Religious And Spiritual News – देवउठनी एकादशी 2021, जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त और पूजा- विधि

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस साल देवउठनी एकादशी 14 नवंबर, रविवार के दिन पड़ रही है. इस दिन से एक बार फिर भगवान विष्णु पूरी सृष्टि का कार्यभार संभाल लेंगे और शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे. 4 महीनों के दौरान यह शुभ काम वर्जित रहते हैं. भगवान विष्णु के जागने पर एकादशी के दिन भक्त उनकी पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं.

देवउठनी एकादशी को होगा तुलसी विवाह

देवउठनी एकादशी इसी दिन तुलसी जी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह रचाया जाता है और इसी के साथ शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं और वे मां लक्ष्‍मी का ही रूप है. इस दिन व्रत रखने वाले व्रती 15 नवंबर को पारण कर सकेंगे.

मुहूर्त

कार्तिक, शुक्ल एकादशी प्रारम्भ – सुबह 05:48, नवम्बर 14

कार्तिक, शुक्ल एकादशी समाप्त – सुबह 06:39, नवम्बर 15

पारण समय

15 नवम्बर को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:10 pm से 03:19 pm

पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 01:00 pm

भगवान की पूजा करके घंटा, शंख, मृदंग आदि के साथ आरती करें और फूल अर्पण करके प्रार्थना करें।

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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।