कर लेगा. 2030 तक वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को हराकर चीन पूरे साउथ चाइना सी पर कब्जा जमा लेगा. इसके बाद 2040 में चीन अरुणाचल प्रदेश पर हमला कर सकता है. इतना ही नहीं 2045 तक चीन सेनकाकुस द्वीप से जापान को हटाकर अपना लाल झंडा लहराएगा. इसके बाद मंगोलिया पर हमला करके उसे चीनी इनर मंगोलिया का हिस्सा बना देगा. मंगोलिया पर कब्जा करने के बाद चीन, रूस पर 2060 में हमला करेगा और कथित तौर पर रूस के कंट्रोल वाले इलाकों को चीन में मिलाएगा.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि चीन जापान और रूस के सैनिकों को हराने में सक्षम रहेगी. जाहिर है ड्रैगन ने पड़ोसियों की जमीन निगलने के लिए साजिश का पूरा ताना-बाना तैयार कर लिया है, जिसे अंजाम देने की जिम्मेदारी जिनपिंग को दे दी गई है. लिहाजा शी जिनपिंग को तीसरी बार सत्ता में लाने पर मुहर लगाई जाएगी.

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