Religious And Spiritual News – हनुमान जन्मोत्सव’ वर्ष में 2 बार मनाया जाता है, जानिए कब और क्यों?

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sadbhawnapaati
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 हनुमान जन्मोत्सव वर्ष में 2 बार मनाया जाता है। पहला हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्‍ल पूर्णिमा को, दूसरा कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को। इसके अलावा तमिलनाडु और केरल में हनुमान जन्मोत्सव मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा ओडिशा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है।
1. कहते हैं कि चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न, चित्रा नक्षत्र में मंगलवार के दिन प्रातः 6 बजकर 03 मिनट पर हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था।
2. एक अन्य मान्यता अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था।
3. मान्यता के अनुसार एक तिथि को जन्म दिवस के रूप में, जबकि दूसरी तिथि को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
4. चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की मान्यता अनुसार उनका जन्म हुआ था। दूसरी तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझकर खाने के लिए दौड़े थे, उसी दिन राहु भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमानजी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया था।
5. एक अन्य मान्यता के अनुसार माता सीता ने हनुमानजी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया था। यह दिन नरक चतुर्दशी का दिन था।
6. हालांकि अधिकतर जगहों पर हनुमानजी का जन्म चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन होने की ही मान्यता है। हनुमानजी की माता का नाम अंजनी और पिता का नाम केसरी था। उन्हें पवनपुत्र और शंकरसुवन भी कहा जाता है। वे भगवान शिवजी के सभी रुद्रावतारों में सबसे बलवान और बुद्धिमान माने जाते हैं।
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।