‘खुलासा’ पर खुन्नस क्यों ?
Indore News. पुलिस, प्रशासन, और नगर निगम ने संयुक्त कार्रवाई कर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, एबी रोड के सामने 9 दिन से चल रहे अंखड खिचड़ी भंडारे को ‘ध्वस्त’ कर दिया। करीब 100 अधिकारी, कर्मचारियों की टीम इस ‘विध्वंस’ के लिए मौके पर पहुंची।
ऐसा दमखम हर जगह दिखे
प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया जा सकता है क्योंकि सड़क किनारे भंडारा चल रहा था जिससे संभव है कुछ वाहन चालकों को परेशानी हुई होगा। लेकिन, मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन ऐसा दमखम हर जगह क्यों नहीं दिखा पाया? माननीय मुख्यमंत्री की विधानसभा सीट बुधनी ओर होशंगाबाद से लेकर सीहोर जिले की रेहटी तहसील में सलकनपुर वाली माता का दरबार है। खातेगांव ,कन्नौद से लेकर हरदा नसरुल्लागंज से हजारों लोग पैदल सलकनपुर माता दरबार मे लगातार हजारों की तादाद में पहुँच रहे है ।श्रद्धालुओं के लिए जगह -जगह खिचड़ी प्रसादी का आयोजन हो रहा है जिसमे सैंकड़ों लोग खिचड़ी प्रसादी का प्रसाद पा रहे है, प्रदेश के अन्य जगहों पर भी ऐसे हजारों आयोजन हुए है |
ऐसा दमखम हर जगह दिखे
प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया जा सकता है क्योंकि सड़क किनारे भंडारा चल रहा था जिससे संभव है कुछ वाहन चालकों को परेशानी हुई होगा। लेकिन, मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन ऐसा दमखम हर जगह क्यों नहीं दिखा पाया? माननीय मुख्यमंत्री की विधानसभा सीट बुधनी ओर होशंगाबाद से लेकर सीहोर जिले की रेहटी तहसील में सलकनपुर वाली माता का दरबार है। खातेगांव ,कन्नौद से लेकर हरदा नसरुल्लागंज से हजारों लोग पैदल सलकनपुर माता दरबार मे लगातार हजारों की तादाद में पहुँच रहे है ।श्रद्धालुओं के लिए जगह -जगह खिचड़ी प्रसादी का आयोजन हो रहा है जिसमे सैंकड़ों लोग खिचड़ी प्रसादी का प्रसाद पा रहे है, प्रदेश के अन्य जगहों पर भी ऐसे हजारों आयोजन हुए है |
214 घंटे क्यों नहीं जागे जिम्मेदार?
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। लोगों का कहना है कि यह भंडारा 9 दिन से 24 घंटे चल रहा था। कमजोर वर्ग के कई लोगों की पेट पूजा हो रही थी। करीब 214 घंटे बीत चुके थे। महज 2 घंटे शेष थे। ऐसे में ताबड़तोड़ कार्रवाई का औचित्य समझ से परे है।
500 से अधिक जगह अतिक्रमण
नवरात्रि में शहर के विभिन्न इलाकों में 500 से अधिक स्थानों पर सड़कों को रोक कर गरबे और भंडारे चल रहे हैं। किसी जिम्मेदार अधिकारी ने एक जगह भी कार्रवाई नहीं की। भले ही वाहन चालक गलियों में भटकते रहे। सिर्फ यहीं अचानक की गई कार्रवाई पर सवाल उठना लाजमी है।
धर्म पर कर्म भारी हो गया
संभव है खिचड़ी भंडारे के इस धार्मिक प्रयोजन की अनुमति आयोजकों के पास नहीं होगी। लेकिन ऐसा तो सैकड़ों जगहों पर है? अब भी कई जगहों पर भीड़भाड़ देखी जा सकती है। क्या प्रशासन को अपना कर्म निभाने का यही मौका मिला? यानी प्रशासन ने एक बार फिर दिखा दिया कि धर्म से ऊपर कर्म है। जैसे बाबरी विध्वंस के समय निहत्थे कारसेवकों पर जोर दिखाया था।
नोटिस भी नहीं दिया
प्रशासन का कायदा है कि कहीं भी कार्रवाई के पहले संबंधित पक्ष को नोटिस दिया जाता है। बताते हैं इस मामले में ऐसी कोई औपचारिकता नहीं निभाई गई। यदि सूचना दी होती तो शायद 2 घंटे के लिए बातचीत से समाधान निकल सकता था। वैसे भी वॉलिंटियर व्यवस्था देख ही रहे थे।
खबर का असर तो नहीं?
मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह भंडारा किसी अखबार (खुलासा फर्स्ट) द्वारा आयोजित था। इस अखबार ने प्रशासन या नगर निगम के खिलाफ कोई खबर लिखी होगी इसलिए अचानक खुन्नस निकाली गई। यदि यह सच है तो मीडिया के लिए बुरी खबर है। आज खुलासा तो कोई और रडार पर होगा।
वजह राम जाने, हमें तो बुरा लगा
कई लोगों को पता नहीं था कि भंडारा खत्म करा दिया गया है। वे रोज की तरह प्रसादी लेने पहुंचे तो पता चला कि सब उजाड़ हो चुका है। उनका कहना है कि ऐसा क्यों हुआ यह तो राम जाने लेकिन हमें बुरा लगा। भंडारा कुछ देर और चल जाता क्या फर्क पड़ता?
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। लोगों का कहना है कि यह भंडारा 9 दिन से 24 घंटे चल रहा था। कमजोर वर्ग के कई लोगों की पेट पूजा हो रही थी। करीब 214 घंटे बीत चुके थे। महज 2 घंटे शेष थे। ऐसे में ताबड़तोड़ कार्रवाई का औचित्य समझ से परे है।
500 से अधिक जगह अतिक्रमण
नवरात्रि में शहर के विभिन्न इलाकों में 500 से अधिक स्थानों पर सड़कों को रोक कर गरबे और भंडारे चल रहे हैं। किसी जिम्मेदार अधिकारी ने एक जगह भी कार्रवाई नहीं की। भले ही वाहन चालक गलियों में भटकते रहे। सिर्फ यहीं अचानक की गई कार्रवाई पर सवाल उठना लाजमी है।
धर्म पर कर्म भारी हो गया
संभव है खिचड़ी भंडारे के इस धार्मिक प्रयोजन की अनुमति आयोजकों के पास नहीं होगी। लेकिन ऐसा तो सैकड़ों जगहों पर है? अब भी कई जगहों पर भीड़भाड़ देखी जा सकती है। क्या प्रशासन को अपना कर्म निभाने का यही मौका मिला? यानी प्रशासन ने एक बार फिर दिखा दिया कि धर्म से ऊपर कर्म है। जैसे बाबरी विध्वंस के समय निहत्थे कारसेवकों पर जोर दिखाया था।
नोटिस भी नहीं दिया
प्रशासन का कायदा है कि कहीं भी कार्रवाई के पहले संबंधित पक्ष को नोटिस दिया जाता है। बताते हैं इस मामले में ऐसी कोई औपचारिकता नहीं निभाई गई। यदि सूचना दी होती तो शायद 2 घंटे के लिए बातचीत से समाधान निकल सकता था। वैसे भी वॉलिंटियर व्यवस्था देख ही रहे थे।
खबर का असर तो नहीं?
मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यह भंडारा किसी अखबार (खुलासा फर्स्ट) द्वारा आयोजित था। इस अखबार ने प्रशासन या नगर निगम के खिलाफ कोई खबर लिखी होगी इसलिए अचानक खुन्नस निकाली गई। यदि यह सच है तो मीडिया के लिए बुरी खबर है। आज खुलासा तो कोई और रडार पर होगा।
वजह राम जाने, हमें तो बुरा लगा
कई लोगों को पता नहीं था कि भंडारा खत्म करा दिया गया है। वे रोज की तरह प्रसादी लेने पहुंचे तो पता चला कि सब उजाड़ हो चुका है। उनका कहना है कि ऐसा क्यों हुआ यह तो राम जाने लेकिन हमें बुरा लगा। भंडारा कुछ देर और चल जाता क्या फर्क पड़ता?


