वर्तमान में आईएएस वरदमूर्ति मिश्रा खनिज निगम में कार्यकारी निदेशक के तौर पर काम कर रहे थे. मिश्रा 2014 बैच के आईएएस अधिकारी थे. लंबी लड़ाई के बाद मिश्रा को करीब दो महीने पहले ही आईएएस अवार्ड हुआ था. इससे पहले वे राज्य प्रशासनिक सेवा (एसएएस) के अधिकारी थे. वर्ष 1996 में राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयनित होकर डिप्टी कलेक्टर बने थे. उनकी छवि पब्लिक के बीच में जाकर काम करने की थी. मध्यप्रदेश के जिन इलाकों में मिश्रा पदस्थ रहे, वहां पब्लिक को उनसे मिलने में कोई परेशानी नहीं आती थी.
इस्तीफे के साथ तीन महीने का वेतन भी जमा कराया
आईएसएस वरदमूर्ति मिश्रा ने इस्तीफा देने के साथ ही तीन महीने का वेतन भी जमा करा दिया था. उनके अचानक इस्तीफा देने से चर्चाओं की बाजार गर्म हो गया है. इस बात की भी चर्चा है कि वे किसी पार्टी ज्वॉइन करने के बजाए खुद की पार्टी का गठन कर सकते हैं. या फिर पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक मिश्रा ने इस्तीफा बुधवार शाम मुख्य सचिव कार्यालय को भेज दिया है. उनके इस्तीफे से मंत्रालय में हड़कंप की स्थिति बन गई है.
कमलनाथ के करीबी थे मिश्रा
माना जाता है कि कांग्रेस सरकार में आईएएस मिश्रा मुख्यमंत्री कमलनाथ के बहुत करीब थे. इसी वजह से उन्हें नाथ ने अपना ओएसडी बनाया था. बाद में नाथ ने छिंदवाड़ा में यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी, जहां मिश्रा को बतौर रजिस्ट्रार नियुक्ति दी गई थी. भाजपा सरकार में वे वापस भोपाल आ गए थे.


