Religious And Spiritual News – आज है गुरु प्रदोष व्रत; भगवान शिव को है समर्पित, जानें कारण?

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sadbhawnapaati
"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार...
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Religious News.  हर माह में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं. एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष में. मार्गशीर्ष या अगहन माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित किया जाता है. इस बार 16 दिसंबर, गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा. गुरुवार को इस व्रत के होने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहेंगे. इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती भगवान विष्णु का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है. आइए जानते हैं प्रदोष व्रत भगवान शिव को क्यों समर्पित किया जाता है।
भगवान शिव को समर्पित है व्रत
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब भी विष निकाला तो महादेव ने सृष्टि को बचाने के लिए वो विष पी लिया। विष पीते ही महादेव का कंठ शरीर नीला पड़ गया। उन्हें असहनीय जलन होने लगी। उस समय देवताओं ने जल, बेलपत्र आदि से महादेव की जलन को कम किया।
विष पीकर महादेव ने संसार की रक्षा की, ऐसे में पूरा विश्व भगवान का ऋणी हो गया. उस समय देवताओं ने महादेव की स्तुति की, जिससे महादेव बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने तांडव किया. इस घटना के वक्त त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल था. उस समय से महादेव को ये तिथि प्रदोष काल सबसे प्रिय हो गया. इसके साथ ही महादेव को प्रसन्न करने को लेकर भक्तों ने त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल में पूजन की परंपरा शुरू कर दी इस व्रत को प्रदोष व्रत का नाम दिया जाने लगा
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"दैनिक सदभावना पाती" (Dainik Sadbhawna Paati) (भारत सरकार के समाचार पत्रों के पंजीयक – RNI में पंजीकृत, Reg. No. 2013/54381) "दैनिक सदभावना पाती" सिर्फ एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि समाज की आवाज है। वर्ष 2013 से हम सत्य, निष्पक्षता और निर्भीक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर चलते हुए प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरें आप तक पहुंचा रहे हैं। हम क्यों अलग हैं? बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के, हम सत्य की खोज करके शासन-प्रशासन में व्याप्त गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को उजागर करते है, हर वर्ग की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना, समाज में जागरूकता और सदभावना को बढ़ावा देना हमारा ध्येय है। हम "प्राणियों में सदभावना हो" के सिद्धांत पर चलते हुए, समाज में सच्चाई और जागरूकता का प्रकाश फैलाने के लिए संकल्पित हैं।