Indore News: कथावाचक प्रदीप मिश्रा के ऐलान से शहर में मची गुलाब के फूल खरीदने की होड़, 10 गुना बढ़े दाम

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Indore News। शुक्रवार को शहर में गुलाब के फूल खरीदने की होड़ सी मच गई। खरीदारों की भीड़ जुटी तो दोपहर तक फूलों की दुकानों पर गुलाब के फूल भी खत्म हो गए। इसके बाद भी लोगों ने कई किलोमीटर का रास्ता सिर्फ गुलाब की तलाश में नाप दिया। एकाएक बढ़ी मांग का फायदा उठाकर दुकानदारों ने 21 गुलाबों के दाम 101 रुपये तय कर दिए। बताया जाता है गुलाब के फूलों की यह मारामारी कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के एलान के बाद मची।

देेवी अहिल्याबाई होलकर थोक फूल मंडी में 24 घंटे के भीतर गुलाब के दाम 10 गुना तक बढ़ गए। अचानक बढ़े दामों पर भी मंडी में आया सारा माल बिक गया। शुक्रवार को थोक मंडी में गुलाब की मांग से थोक कारोबारी भी हैरान रह गए। थोक कारोबारी अजय कुसुमाकर के अनुसार गुरुवार को गुलाब 30 से 40 रुपये किलो तक बिक रहा था। बहुत अच्छी क्वालिटी का फूल भी 50 रुपये किलो तक बिका था। शुक्रवार को अचानक मांग बढ़ी तो भाव 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए।

थोक कारोबारी राकेश गोयल के अनुसार 500 रुपये पर भी गुलाब नहीं रुका और दोपहर तक बचा माल 600 रुपये किलो में भी तोला गया। गुलाब के भाव में बारिश में कभी ऐसी तेजी नहीं देखी। आमतौर पर गरमी में आवक कमजोर पड़ने या नवरात्रि या दीपावली जैसे खास त्योहारों पर ही गुलाब व अन्य फूलों के दाम इतने ऊपर जाते हैं। यह पहला मौका है जब बारिश में गुलाब की ऐसी मांग दिखी।

थोक व्यापारी कह रहे हैं सावन के सोमवार भी निकल गए, लेकिन गुलाब की ऐसी मांग और दाम नहीं बढ़े। शुक्रवार को मंडी में फूलों की आवक भी अच्छी रही। थोक मंडी में आठ से 10 टन गुलाब आया। दामों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के बाद भी पूरा माल बिक गया। अन्य फूलों के दाम सामान्य रहे। पांच रुपये की तेजी के साथ गेंदा 50 से 60 रुपये किलो और रजनीगंधा 160 रुपये किलो बिका।

कथा वाचक के आयोजन का असर

गुलाब की मांग और दाम में आए उछाल की वजह सीहोर के कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के आयोजन को माना जा रहा है। उन्होंने शुक्रवार शाम पार्थिव शिवलिंग के निर्माण व अभिषेक के पूजन का आयोजन किया। उनकी कथा का टीवी पर सीधा प्रसारण होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से घर बैठे ही टीवी पर देखकर अभिषेक-पूजन का एलान किया था। इसके लिए मिट्टी से लेकर साबुत चावल, काली मिर्च, गेहूं के दानों के साथ 21 गुलाब के फूल जुटाकर रखने के लिए कहा था। नतीजा हुआ कि शाम को अभिषेक-पूजन के लिए लोग फूल से बिल्वपत्र तक जुटाने बाजारों में उमड़ पड़े।

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