MP News – राज्य सरकार बिना केंद्र की सहमति के भी पुरानी पेंशन योजना लागू कर सकती है : परमार

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sadbhawnapaati
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इंदौर- मध्य प्रदेश शासकीय अध्यापक संगठन के प्रदेश प्रवक्ता एवं पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के जिलाध्यक्ष दिनेश परमार ने कहा कि कोई भी राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए स्वतंत्र है ,वह केन्द्र सरकार की सहमति या असहमति के बिना भी इसे लागू कर सकती है क्योंकि पेंशन पर होने वाला खर्च उसे राज्य की संचित निधि से देना होता है !!

श्री परमार ने बताया कि संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची के विषयों में 42 वें स्थान पर राज्य की पेंशन अर्थात राज्य द्वारा या राज्य की संचित निधि में से संदाय पेंशन का उल्लेख किया गया है ! इसके अंतर्गत राज्य द्वारा अपने कार्मिकों को पेंशन देना राज्य सूची का अपना विषय है जिसमें केन्द्र सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है !!

उल्लेखनीय हैं कि 22 दिसंबर 2003 को जारी नई पेंशन प्रणाली हेतु केन्द्र सरकार के संकल्प में यह प्रावधान किया गया था कि राज्य के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था होगी कि वे जब चाहे नई योजना को अपना सकते है ! इसके अतिरिक्त नई पेंशन योजना से संबंधित किसी भी अधिसूचना में कही भी राज्यों के लिए  इसे लागू करना अनिवार्य नहीं किया गया है !! यही कारण है कि केन्द्र सरकार द्वारा इस योजना को 01 जनवरी 2004 से अपने कर्मियों पर अनिवार्य रूप से लागू करने के बाद भी अधिकांश राज्यों में पुरानी पेंशन योजना ही लागू रही !!

श्री परमार ने बताया कि नागालैंड , मिजोरम और मेघालय में पुरानी पेंशन योजना जहाँ 2010 तक लागू रही वही छत्तीसगढ़ में 2012 तक और केरल में 2013 तक !! यही नहीं पश्चिम बंगाल में तो पुरानी पेंशन योजना आज भी लागू है !! इसलिए यह नि:संकोच  कहा जा सकता है कि कोई भी राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए स्वतंत्र है !!
नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस ) के जिलाध्यक्ष दिनेश परमार ने राज्य शासन से मांग की है कि राज्य कर्मचारियों के हित में नई पेंशन योजना रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल किया जाए !!
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