Indore News. विकास प्राधिकरण द्वारा तकरीबन 39 करोड़ की लागत से पिपलियापाला को रीजनल पार्क के रूप में तब्दील करते हुए वर्ष 2010-11 में नगर निगम को सौंप दिया। अब निगम इसका रखरखाव नहीं कर पा रहा है बल्कि खर्च भी बराबर नहीं होने से परेशानी बनी हुई है ।
मेयर इन काउंसिल में संकल्प क्रमांक 13 के तहत तय हुआ कि इसे निजी हाथों में सौंपा जा सकता है जिसके लिए टैंडर भी जारी कर दिए और कंपनियों से चर्चा भी की जा रही थी। सालाना 80 से 85 लाख रुपए तो मात्र कर्मचारियों के वेतन में ही खर्च होता है जबकि आमदनी बेहद कम होती है। वही रीजनल पार्क में जो सुविधाएं देना थी वह भी नगर निगम नहीं दे पाया है। यहां पर सैर सपाटे के लिए आने वालों के लिए 25 टिकट रखा तो बच्चों के लिए 10 का टिकट है लेकिन बच्चों के लिए मनोरंजन पार्क की योजना के साथ-साथ रेस्टोरेंट, अप्पू घर, भोजनालय से लेकर नगर निगम यहां पर कोई बेहतर व्यवस्था नहीं कर पाया जिसके चलते नगर निगम के बूते की बात नहीं रही है ।



