National News – Ola-Uber के किराए को लेकर आई बड़ी खबर! ऑटो पर भी पड़ेगा असर

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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National News. आम जनता को महंगाई का फिर झटका लगने वाला है. अब ऐप बेस्ड कैब सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से बुक किए गए ऑटो के किराये पर भी जीएसटी (GST on Auto Fare) लगाने का फैसला किया गया है. नए साल में भी आम जनता को महंगाई का तगड़ा झटका लगने वाला है. एक जनवरी से कई सर्विसेज और सामानों पर टैक्स (GST) बढ़ रहा है. आपको बता दें कि कई चीजें जो अब तक टैक्स के दायरे से बाहर थीं उन्हें भी अब टैक्सेबल (Taxable) बनाया जा रहा है. यानी अब लोगों की जेब फिर से ढीली होने वाली है. इसी क्रम में जो ओला (Ola) या उबर (Uber) जैसी ऐप बेस्ड कैब सर्विस (App Based Cab Service Provider) को यूज करने वाले ग्राहकों को भी अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.
जीएसटी काउंसिल ने किए ये बदलाव
 जीएसटी काउंसिल (GST Council) साल 2021 में अपनी पिछली बैठक में टैक्स को लेकर कई फैसले कीये हैं. जैसे- 1000 रुपये से कम के रेडीमेड कपड़ों और जूतों पर जीएसटी (GST on Readymade Garments and Shoes) की दर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया है. वहीं, ऑनलाइन फूड ऑर्डर (GST on Online Food Order) पर अब रेस्टोरेंट के बजाय डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर से ही टैक्स वसूला जाएगा. इसके अलावा अब ऐप बेस्ड कैब सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से बुक किए गए ऑटो के किराये पर भी जीएसटी (GST on Auto Fare) लगाए जाने का फैसला किया गया है.
 ऑफलाइन ऑटो टैक्सेबल नहीं
 हालांकि, जीएसटी काउंसिल के इस फैसले से सामान्य ऑटो के किराये पर असर नहीं होगा क्योंकि ये अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं. दरअसल, सरकार ऐप से ऑटो बुक करने वाले कम्यूटर्स को प्रीमियम कैटेगरी में रखती है इसीलिए, अब ऐप बेस्ड कैब के साथ ही ऐप बेस्ड ऑटो को भी जीएसटी के दायरे में लाया जा रहा है.
आप पर क्या पड़ेगा असर?
अब सवाल है कि इससे आम जनता पर क्या असर पड़ेगा. सरकार के इस फैसले से आम लोगों पर किराये का बोझ बढ़ सकता है. दरअसल, अभी तक ग्राहक ऑटो चालकों की मनमानी से बचने के लिए ऑनलाइन बुकिंग करना पसंद करते थे. लेकिन इस फैसले के बाद, अब ये बुकिंग सुविधा पहले की अपेक्षा पांच फीसदी महंगी होने जा रही है. यानी अब ऑफलाइन बुकिंग में ऑटो ड्राइवर अब अधिक किराये की डिमांड कर सकते हैं.
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।