प्रदीप मिश्रा मामले पर बोले, इज्तिमा तो कभी रोकना नहीं पड़ा, रुद्राक्ष महोत्सव क्यों रोका?
इंदौर | राजधानी भोपाल के पास स्थित सीहोर में सोमवार को रुद्राक्ष महोत्सव स्थगित करने का मामला गरमाता ही जा रहा है।
कमलनाथ के घटना को शर्मनाक बताने के बाद अब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिख कर सीहोर प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कैलाश विजयवर्गीय ने शिवराज को लिखे पत्र में कहा है कि सोमवार की घटना से अत्यंत पीड़ा और वेदना पहुंची है। सीहोर प्रशासन की अकर्मण्यता से मेरे जैसे कई सनातनियों को आघात पहुंचा है।

उन्होंने लिखा कि 17 साल से आप इस प्रांत के मुखिया है। आखिर ऐसी कौन सी विपदा आ गई थी कि पंडित प्रदीप मिश्रा पर इतना दबाव बनाया गया कि उन्हें भारी मन से कथा को समाप्त करना पड़ा।
विजयवर्गीय में सीएम से कहा कि आदरणीय भाेपाल में इज्तिमा का आयोजन होता है। जिसमें लाखों लोग शामिल होते है। कई मंत्रियों को जाम में फंसना भी पड़ता है।
लेकिन ऐसा कभी सुनाई नहीं दिया कि इज्तिमा रोक दिया गया हो। क्या सीहोर का प्रशासन इतना नाकारा था कि इस आयोजन की सूचना होने के बावजूद व्यवस्था जुटाई नहीं जा सकी?
क्या जिम्मेदार अधिकारी इतने अदूरदर्शी थे कि वो भांप नहीं सके कि 11 लाख रुद्राक्ष का अनुष्ठान है तो श्रद्धालुओं की आवाजही भी रहेगी? क्या सीहोर के प्रशासनिक अमले की इतनी हिम्मत है कि वो इतना बड़ा निर्णय कर ले?
कैलाश ने कहा कि भगवान शिव ने जैसे विषपान किया वैसे हम भी कर लेंगे। किंतु शिवरात्रि के महापर्व पर देश भर से आए शिव भक्तों की क्या गलती थी गलती तो शुद्ध रूप से सीहोर प्रशासन की है।
सीहोर प्रशासन को जाकर प्रदीप मिश्रा से माफी मांगना चाहिए और कथा पुन: प्रारंभ होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की।
बता दें शिव महापुराण और रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियां सीहोर में चितावलिया हेमा गांव में पिछले 15 दिनों से चल रही थी। सोमवार सुबह पंडित प्रदीप मिश्रा ने आयोजन की शुरुआत की।
सुबह से ही हजारों लोगों का पंडाल पहुंचना शुरू हो गया। भीड़ इस कदर उमड़ी की दोपहर होते-होते भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे के दोनों ओर 40 किमी तक जाम लग गया।
हालात ऐसे बन गए कि पैदल चलने वालों तक का हाईवे से गुजरना मुश्किल हो गया। इसमें प्रदेश के मंत्रियों के फंसने की भी चर्चा चली। सीहोर-आष्टा और आसपास के सभी होटल, धर्मशाला फुल थे।
दोपहर तक ही ढाई लाख भक्त यहां पहुंच चुके थे और श्रद्धालुओं का कारवां नहीं थम रहा था। अफरा-तफरी की स्थिति को देख पं. प्रदीप मिश्रा भावुक हो गए।
उन्होंने कहा कि ऊपर से बार-बार दबाव आ रहा है, इसलिए कथा स्थगित कर रहा हूं। आपसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि अपने घर जाकर ऑनलाइन माध्यम से ही कथा सुनें। हालांकि प्रशासन का कहना है कि कथा स्थगित करने के लिए कोई दबाव नहीं डाला गया।


