देवास जिले के जंगलों में भी सक्रिय हैं शिकारी, पिछले साल वनरक्षक की हुई थी हत्या

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sadbhawnapaati
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गुना में शिकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद से अब सरकार सख्त कदम उठा रही है। सीएम बैठकें लेकर अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं। मगर शिकारी सिर्फ गुना ही नहीं बल्कि देवास जिले में भी सक्रिय हैं। इंदौर, सीहोर, हरदा, खंडवा, खरगोन आदि जिलों के शिकारियों की सक्रियता का पूर्व में खुलासा हो चुका है तो स्थानीय शिकारी भी सक्रिय रहते हैं। वन विभाग अब चौकसी बरत रहा है।

दरअसल देवास जिले में सघन  वन क्षेत्र है। बीते करीब एक माह में शिकार से जुड़े तीन मामले सामने आए हैं जिनमें एक नीलगाय, हिरण का शिकार किया गया। वहीं एक जगह शिकार के दौरान किसान पर शिकारियों द्वारा गोली चलाई गई।

कुछ साल पहले डबलचौकी से उदयनगर की ओर जाने वाले रास्ते पर बाघ का शव संदिग्ध हालत में मिला था जिसके दांत, नाखून आदि गायब थे। पिछले साल नवंबर में उदयनगर क्षेत्र में तेंदुए के शिकार की घटना सामने आई थी जिसमें इंदौर की पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा था।
जिले में हिरण, नीलगाय आदि जंगली जानवरों के शिकार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इस दौरान गोली, तीर, करंट का उपयोग होता है। उदयनगर, पीपरी, पुंजापुरा, बागली, कांटाफोड़, सतवास, कन्नौद, हरणगांव, खातेगांव क्षेत्र के जंगलों में शिकारियों की सक्रियता अधिक बनी रहती है।
गर्मी के सीजन में शिकारियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने तालाब, झील सहित अन्य जल स्रोतों के आसपास निगरानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही गश्ती और बढ़ाने की तैयारी है। शिकार की घटनाओं के मामले में वनमंडलाधिकारी पीएन मिश्रा का कहना है कि शिकारियों की सक्रियता का कोई विशेष क्षेत्र नहीं होता, विशेष रणनीति से ही इन पर अंकुश लगाया जा सकता है।
हमने गुप्तचरों को सक्रिय किया है। तेज गर्मी में जानवर पानी पीने के लिए जलस्रोतों पर पहुंचते हैं, यहां पर विशेष नजर रखी जा रही है। जिले में शिकारियों का कोई नेटवर्क सक्रिय नहीं है

पिछले साल हुई थी वनरक्षक की हत्या

पिछले साल फरवरी माह में देवास जिले में पुंजापुरा क्षेत्र के जंगल में वनरक्षक मदनलाल वर्मा की शिकारियों की हत्या कर दी थी। शिकारी एक जलस्रोत के समीप एकत्रित थे। वनरक्षक ने बाइक चलाते हुए उनको ललकारा था, इसी दौरान एक ने  बंदूक से फायर कर दिया था जिससे वर्मा की मौत हो गई थी।
मामले में स्थानीय शिकारियों को उदयनगर पुलिस ने पकड़ा था। इसी तरह सतवास क्षेत्र में कन्नौद व अन्य जगह के शिकारियों ने नीलगाय का शिकार किया था। जंगल से लौटते समय इनको सतवास पुलिस ने नीलगाय के मांस, बंदूक सहित गिरप्तार किया था। बागली रेंज के तहत तीर से हिरण का शिकार किया गया था।
इसमें स्थानीय शिकारियों के शामिल होने की बात सामने आई थी। खातेगांव क्षेत्र के गांव करोंदमाफी में नसरुल्लागंज के शिकारियों ने बंदूक से हिरण का शिकार करने का प्रयास किया था, इस दौरान एक किसान पर गोली चलाई गई थी, जिसमें किसान बाल-बाल बचा था।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।