दुनिया में आयुर्वेद को नई पहचान दिलाने में मध्यप्रदेश नेतृत्व करे : आयुष राज्य मंत्री श्री कावरे

By
sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
3 Min Read

भोपाल । आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रामकिशोर कावरे ने कहा है कि मध्यप्रदेश के वन आयुर्वेद वनस्पति के मामले में काफी समृद्ध हैं। यहाँ नये-नये शोध किये जाने की काफी संभावना है।
उन्होंने युवाओं से इस दिशा में प्रभावी प्रयास किये जाने का आहवान किया। राज्य मंत्री श्री कावरे आज भोपाल के रवीन्द्र भवन में तीन दिवसीय नेशनल आयुर्वेद यूथ कॉन्क्लेव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
समारोह में उन्होंने देश के प्रख्यात आयुर्वेद वैधों को भी सम्मानित किया। इस मौके पर भोपाल सांसद सुश्री प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी मौजूद थीं।
राज्य मंत्री श्री कावरे ने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति में आयुर्वेद का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। नये शोध न होने के कारण आयुर्वेद की पुरानी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि ऐसा प्रयास करें कि दुनिया में आयुर्वेद को नई पहचान दिलाने में मध्यप्रदेश अग्रणी बने।
कोरोना काल की चर्चा करते हुए राज्य मंत्री श्री कावरे ने कहा कि उस संकट के दौर में आयुष विभाग ने जन-सामान्य में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ठोस काम किया है।
घर-घर पहुँचकर जन-सामान्य को काढ़ा और चूर्ण का वितरण किया गया। इसके साथ ही एक लाख से अधिक लोगों को ऑनलाइन योग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
राज्य मंत्री श्री कावरे ने कहा कि प्रदेश में आयुष से जुड़े चिकित्सक को समयमान वेतन का लाभ दिलाया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में 700 मेडिकल ऑफिसर के पदों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राज्य में 362 वेलनेस सेंटर कार्य कर रहे हैं।
भोपाल के पंडित खुशीलाल वैद्य आयुर्वेद अस्पताल को आदर्श अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने निर्धन छात्रों को आयुर्वेद की पढ़ाई में निजी महाविद्यालयों से आर्थिक मदद दिये जाने का आग्रह किया।
सांसद सुश्री प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि उन्होंने संसद में आयुर्वेद से जुड़े चिकित्सकों को एलोपैथी चिकित्सकों के समान सभी सुविधा दिये जाने का मुद्दा उठाया है।
उन्होंने कहा कि देश में हमेशा से नाड़ी वैदों का उच्च स्थान रहा है। उन्होंने इस परम्परा को युवाओं में भी स्थानांतरित किये जाने पर जोर दिया।
नेशनल आयुर्वेद यूथ कॉन्क्लेव संयोजनम्-2022 में 18 प्रदेशों के करीब 2200 युवाओं ने भाग लिया। तीन दिवसीय समारोह में युवाओं द्वारा आयुर्वेद के क्षेत्र में किये जा रहे नये शोध पत्रों को प्रस्तुत किया गया।
समारोह में खेल प्रतियोगिताओं के साथ रंगोली, निबंध एवं नाटय की भी प्रस्तुतियाँ हुईं। समारोह को विश्व आरोग्य परिषद के पदाधिकारी डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने भी संबोधित किया।
वर्ल्ड रिकार्ड ऑफ आयुर्वेद
आज भोपाल के रवीन्द्र भवन में अष्टांग हृदय श्लोक प्रयाण का भी वर्ल्ड रिकार्ड बनाया गया। इसमें करीब 1900 प्रतिभागियों ने एक साथ श्लोक का वाचन किया।
Share This Article
Follow:
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।