MP News – दिग्विजय का दावा, भारत में मुसलमान कभी बहुसंख्यक नहीं हो सकते, मोहन भागवत और संघ प्रचारकों को दी बहस की चुनौती

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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Mp News. वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को दावा किया कि देश में मुस्लिमों की जन्म दर लगातार घट रही है। उन्होंने कहा, मुस्लिमों की जनसंख्या कभी भी इतनी नहीं बढ़ सकती कि वे संख्या बल में हिंदुओं को पछाड़कर बहुमत वाला समुदाय बन सकें।

दिग्विजय यहां सामुदायिक सद्भाव पर आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसका आयोजन कांग्रेस, वाम दलों और मजदूर संगठनों ने मिलकर किया था। इस दौरान मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने दक्षिणपंथी नेताओं और उनके संगठनों पर हमला बोलते हुए कहा, यह झूठा दुष्प्रचार किया जा रहा है कि बहुविवाह के जरिये मुस्लिमों की जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी के कारण अगले 10 साल में वे भारत में बहुमत वाला समुदाय बन जाएंगे, जबकि हिंदू घटकर अल्पसंख्यक रह जाएंगे।

उन्होंने कहा, मैं भागवत और छोटे संघ प्रचारकों को इस मुद्दे पर एक जन बहस के लिए चुनौती देता हूं। मैं साबित करूंगा कि मुस्लिम कभी हिंदुओं को पछाड़कर इस देश में एक बहुमत वाला समुदाय नहीं बन सकते, क्योंकि मुस्लिमों की जनसंख्या लगातार घट रही है। दिग्विजय ने कहा, एक आम आदमी के लिए अपनी एक पत्नी और उससे पैदा हुए बच्चों का ही ऐसी महंगाई में पालना कठिन है। ऐसे हालात में कौन सा मुस्लिम चार पत्नियों और उनसे पैदा हुए बच्चों का बोझ उठा सकता है?

भाजपा की तुलना रावण के दस सिर से की : राज्य सभा सांसद सिंह ने सांप्रदायिक भाजपा और आरएसएस की आलोचना करने के लिए उनकी तुलना राक्षस रावण और उसके दस सिरों से की। उन्होंने कहा, भाजपा और आरएसएस के शब्द व व्यवहार आपस में मेल नहीं खाते हैं। रावण के दस सिर थे और वह उनके जरिये अलग-अलग बात बोलता था।

भाजपा और संघ की स्थिति भी ऐसी ही है। उन्होंने कहा, एकतरफ संघ कार्यकर्ता सांप्रदायिक जहर फैला रहे हैं और दूसरी तरफ संघ प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं कि हिंदुओं और मुस्लिमों का डीएनए समान है। मैं भागवत को एक खुली बहस की चुनौती देता हूं। यदि हिंदुओं और मुस्लिमों के डीएनए समान हैं तो क्यों साम्प्रदायिक घृणा फैलाई जा रही है और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों की क्या जरूरत है?

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।