MP News – 5 साल तक नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम, अगर 70 लाख उपभोक्ताओं से बकाया राशि की वसूली हो 

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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MP News: मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों के 12 हजार 578 करोड़ रुपए बकाया हैं। ये राशि वसूल ली जाए, तो 5 साल तक बिजली के दाम नहीं बढ़ाने पड़ेंगे। इधर व्यवस्था सुधारने के लिए बिजली कंपनियों को संसाधन के साथ मैन पावर की जरूरत है, लेकिन कमियां पूरी करने में बकाए की राशि का हवाला देकर हीला हवाली की जाती है और खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।

मध्यप्रदेश में जब भी बिजली के महंगे दाम को लेकर सवाल उठता है, तो बिजली कंपनियों के घाटे का हवाला दिया जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बिजली कंपनियों का 12 हजार 578 करोड़ रुपए बकाया है। अगर ये राशि वसूल ली जाए, तो कोई घाटा नहीं रहेगा। इतना ही नहीं अगले 5 साल तक बिजली के दाम बढ़ाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन बिजली कंपनियां वसूली की ज़हमत नहीं उठा रही है। प्रदेश के करीब 70 लाख बिजली उपभोक्ता बकाया राशि नहीं दे रहे है, जिसका खामियाजा बाकी के 1 करोड़ 66 लाख उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्री का कहना है कि इस संबंध में सीएम शिवराज सिंह से बात की जाएगी। सवाल ये है कि आखिर बिजली कंपनियां बकाया राशि क्यों नहीं वसूल पा रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण राजनीतिक दबाव है। बड़े बकायेदारों पर वसूली करने में राजनीतिक रसीद आड़े आ जाती है, तो कई जगह लड़ाई, झगड़े और मारपीट हो जाती है, जिससे मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। करोड़ों का बकाया और वसूली में बिजली कंपनियों की उदासीनता का खामियाजा उन उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है, जो ईमानदारी से अपने हिस्से की अदायगी कर रहे है। ऐसे में सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाने की जरूरत है।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।