Religious And Spiritual News – सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में ‘सूतक’ काल का महत्व और सावधानियां

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सदभावना पाती
सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण की जब बात आती है, तो सबसे पहले ध्यान सूतक काल पर जाता है. सूतक काल क्या होता है? आइए जानते हैं.
वर्ष 2021 का पहला चंद्र ग्रहण 26 मई 2021 को लग चुका है. वहीं पहला सूर्य ग्रहण 10 जून 2021 को लगा था. ज्योतिष गणना के अनुसार अब दो ग्रहण शेष रह गए हैं. तीसरा ग्रहण, चंद्र ग्रहण के रूप में लगने जा रहा है. जो 19 नवंबर 2021 को लगेगा. इसके बाद साल 2021 का आखिरी सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर 2021 को लगेगा. ग्रहण की जब बात आती है, सूतक काल का जिक्र अवश्य आता है.
सूतक क्या होता है?
मान्यता है कि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान प्रकृति संवेदनशील हो जाती है. नकारात्मक ऊर्जा के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में अनहोनी होने की आशंका भी अधिक रहती है. इसलिए ग्रहण के समय कुछ देर का सूतक काल मान लिया जाता है. जिसमें महत्वपूर्ण और शुभ कार्यों में सावधानी बरती जाती है. शास्त्रों में भी सूतक काल और इसके नियमों के बारे में बताया गया है.
सूतक कब लगता है?
सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक काल आरंभ होता है. वहीं मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के 09 घंटे पूर्व सूतक काल आरंभ होता है. इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. सूतक काल तभी मान्य होता है जब पूर्ण ग्रहण की स्थिति बनती है. आंशिक या उपछाया ग्रहण होने पर सूतक काल मान्य नहीं होता है. इस वर्ष लगने वाले ग्रहणों में सूतक काल मान्य नहीं है. ये सभी उपछाया ग्रहण बताए जा रहे हैं.
सूतक काल में वर्जित कार्य
सूतक काल के दौरान मान्यता है कि मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए.सूतक लगने पर भोजन आदि ग्रहण नहीं किया जाता है. इस समय भोजन पकाना भी अच्छा नहीं माना गया है. वहीं सूतक काल में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
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